इंदौर। सयाजी होटल में 24 कमियां मिलने के बाद खाद्य विभाग की कार्रवाई पर हाईकोर्ट की रोक ने एक नया और उससे भी बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। सवाल सिर्फ यह नहीं है कि होटल की किचन में चूहे-कॉकरोच और बिना लेबल वाली खाद्य सामग्री क्यों मिली, बल्कि अब सवाल होटल के खाद्य लाइसेंस की श्रेणी पर भी है।
NIDHI के सरकारी रिकॉर्ड में सयाजी ‘5-Star with Alcohol’; FSSAI नियमों में Five Star होटल के लिए Central License जरूरी, फिर भी 2028 तक State License ही है होटल के पास, तो कैसे मिली 5-Star रेटिंग?
पर्यटन मंत्रालय के National Integrated Database of Hospitality Industry (NIDHI) के आधिकारिक रिकॉर्ड में Sayaji Hotels Indore को “5-Star with Alcohol” के रूप में वर्गीकृत किया गया है। दूसरी ओर, हाईकोर्ट के 22 अगस्त के आदेश में दर्ज है कि होटल के पास State FSSAI License था, जो 29 अप्रैल 2028 तक वैध था।
यहीं से बड़ा सवाल उठता है—जब होटल की आधिकारिक Tourism classification Five Star है और FSSAI के नियम Five Star होटल को Central License के दायरे में रखते हैं, तो सयाजी के पास State License आखिर कैसे रहा?
FSSAI के नियम में Five Star होटल के लिए Central License
FSSAI के लाइसेंसिंग नियमों में होटल की Star Classification के आधार पर लाइसेंस की श्रेणी तय की गई है। Five Star और उससे ऊपर के होटल Central License के दायरे में आते हैं, जबकि कम Star Rating या non-star होटल State License के दायरे में आते हैं।
FSSAI ने यह भी स्पष्ट किया है कि Ministry of Tourism की Five Star classification वाले होटल को Central License लेना होता है।
ऐसे में सयाजी मामले में सवाल सीधे तौर पर लाइसेंस की श्रेणी पर आकर टिकता है।
कोर्ट में खाद्य विभाग ने खुद क्या कहा?
हाईकोर्ट के आदेश में खाद्य विभाग की ओर से पेश वकील का बयान दर्ज है। इसमें कहा गया कि संबंधित होटल 5-Star category का है और उसे restaurants, clubs/canteens और hotel में food services के लिए Central License लेना जरूरी था, जबकि होटल ने State License लिया हुआ था। विभाग ने इसे कार्रवाई में दर्ज कमियों में से एक बताया।
यानी Central License का सवाल सिर्फ बाद में उठाया गया आरोप नहीं है। यह बात खाद्य विभाग ने खुद हाईकोर्ट के सामने रखी है।
कोर्ट ने भी माना—Central License वाली कमी प्रथम दृष्टया वास्तविक
इस मामले में हाईकोर्ट की टिप्पणी भी महत्वपूर्ण है। अदालत ने लिखा कि होटल के Five Star category में होने के कारण Central License लेने की जरूरत वाली कमी “prima facie appears to be genuine” यानी प्रथम दृष्टया वास्तविक दिखाई देती है।
लेकिन अदालत ने इसी के साथ यह भी स्पष्ट किया कि सिर्फ State License होने के आधार पर तत्काल लाइसेंस सस्पेंड नहीं किया जा सकता था, क्योंकि State License होने से अपने-आप public health को नुकसान साबित नहीं होता।
यानी कोर्ट ने Central License की जरूरत वाले बिंदु को खारिज नहीं किया, बल्कि सवाल यह उठाया कि क्या इसी आधार पर बिना Improvement Notice दिए सीधे लाइसेंस सस्पेंड किया जा सकता था।
छापे के बाद वेबसाइट से 5-Star का उल्लेख हटाया, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में अब भी 5-Star
इस मामले में एक और सवाल अब सामने आ रहा है, जिसकी जांच जरूरी है।
सयाजी होटल की आधिकारिक वेबसाइट के मौजूदा Indore पेज पर होटल की सुविधाओं, कमरों और सेवाओं की जानकारी दी गई है, लेकिन उपलब्ध पेज पर 5-Star classification का उल्लेख दिखाई नहीं देता।
यदि निरीक्षण और कार्रवाई के बाद वेबसाइट से 5-Star का उल्लेख हटाया गया है, तो सवाल उठता है कि क्या केवल अपनी वेबसाइट से 5-Star का उल्लेख हटा देने से होटल की आधिकारिक classification बदल जाती है?
