इंदौर में ‘माटी गणेश’ बना जन-आंदोलन, SGSITS में छात्रों ने बनाए इको-फ्रेंडली बप्पा

इंदौर : स्वच्छता के सिरमौर इंदौर में पर्यावरण प्रेमी देवेंद्र अत्रे की ‘माटी गणेश’ मुहिम एक सशक्त जन-आंदोलन बन चुकी है। जलस्रोतों को पीओपी और रासायनिक रंगों के प्रदूषण से बचाने के उद्देश्य से अत्रे अब तक लाखों बच्चों और वयस्कों को शुद्ध मिट्टी से गणेश प्रतिमाएं बनाने का नि:शुल्क प्रशिक्षण दे चुके हैं। इसी कड़ी में शहर के प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग कॉलेज एसजीएसआईटीएस में विद्यार्थियों के लिए एक विशेष निशुल्क वर्कशॉप आयोजित की गई। जिसमें बड़ी संख्या में छात्र छात्राओं ने सहभागिता की। कई बच्चों ने पहली बार गीली मिट्टी को हाथ लगाया और उन्हें बहुत सुखद अनुभूति हुई।

अत्रे कहते हैं कि मिट्टी से मूर्ति गढ़ते हुए आप ईश्वर से साक्षात्कार करने लगते हैं, आपके अंदर के सभी विकार मिट्टी में मिल जाते है और आपका मन निर्मल हो जाता है। संस्थान के निदेशक प्रो नीतेश पुरोहित ने बताया कि अत्रे प्रतिभागियों को चिकनी मिट्टी से प्रतिमा गढ़ने के साथ उसमें तुलसी या फूलों के बीज रोपित करना सिखाते हैं, जिससे विसर्जन के बाद बप्पा गमले में ही पौधे का रूप ले लेते हैं। रजिस्ट्रार दीपक शर्मा ने बताया कि अत्रे के इस अभियान की व्यापकता और उपयोगिता की सराहना प्रदेश के वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भी कर चुके हैं।

विजयवर्गीय ने स्वयं अत्रे से मिट्टी से प्रतिमा बनाने की कला सीखी थी और नागरिकों से इको-फ्रेंडली गणेशोत्सव अपनाने की अपील की थी। पर्यावरणविद एलेक्स कुट्टी ने कहा कि इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य युवा पीढ़ी को अपनी परंपराओं के साथ पर्यावरण संरक्षण से जोड़ना है, ताकि आस्था और प्रकृति दोनों का सम्मान बना रहे। इस कार्यक्रम में डीन छात्र कल्याण प्रो अंजना जैन, प्रो विवेक तिवारी, प्रो राकेश सागर, प्रो वैशाली नाइक सहित अन्य शिक्षक एवं कर्मचारियों ने सहभागिता की।