बिना गैस-बिजली के तैयार होता है असम का ‘मैजिक राइस’, जानें क्यों खास है ये चावल

चावल का नाम सुनते ही दिमाग में सबसे पहले उसे बनाने का लंबा प्रोसेस आता है. चावल बनाने के लिए सबसे पहले उसे भिगोना पड़ता है. फिर पानी उबालिए, चावल डालिए और कुछ देर इंतजार करने के बाद ही खाना तैयार होता है. लेकिन क्या आपने कभी ऐसे चावल के बारे में सुना है, जिसे पकाने के लिए न गैस जलानी पड़ती है, न कुकर की जरूरत होती है और न ही बिजली खर्च होती है? सुनने में ये किसी जादू से कम नहीं लगता, लेकिन असम में चावल की एक ऐसी खास किस्म मिलती है, जिसे ट्रेडिशनल तरीके से बिना पकाए भी खाने लायक बनाया जा सकता है.

इस चावल को तैयार करने के लिए बस इसे पानी में कुछ देर भिगोना होता है. पानी सोखने के बाद इसके दाने सॉफ्ट हो जाते हैं और इन्हें सीधे खाया जा सकता है. यही अनोखी खासियत इस चावल को नॉर्मल चावल से बिल्कुल अलग बनाती है. यही वजह है कि इसे 'मैजिक राइस' यानी 'जादुई चावल' के नाम से भी जाना जाता है. खास बात यह है कि यह कोई नई खोज नहीं, बल्कि असम में मिलने वाले चावलों की पुरानी और ट्रेडिशनल किस्म है, जिसे वहां लंबे समय से खाया जाता रहा है. अब सवाल ये है कि आखिर ऐसा क्या खास है इस चावल में, जो बिना उबाले ही पानी में भिगोने से तैयार हो जाता है? और इसे खाने का तरीका क्या है? आइए जानते हैं असम के इस अनोखे 'मैजिक राइस' की पूरी कहानी.

चावल पकाने की जरूरत ही नहीं
असम की इस खास किस्म को कोमल साउल या चोकुवा चावल के नाम से जाना जाता है. इसकी सबसे बड़ी खासियत इसे बनाने का तरीका है. इसे बनाने के लिए सिर्फ 'सोखो और खाओ' वाला तरीका अपनाने होता है. यानी नॉर्मल चावल की तरह इसे उबालने की जरूरत नहीं पड़ती. पानी में भिगोने के बाद इसके दाने सॉफ्ट होकर खाने लायक हो जाते हैं. यही वजह है कि इसे 'मैजिक राइस' यानी जादुई चावल भी कहा जाता है.

ठंडे पानी में भी हो जाता है तैयार
इस चावल की दूसरी सबसे बड़ी खासियत ये है कि इसे तैयार करने के लिए उबलते पानी की जरूरत नहीं होती है. इसे तैयार करने के लिए ठंडे या हल्के गुनगुने पानी में भिगोया जाता है. कुछ किस्मों को ठंडे पानी में करीब 40-45 मिनट तक रखने से दाने सॉफ्ट हो जाते हैं, जबकि गुनगुने पानी में ये समय और कम हो सकता है. इसके बाद पानी निकालकर इसे सीधे खाया जा सकता है. यानी इसे पकाने के लिए न चूल्हे की जरूरत पड़ी, न बर्तन में उबालने का झंझट करना पड़ा और न ही लंबे समय तक इंतजार.

आखिर बिना पकाए सॉफ्ट कैसे हो जाता है?
अब सवाल उठता है कि आखिर चावल बिना पकाए तैयार कैसे हो जाता है? ऐसा इस चावल में पाए जाने वाले खास तरह के स्टार्च की वजह से होता है. चोकुवा चावल में एमाइलोज की मात्रा कम होती है. इसी वजह से पानी के कॉन्टैक्ट में आने पर इसके दाने जल्दी सॉफ्ट हो जाते हैं. यही गुण इसे बाकी नॉर्मल चावलों से अलग बनाता है.

असम में लंबे समय से खाया जा रहा है
ये कोई नया चावल नहीं है. असम में इसकी परंपरा काफी पुरानी है. यहां इसे अलग-अलग तरीकों से खाया जाता रहा है. इसे दही, दूध, गुड़, चीनी, केला, अचार या नमक-तेल जैसी चीजों के साथ भी खाया जाता है. कई जगहों पर इससे नाश्ता भी तैयार किया जाता है. ये दशकों से असम की खानपान की परंपरा हिस्सा रहा है.

ट्रैवल करने वालों के लिए भी काम का
ये चावल ट्रैवलर्स के लिए भी बहुत काम का साबित हो सकता है. सोचिए ऐसी जगह जहां गैस या बिजली की सुविधा न हो और फिर भी चावल खाना हो. ऐसे में ये चावल काफी काम आ सकता है. इसकी आसान तैयारी की वजह से इसे ट्रैवलर्स, पर्वतारोहियों और ऐसे लोगों के लिए बढ़िया आरामदायक भोजन माना गया है जिन्हें बिना खाना पकाने के लिए ज्यादा साधन नहीं मिलते हैं. इस चावल को सैनिक भी इस्तेमाल करते हैं.

स्वाद में भी है खास
पानी में भिगोने के बाद चावल सॉफ्ट और फूला हुआ हो जाता है. इसका स्वाद नॉर्मल चावल से थोड़ा अलग और हल्का मीठा बताया जाता है. इसी कारण इसे गुड़, दूध या दही के साथ खाने का चलन भी है.

तो अगली बार जब आपको लगे कि चावल बनाने में काफी समय और मेहनत लगती है, तो असम के इस ट्रेडिशनल 'मैजिक राइस' के बारे में जरूर जानिए. सदियों पुरानी ये देसी तकनीक आज के समय में भी उतनी ही दिलचस्प लगती है, क्योंकि यहां चावल पकाने की नहीं, बस उसे सही तरीके से भिगोने की जरूरत पड़ती है.