जवाब साफ है—नहीं।
पर्यटन मंत्रालय के NIDHI के आधिकारिक रिकॉर्ड में Sayaji Hotels Indore अभी भी “5-Star with Alcohol” के रूप में दर्ज है।
यानी अपनी वेबसाइट पर जानकारी दिखाई जाए या हटा दी जाए, उससे सरकारी classification अपने आप खत्म नहीं हो जाती।
और मामला सिर्फ NIDHI तक सीमित नहीं है। make my trip या hotels dot com जैसे Travels and Hotels जैसे प्लेटफॉर्म पर भी Sayaji Hotel Indore को 5-star hotel के रूप में दिखाया जा रहा है।
यहीं से ग्राहकों के हित का सवाल भी जुड़ता है।
अगर कोई होटल सरकारी रिकॉर्ड में Five Star classified है और लंबे समय से यात्रियों के सामने Five Star होटल के रूप में प्रस्तुत होता रहा है, तो उसकी वास्तविक classification, लाइसेंस श्रेणी और ग्राहकों को दी गई जानकारी के बीच कोई विसंगति थी या नहीं—इसकी जांच होना जरूरी है।
अगर वेबसाइट से 5-Star का उल्लेख कार्रवाई के बाद हटाया गया है, तो यह भी जांच का विषय होना चाहिए कि यह बदलाव कब किया गया, किसके निर्देश पर किया गया और उस समय होटल की आधिकारिक Star Classification क्या थी।
सिर्फ वेबसाइट से कोई शब्द हटा देने से अतीत में मौजूद आधिकारिक classification या दूसरे प्लेटफॉर्म पर मौजूद जानकारी खत्म नहीं हो जाती।
क्या यह ग्राहकों को गुमराह करने का मामला है?
यह सवाल भी अब जांच के दायरे में आना चाहिए।
यदि होटल की आधिकारिक Tourism classification Five Star थी और दूसरी तरफ FSSAI के रिकॉर्ड में State License चलता रहा, तो आम ग्राहक के लिए यह समझना मुश्किल हो सकता है कि होटल की वास्तविक regulatory स्थिति क्या है।
इसलिए यह जांच जरूरी है कि—
होटल ने ग्राहकों के सामने खुद को Five Star के रूप में कब से प्रस्तुत किया?
क्या होटल की वेबसाइट, बुकिंग प्लेटफॉर्म, ट्रैवल पोर्टल, विज्ञापन और अन्य प्रचार सामग्री में इसे Five Star बताया जाता रहा?
अगर हां, तो यह स्थिति कब से थी?
और क्या संबंधित सरकारी विभागों ने कभी इस classification और FSSAI license category के बीच अंतर की जांच की?
फिलहाल उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर इसे सीधे “ग्राहकों के साथ धोखा साबित” कहना जल्दबाजी होगी। लेकिन यदि अलग-अलग आधिकारिक और व्यावसायिक रिकॉर्ड में ऐसी विसंगति थी, तो उपभोक्ता को गुमराह किए जाने की आशंका की जांच जरूर होनी चाहिए।
फिर 29 अप्रैल 2028 तक State License कैसे चलता रहा?
