उमा भारती का बड़ा बयान-“कोई माई का लाल आरक्षण नहीं छीन सकता”

Bhopal News: भोपाल के जम्बूरी मैदान में सोमवार को राजा हिरदेशाह लोधी की शौर्य यात्रा के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने आरक्षण और सामाजिक समानता को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। लोधी-लोधा समाज के विशाल समागम को संबोधित करते हुए उमा भारती ने स्पष्ट किया कि देश में जब तक बुनियादी बदलाव नहीं आते, तब तक आरक्षण व्यवस्था को कोई हिला नहीं सकता।

“सरकारी स्कूल जाएंगे पीएम-राष्ट्रपति के बच्चे, तभी खत्म होगी असमानता”

आरक्षण के मुद्दे पर उमा भारती ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा, “देश में सामाजिक बराबरी सुनिश्चित करने के लिए आरक्षण एक अनिवार्य व्यवस्था है। जब तक देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और चीफ जस्टिस जैसे शीर्ष पदों पर बैठे लोगों के परिवार के बच्चे आम नागरिकों के साथ सरकारी स्कूलों में नहीं पढ़ेंगे, तब तक आरक्षण कोई माई का लाल नहीं छीन सकता।”

उन्होंने तर्क दिया कि भारतीय समाज सदियों तक जातिगत और आर्थिक विषमताओं में बंटा रहा है। बराबरी केवल कानून की किताबों से नहीं आएगी, बल्कि इसे व्यवहार में लाना होगा। जब सत्ता के शिखर पर बैठे लोगों का जुड़ाव सरकारी शिक्षा व्यवस्था से होगा, तभी समाज में वास्तविक समानता का उदय होगा।

राम मंदिर, तिरंगा और ‘काले अंग्रेजों’ पर प्रहार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए उमा भारती ने इसे ‘आजादी की दूसरी लड़ाई’ का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि 2014 में जब मोदी जी ने शपथ ली, तब विदेशी मीडिया ने हमें ‘काले अंग्रेजों’ का वारिस बताया था, लेकिन आज हम आधुनिक (Modernize) हो रहे हैं, पश्चिमी (Westernize) नहीं।

उन्होंने भाजपा के इतिहास को याद करते हुए कहा कि एक समय था जब भाजपा को पिछड़ा विरोधी कहा जाता था, लेकिन हमने इस भ्रम को तोड़ दिया। उन्होंने त्याग की मिसाल देते हुए कहा, “एक व्यक्ति (कल्याण सिंह) ने राम मंदिर के लिए अपनी मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ दी, तो दूसरी (स्वयं उमा भारती) ने तिरंगे के सम्मान के लिए अपना पद त्याग दिया।”

POK की वापसी और पाकिस्तान को चेतावनी

उमा भारती ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की बढ़ती साख का जिक्र करते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत अपना खोया हुआ गौरव वापस पा रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि एक दिन भारत ‘पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर’ (PoK) को वापस लेकर रहेगा और पाकिस्तान को घुटनों पर बैठकर माफी मांगनी होगी। उन्होंने पहलगाम की घटना का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत अब ईंट का जवाब पत्थर से देना जानता है।

लोधी समाज की ताकत और प्रीतम लोधी की ‘सीएम’ वाली मांग

कार्यक्रम में पिछोर विधायक प्रीतम लोधी ने समाज की राजनीतिक भागीदारी पर बेबाक टिप्पणी की। उन्होंने कहा, “जब हेमा मालिनी के पति धर्मेंद्र को भारत रत्न मिल सकता है, तो हमारे कल्याण सिंह जी को क्यों नहीं?” उन्होंने चिंता जताई कि जिस लोधी समाज के कभी दो-दो मुख्यमंत्री हुआ करते थे, आज वहां ‘जीरो’ की स्थिति है। उन्होंने मांग की कि भारत में कम से कम एक लोधी मुख्यमंत्री तो होना ही चाहिए।

कार्यक्रम में दिग्गजों का जमावड़ा

इस शौर्य यात्रा और सभा में मध्य प्रदेश सरकार के कई कद्दावर मंत्री और नेता शामिल हुए, जिनमें शामिल हैं:

  • पंचायत मंत्री: प्रह्लाद पटेल

  • पर्यटन मंत्री: धर्मेंद्र सिंह लोधी

  • विधायक: अनुभा मुंजारे, प्रीतम लोधी, विरेंद्र सिंह लमबरदार, राम सिया भारती, और नीरज सिंह ठाकुर।

  • अन्य गणमान्य: जालम सिंह पटेल (अध्यक्ष, लोधी लोढ़ा महासभा) और राजा हिरदेशाह के वंशज कौशलेंद्र सिंह।

उमा भारती ने अंत में आह्वान किया कि अब समय आ गया है जब ‘समानता के अधिकार’ के लिए तीसरी आजादी की लड़ाई लड़ी जाए। उन्होंने लोधी समाज को उनकी जनसांख्यिकीय ताकत याद दिलाते हुए कहा कि यह समाज सरकारें बनाने और गिराने का दम रखता है। कार्यक्रम के दौरान उमा भारती का पारंपरिक ढाल-तलवार भेंट कर भव्य स्वागत किया गया।