Bhopal News: मध्यप्रदेश के लिए एक चिंताजनक खबर सामने आई है। कंसोर्टियम फॉर रिसर्च ऑन एग्रोइकोसिस्टम मॉनिटरिंग एंड मॉडलिंग फ्रॉम स्पेस (CREAMS) और ICAR के ताजा आंकड़ों के अनुसार, गेहूं की पराली जलाने के मामलों में मध्यप्रदेश अब देश में पहले स्थान पर पहुंच गया है।
आंकड़ों की जुबानी: एमपी की 69% हिस्सेदारी
देश के पांच प्रमुख राज्यों में दर्ज कुल 29,167 मामलों में से अकेले मध्यप्रदेश की हिस्सेदारी लगभग 69% है। 1 से 21 अप्रैल 2026 के बीच राज्य में पराली जलाने की 20,164 घटनाएं दर्ज की गईं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि जिस गति से मामले बढ़ रहे हैं, इस साल फसल अवशेष जलाने के पिछले सभी रिकॉर्ड टूट सकते हैं।
हॉटस्पॉट जिले: विदिशा और उज्जैन सबसे आगे
चौंकाने वाली बात यह है कि केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का संसदीय क्षेत्र विदिशा इस सूची में शीर्ष पर है। प्रमुख जिलों का विवरण इस प्रकार है:
विदिशा: 2,086 मामले (शीर्ष पर)
उज्जैन: 2,053 मामले
रायसेन: 1,982 मामले
होशंगाबाद: 1,705 मामले
सिवनी: 1,369 मामले
अन्य राज्यों की स्थिति
पराली प्रबंधन के मामले में मध्यप्रदेश की तुलना में अन्य राज्यों की स्थिति काफी भिन्न है:
उत्तर प्रदेश: 8,889 मामलों के साथ दूसरे स्थान पर।
हरियाणा: मात्र 65 मामले।
पंजाब: सबसे कम 44 घटनाएं।
पिछले पांच वर्षों में मध्यप्रदेश में कुल 77 हजार से ज्यादा केस दर्ज किए जा चुके हैं। प्रशासन के तमाम दावों और जागरूकता अभियानों के बावजूद, खेतों में लगती यह आग पर्यावरण और मिट्टी की उर्वरता के लिए बड़ा खतरा बनी हुई है।