यही इस पूरे मामले का सबसे बड़ा प्रशासनिक सवाल है।
कोर्ट के आदेश में दर्ज लाइसेंस की वैधता 29 अप्रैल 2028 तक है।
दूसरी तरफ NIDHI के सरकारी रिकॉर्ड में होटल 5-Star with Alcohol के रूप में classified है।
तो सवाल यह है कि—
क्या State FSSAI License के लिए आवेदन करते समय होटल की Five Star classification सामने थी?
अगर थी, तो State License किस आधार पर जारी हुआ?
लाइसेंस के नवीनीकरण के समय होटल की Star Classification और FSSAI License category का मिलान किस स्तर पर किया गया?
और सबसे अहम—
अगर यह विसंगति इतनी स्पष्ट थी कि खाद्य विभाग ने खुद हाईकोर्ट में इसे Central License की कमी बताया, तो इससे पहले इसकी जांच क्यों नहीं हुई?
गलती होटल की या सिस्टम की? जवाब दोनों से मांगा जाना चाहिए
यहां जिम्मेदारी का सवाल भी दो स्तरों पर है।
अगर होटल की आधिकारिक classification Five Star थी और उसने इसके बावजूद State License के लिए आवेदन किया, तो गलत श्रेणी का लाइसेंस लेने की जिम्मेदारी होटल प्रबंधन पर बनती है।
लेकिन इसके साथ यह सवाल भी खत्म नहीं हो जाता कि State License जारी और नवीनीकृत करने वाली प्रक्रिया में इस विसंगति की जांच क्यों नहीं हुई।
यानी मामला सिर्फ यह नहीं है कि होटल ने कौन-सा लाइसेंस लिया। सवाल यह भी है कि लाइसेंस जारी करने वाली व्यवस्था ने किस आधार पर उसे वैध माना।
इसीलिए इस पूरे मामले में आवेदन पत्र, लाइसेंस की मूल फाइल, नवीनीकरण रिकॉर्ड और होटल की Star Classification से जुड़े दस्तावेजों की जांच महत्वपूर्ण हो जाती है।
24 कमियां अलग मुद्दा, लाइसेंस की श्रेणी अलग
20 अगस्त को खाद्य विभाग की टीम ने होटल में निरीक्षण किया और कुल 24 कमियां दर्ज कीं। विभाग की ओर से कोर्ट में बिना मैन्युफैक्चरिंग डेट, एक्सपायरी डेट या बैच नंबर वाले पैक्ड खाद्य पदार्थ, एक्सपायर्ड सामग्री, फंगस लगी मूंगफली, कीड़े वाले चने और कॉकरोच-चूहे मिलने जैसी बातें भी बताई गईं।
लेकिन हाईकोर्ट का तत्काल सवाल इन कमियों के अस्तित्व से ज्यादा लाइसेंस सस्पेंड करने की प्रक्रिया को लेकर था।
अदालत ने कहा कि ऐसी कमियों पर सीधे लाइसेंस सस्पेंड करने के बजाय Improvement Notice देकर सुधार का अवसर दिया जाना चाहिए था। साथ ही suspension order में यह पर्याप्त कारण नहीं बताया गया कि तत्काल कार्रवाई public health के हित में क्यों अनिवार्य थी।
इसका मतलब साफ है—कोर्ट ने होटल को खाद्य सुरक्षा के मामले में क्लीन चिट नहीं दी है।
अब जांच का दायरा सिर्फ किचन तक नहीं होना चाहिए
सयाजी मामले में अब जांच का सवाल सिर्फ यह नहीं रह गया है कि 20 अगस्त की रात होटल की किचन में क्या मिला था।
एक समानांतर सवाल यह भी है कि—
होटल की Five Star classification कब और किस आधार पर दर्ज हुई?
FSSAI का State License किस आवेदन के आधार पर लिया गया?
आवेदन में होटल ने अपनी Star Classification क्या बताई?
State License जारी करते समय संबंधित अधिकारी ने होटल की category का सत्यापन किया या नहीं?
29 अप्रैल 2028 तक वैध State License के नवीनीकरण के दौरान इस विसंगति पर किसी अधिकारी ने सवाल उठाया या नहीं?
