नरवाई जलाने पर किसानों को मिली सजा: मंदसौर प्रशासन ने वसूला ₹42,500 का जुर्माना

Mandsaur News: मंदसौर जिले में फसल कटाई के बाद अवशेष (नरवाई) जलाने वाले किसानों के खिलाफ प्रशासन ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। सूत्रों के मुताबिक शनिवार को कलेक्टर अदिति गर्ग के निर्देश पर सीतामऊ अनुविभागीय क्षेत्र में गेहूं की नरवाई जलाने के दोषी पाए गए 16 किसानों पर कुल 42,500 रुपए का जुर्माना लगाया गया है।

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NGT नियमों के उल्लंघन पर एक्शन

मध्यप्रदेश शासन और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के स्पष्ट निर्देश हैं कि खेतों में गेहूं या धान के अवशेष जलाना पूरी तरह प्रतिबंधित है। सीतामऊ एसडीएम ने क्षेत्र के विभिन्न गांवों का निरीक्षण किया, जहां 16 खेतों में आग लगाई गई थी। प्रशासन ने इसे पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधि माना और संबंधित किसानों पर अर्थदंड की कार्रवाई की।

इन गांवों के किसानों पर लगा दंड…

प्रशासन द्वारा जारी सूची के अनुसार, ग्राम कायमपुर, ढंढेड़ा, रामखेड़ा, साखतली, खजूरीगौड़, कराड़िया, धाकड़ पिपलिया, खेड़ी, अरनियागौड़, लखुपिपलिया और मुण्डला के किसान इस कार्रवाई की जद में आए हैं।

  • प्रमुख कार्रवाई: अधिकांश किसानों पर ₹2,500 का जुर्माना लगाया गया है, जबकि ग्राम साखतली के किसान अम्बालाल पर सबसे अधिक ₹5,000 का अर्थदंड लगाया गया।

नरवाई जलाने के दुष्प्रभाव…

प्रशासन ने किसानों को चेतावनी देते हुए बताया कि नरवाई जलाने से न केवल वायु प्रदूषण फैलता है, बल्कि:

  1. मिट्टी की ऊपरी परत के मित्र कीट मर जाते हैं।

  2. जमीन की उर्वरता (उपजाऊ शक्ति) कम हो जाती है।

  3. गर्मी के मौसम में आगजनी की बड़ी घटनाओं का खतरा रहता है।

सख्त चेतावनी….

प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सेटेलाइट और स्थलीय निरीक्षण के जरिए नरवाई जलाने वाले खेतों की निगरानी की जा रही है। भविष्य में भी नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाए जाएंगे। किसानों से अपील की गई है कि वे अवशेषों को जलाने के बजाय खाद बनाने या भूसा बनाने जैसे वैकल्पिक तरीके अपनाएं।