Indore/Dhar News: मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर का विवाद अब अपने सबसे महत्वपूर्ण और निर्णायक चरण में पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख और तय समय सीमा के भीतर फैसला सुनाने के निर्देश के बाद, इस संवेदनशील मामले की सुनवाई में तेजी आ गई है। सोमवार का दिन इस केस के लिए बेहद खास है, क्योंकि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा किए गए वैज्ञानिक सर्वे की पूरी वीडियोग्राफी हाईकोर्ट के आधिकारिक पोर्टल पर अपलोड की जा रही है।
वीडियोग्राफी से बढ़ेगी पारदर्शिता
मुस्लिम पक्ष की मांग को स्वीकार करते हुए अदालत ने सर्वे के वीडियो फुटेज को पोर्टल पर डालने का आदेश दिया था। मुस्लिम पक्ष का तर्क है कि वीडियोग्राफी का गहन अध्ययन करने के बाद ही वे अपनी आपत्तियां और साक्ष्य मजबूती से पेश कर पाएंगे। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह वीडियोग्राफी इस पूरे विवाद में ‘गेम चेंजर’ साबित हो सकती है, क्योंकि यह सर्वे की पारदर्शिता और वहां मिले अवशेषों की वास्तविकता को स्पष्ट रूप से सामने रखेगी।
अदालत में रोजाना सुनवाई और ‘सुप्रीम’ डेडलाइन
मामले की गंभीरता को देखते हुए जस्टिस विजयकुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की डिवीजन बेंच इस केस की रोजाना सुनवाई कर रही है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि हाईकोर्ट को तीन सप्ताह के भीतर पूरी सुनवाई प्रक्रिया संपन्न कर अपना फैसला सुनाना होगा। इसी डेडलाइन के दबाव और न्याय की शुचिता को देखते हुए अदालत साक्ष्यों की बारीकी से जांच कर रही है।
दलीलों का दौर: अब हिंदू पक्ष की बारी
बीते शुक्रवार को मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने अपनी बहस पूरी की थी। उन्होंने सर्वे की कार्यप्रणाली और निष्कर्षों पर कई तकनीकी सवाल खड़े किए थे।
हिंदू पक्ष का रुख: ‘हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस’ पहले ही अपनी दलीलें रख चुका है।
ताजा अपडेट: सोमवार से हिंदू पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शोभना मेनन मोर्चा संभाल रही है। वे अपनी दलीलों में एएसआई के निष्कर्षों का समर्थन करेंगी और यह साबित करने का प्रयास करेंगी कि सर्वे के दौरान मिले साक्ष्य उनके दावों की पुष्टि करते हैं।
आपत्तियों और जवाबी तर्कों की तैयारी
हिंदू पक्ष के वकीलों का कहना है कि यदि मुस्लिम पक्ष वीडियोग्राफी देखने के बाद कोई नई आपत्ति दर्ज कराता है, तो वे उसका विधिवत और तथ्यों के साथ जवाब देने के लिए तैयार हैं। दूसरी ओर, मुस्लिम पक्ष इस फुटेज को अपने दावों के समर्थन में इस्तेमाल करने के लिए तकनीकी विशेषज्ञों की मदद ले सकता है।
निष्कर्ष की ओर बढ़ता मामला
धार की भोजशाला का विवाद दशकों पुराना है, लेकिन वैज्ञानिक साक्ष्यों (ASI Survey) और डिजिटल सबूतों (Videography) के इस दौर में अब उम्मीद की जा रही है कि न्यायपालिका किसी ठोस नतीजे पर पहुंचेगी। जैसे-जैसे साक्ष्य पोर्टल पर सार्वजनिक होंगे, दोनों पक्षों के बीच कानूनी टकराव और तेज होने के आसार हैं। फिलहाल, पूरे प्रदेश और देश की निगाहें इंदौर हाईकोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी हुई हैं।