यदि Central License अनिवार्य था, तो State License इतने लंबे समय तक कैसे चलता रहा?
छापे के बाद वेबसाइट पर 5-Star का उल्लेख हटाया गया तो यह बदलाव कब, क्यों और किसके निर्देश पर किया गया?
क्या ग्राहकों और ट्रैवल प्लेटफॉर्म पर होटल की Star Classification को लेकर कोई भ्रामक स्थिति बनी रही?
इन सवालों के जवाब सामने आना जरूरी है।
हाईकोर्ट की रोक का मतलब क्या?
22 अगस्त को हाईकोर्ट ने 21 अगस्त के suspension order के प्रभाव और संचालन पर रोक लगा दी और होटल की किचन तत्काल खोलने के निर्देश दिए।
लेकिन यह आदेश सयाजी होटल को खाद्य सुरक्षा संबंधी 24 कमियों से क्लीन चिट नहीं देता।
अदालत ने प्रथम दृष्टया यह जरूर कहा कि suspension order में तत्काल कार्रवाई की अनिवार्यता के पर्याप्त कारण नहीं बताए गए और Section 32 की प्रक्रिया के उल्लंघन की संभावना दिखाई देती है।
Expose Live Take
सयाजी होटल प्रकरण में खाद्य विभाग की कार्रवाई पर हाईकोर्ट की रोक के बाद अब बहस सिर्फ “होटल में चूहे-कॉकरोच मिले या नहीं” तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।
बड़ा सवाल यह है कि सरकारी रिकॉर्ड में Five Star classified होटल के पास State FSSAI License कैसे रहा?
अगर होटल ने गलत श्रेणी का लाइसेंस लिया, तो उसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए। लेकिन अगर लाइसेंस जारी करने और नवीनीकरण की प्रक्रिया में भी यह विसंगति वर्षों तक पकड़ में नहीं आई, तो जवाबदेही केवल होटल तक सीमित नहीं रह सकती।
और अगर कार्रवाई के बाद होटल की वेबसाइट से Five Star का उल्लेख हटा दिया गया, जबकि सरकारी NIDHI रिकॉर्ड में classification अब भी “5-Star with Alcohol” है और ट्रैवल प्लेटफॉर्म भी उसे Five Star के रूप में दिखा रहे हैं, तो यह सवाल और गंभीर हो जाता है कि ग्राहकों को होटल की वास्तविक regulatory और classification स्थिति के बारे में कितनी पारदर्शी जानकारी दी गई और यह स्थिति कब से चली आ रही थी।
इस पूरे मामले की स्वतंत्र जांच जरूरी है—सिर्फ 20 अगस्त की किचन जांच नहीं, बल्कि होटल की Star Classification, FSSAI License category, आवेदन-नवीनीकरण प्रक्रिया और ग्राहकों के सामने किए गए classification claims की भी।
क्योंकि सवाल सिर्फ यह नहीं कि सयाजी की किचन में क्या मिला।
सवाल यह भी है कि सयाजी के खाद्य लाइसेंस की श्रेणी और उसकी Five Star पहचान के बीच यह विसंगति कब से थी, किसकी जानकारी में थी और इतने लंबे समय तक इसकी जांच क्यों नहीं हुई?
इस मामले में खाद्य अधिकारी मनीष स्वामी का कहना है कि होटल की Star Classification में 5-Star रेंटिंग मिलने के बाद Central License लेना होता है। जिसके चलते सयाजी होटल को अभी कुछ समय पहले ही 5-Star रेंटिंग मिली है। जिसके बाद Central License के लिए अप्लाई करना था ।
पर्यटन विभाग के रीजनल मैनेजर अजय श्री वास्तव का कहना हैकि पर्यटन विभाग की साइट पर 5-Star रेंटिंग हमारे रिजनल कार्यालय के द्वारा नहीं दी जाती है यह बोर्ड का काम है।