Ujjain News: मध्यप्रदेश के उज्जैन में इन दिनों साध्वी हर्षानंद गिरी को लेकर संत समाज में आक्रोश देखने को मिल रहा है। मॉडल और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर से साध्वी बनीं स्वामी हर्षानंद गिरि (पूर्व नाम हर्षा रिछारिया) ने अपने खिलाफ उठ रहे संतों के सुरों पर कड़ा पलटवार किया है। उन्होंने न केवल खुद पर लगे विदेशी फंडिंग के आरोपों को खारिज किया, बल्कि आरोप लगाने वाले संतों को ₹1 करोड़ की मानहानि का नोटिस देने की चेतावनी भी दी है।
चैलेंज: ‘एक भी आरोप सही निकला तो संपत्ति दान कर दूंगी’
स्वामी हर्षानंद गिरि ने एक वीडियो जारी कर अपनी सफाई पेश की। उन्होंने कहा कि उन पर ‘फॉरेन फंडिंग’ के जो आरोप लगाए जा रहे हैं, वे पूरी तरह निराधार हैं। हर्षानंद ने खुले मंच से चुनौती देते हुए कहा, “अगर मुझ पर लगा एक भी आरोप सही साबित हुआ, तो मैं अपनी पूरी संपत्ति अर्पित कर दूंगी। लेकिन यदि आरोप गलत निकले, तो संबंधित पक्ष को ₹1 करोड़ मानहानि के तौर पर देने होंगे।” उन्होंने पारदर्शिता के लिए अपनी बैंक डिटेल्स तक सार्वजनिक करने की बात कही है।
साध्वी का चश्मा और ‘नचनिया’ शब्द पर विवाद
अपने लुक और पहनावे को लेकर हो रही आलोचनाओं पर हर्षानंद ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि वे फैशन के लिए नहीं, बल्कि डॉक्टर की सलाह पर चश्मा पहनती हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या एक साध्वी को अपनी सेहत का ख्याल रखने का भी अधिकार नहीं है?
उन्होंने कुछ संतों द्वारा इस्तेमाल किए गए “नचनिया-कुदनिया” जैसे शब्दों पर गहरी आपत्ति जताते हुए इसे नारी शक्ति का अपमान बताया। हर्षानंद ने पूछा, “जब पुरुष संतों के पुराने विवाद सामने आते हैं, तब कोई नहीं बोलता, लेकिन एक महिला के संन्यास लेने पर इतना विरोध क्यों? क्या यह पुरुषों के अहंकार की लड़ाई है?”
संत समाज का विरोध: “900 चूहे खाकर बिल्ली हज को चली”
इस पूरे विवाद की जड़ में मध्य प्रदेश संत समिति के अध्यक्ष महाराज अनिलानंद का बयान है। उन्होंने हर्षानंद के संन्यास पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि यह सनातन धर्म की मर्यादा के खिलाफ है। अनिलानंद महाराज ने तंज कसते हुए कहा, “900 चूहे खाकर बिल्ली हज को नहीं जा सकती। संन्यास कोई पब्लिसिटी स्टंट नहीं, बल्कि वर्षों की कठिन साधना है।”
संत समाज के विरोध के मुख्य बिंदु:
परंपरा का अपमान: संतों का तर्क है कि हर्षा ने पहले भी सनातन धर्म को लेकर विवादित बयान दिए हैं, ऐसे में उनका अचानक संन्यासी बन जाना स्वीकार्य नहीं है।
पब्लिसिटी का आरोप: अनिलानंद महाराज ने आरोप लगाया कि बार-बार संन्यास और दीक्षा की प्रक्रिया को मीडिया में उछालना केवल चर्चा में रहने का जरिया है।
जांच की मांग: उन्होंने हर्षानंद को दीक्षा दिलाने वाले महामंडलेश्वर सुमनानंदजी महाराज की भी जांच करने की मांग अखाड़ा परिषद से की है।
प्रयागराज महाकुंभ से शुरू हुआ ‘साध्वी’ का सफर
हर्षा रिछारिया की चर्चा तब शुरू हुई थी जब 4 जनवरी 2025 को प्रयागराज महाकुंभ में निरंजनी अखाड़े की पेशवाई के दौरान वे संतों के साथ रथ पर बैठी नजर आई थीं। उस वक्त मीडिया ने उन्हें ‘सुंदर साध्वी’ का नाम दिया था, जिस पर उन्होंने आपत्ति जताते हुए कहा था कि वे अभी केवल दीक्षा ग्रहण कर रही हैं, पूर्ण साध्वी नहीं बनी हैं।
कौन हैं हर्षानंद गिरि (हर्षा)?
करियर: वे एक पेशेवर स्टेज एंकर, मॉडल और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर रही हैं।
फॉलोअर्स: इंस्टाग्राम और फेसबुक पर उनकी बड़ी फैन फॉलोइंग है, जहां वे सनातन संस्कृति से जुड़े वीडियो शेयर करती हैं।
शिक्षा: वे ग्रेजुएट हैं और उन्होंने अहमदाबाद से योग में विशेष कोर्स किया है।
आध्यात्मिक गुरु: वे निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज की शिष्या हैं।
अखाड़ा परिषद तक पहुँचा मामला
अनिलानंद महाराज ने इस मामले को अखाड़ा परिषद के समक्ष ले जाने की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि उज्जैन में आगामी सिंहस्थ और अन्य बड़े धार्मिक आयोजनों को देखते हुए सनातन परंपराओं के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने राज्य सरकार से भी मांग की है कि इस तरह के ‘दिखावटी’ संन्यास के मामलों को गंभीरता से लिया जाए।
दूसरी ओर, स्वामी हर्षानंद गिरि का कहना है कि वे 2019 से उत्तराखंड की दुर्गम पहाड़ियों में साधना कर रही हैं और उनका यह जीवन सुख-सुविधाओं के त्याग के बाद शुरू हुआ है। अब देखना यह होगा कि अखाड़ा परिषद इस ‘ग्लैमर बनाम आध्यात्म’ की लड़ाई में क्या रुख अपनाता है।
संन्यास का नियम: सनातन परंपरा के अनुसार, संन्यास ग्रहण करने से पहले व्यक्ति को कठिन नियमों, ब्रह्मचर्य और पंच-संस्कारों से गुजरना पड़ता है। अखाड़ों में इसकी एक लंबी और अनुशासित प्रक्रिया होती है।