आजकल नेचुरल चीजों का क्रेज लोगों के सिर चढ़कर बोल रहा है. फिर चाहे वो साबुन हो या हेयर कलर, लोग नेचुरल उपाय ही अपना रहे हैं. ज्यादातर लोग बाजार में मिलने वाली केमिकल युक्त चीजों से दूरी बनाकर नेचुरल और इको-फ्रेंडली चीजों की तरफ लौट रहे हैं. ऐसे में पुरानी देसी चीजें एक बार फिर चर्चा में हैं. इन्हीं देसी चीजों में रीठा भी शामिल है. पुराने जमाने में रीठा को बाल धोने से लेकर कपड़े साफ करने तक के लिए इस्तेमाल किया जाता था.
ऐसे में लोग आजकल बाल धोने के लिए बाजार से रीठा खरीदकर ला रहे हैं. क्या आप भी उन्हीं में शामिल हैं? अगर हां, तो अब आपको ऐसा करने की जरूरत नहीं पड़ेगी. दरअसल, रीठा को आप अपने घर पर आसानी से उगा सकते हैं. जी हां, रीठा का पौधा होता है, जो छोटे से गमले में भी बहुत ही आसानी से उग जाता है. इसके फल में मौजूद नेचुरल सैपोनिन पानी के संपर्क में आने पर झाग बनाते हैं, जिसकी वजह से ये नेचुरल क्लीनजर की तरह काम करता है.
रीठा आखिर इतना खास क्यों है?
रीठे को आमतौर पर सोपनट या सोपबेरी भी कहा जाता है. इसके फल का बाहरी छिलका सैपोनिन से भरपूर होता है. यही नेचुरल तत्व पानी में मिलकर साबुन जैसा झाग बनाता है और गंदगी व तेल को हटाने में मदद करता है. इसलिए पुराने समय में रीठे का इस्तेमाल बाल, स्किन और कपड़े साफ करने के लिए किया जाता था.
घर में रीठे का पौधा कैसे लगाएं?
रीठे को बीज से उगाया जा सकता है. इसके लिए पका हुआ रीठा लेकर उसके बीज को निकालकर अच्छी तरह साफ करें. बीजों को कुछ दिन सुखाने के बाद मिट्टी में लगाया जा सकता है. असम फॉरेस्ट डिपार्टमेंट की नर्सरी गाइड के मुताबिक, रीठा के पके बीजों को 2-3 दिन धूप में सुखाकर बोया जा सकता है.
रीठा के बीजों को अंकुरित होने में करीब 30-40 दिन लग सकते हैं. अगर आप शुरुआत कर रहे हैं, तो पहले इसे छोटे गमले या कंटेनर में पौधे की तरह तैयार कर सकते हैं. लेकिन ध्यान रखें कि रीठा आगे चलकर बड़ा पेड़ बनता है, इसलिए लंबे समय के लिए इसे खुली जगह देना जरूरी है.
कैसी मिट्टी और कितनी धूप चाहिए?
रीठा के पौधे को ऐसी मिट्टी पसंद होती है जिसमें पानी जमा न हो. इसलिए इसे ऐसी मिट्टी में बोएं, जिसमें पानी जमा ना हो. पौधा लगाने के लिए नॉर्मल गार्डन वाली मिट्टी में ऑर्गेनिक खाद या कंपोस्ट मिलाया जा सकता है.
रीठे के पौधे को अच्छी ग्रोथ के लिए अच्छी धूप भी चाहिए. पौधा बड़ा होने के बाद ये कम देखभाल में भी बढ़ सकता है, लेकिन शुरुआती दिनों में पानी और मिट्टी की नमी पर ध्यान देना जरूरी है.
पानी देते समय सबसे बड़ी गलती न करें
रीठा के छोटे पौधे को जरूरत के हिसाब से पानी दें, लेकिन गमले या मिट्टी में पानी जमा न रहने दें. लगातार गीली मिट्टी जड़ों को नुकसान हो सकता है. खासकर बारिश के मौसम में ये ध्यान रखना ज्यादा जरूरी है कि एक्स्ट्रा पानी आसानी से बाहर निकल जाए.
रीठा के फल से बनाएं नेचुरल क्लीनर
जब पेड़ पर रीठा के फल आते हैं और पककर सूखने लगते हैं, तो इन्हें इकट्ठा करके सुखाया जा सकता है. इसके बाद रीठे के छिलके को पानी में भिगोकर या उबालकर उसका नेचुरल क्लीनिंग लिक्विड तैयार किया जाता है.
रीठे के छिलके में मौजूद सैपोनिन पानी में झाग पैदा करता है. यही वजह है कि रीठे का इस्तेमाल नेचुरल तरीके से शैंपू और क्लीनजर के तौर पर होता रहा है.
बाल धोने में भी होता है इस्तेमाल
रीठा लंबे समय से बालों की सफाई के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है. इसके छिलकों को पानी में भिगोकर या उबालकर छान लिया जाता है और उस पानी का इस्तेमाल बाल साफ करने के लिए किया जाता है. आज भी कई हर्बल हेयर-क्लीनिंग प्रोडक्ट्स में रीठा का इस्तेमाल किया जाता है. हालांकि, पहली बार इस्तेमाल करने से पहले थोड़ी मात्रा में टेस्ट करना बेहतर है और इसे आंखों से दूर रखना चाहिए.
कपड़े और घर की सफाई में भी आ सकता है काम
रीठा का इस्तेमाल सिर्फ बाल धोने के लिए ही नहीं किया जाता है. इसके नेतुरल सैपोनिन की वजह से इसे कपड़े और कुछ घरेलू चीजों की सफाई में भी इस्तेमाल किया जाता है. इसीलिए इसे एक तरह का पौधे से मिलने वाला नेचुरल क्लीनजर कहा जा सकता है. यानी घर में रीठे का पेड़ लगाने का मतलब सिर्फ एक पौधा लगाना नहीं, बल्कि ऐसा पेड़ तैयार करना है जिसके फल आगे चलकर कई तरह की सफाई में काम आ सकते हैं.