सीताराम ठाकुर, भोपाल
मध्यप्रदेश के किसानों को खेती-किसानी सहित पीने का पानी नगरीय निकायों को मुहैया कराने और उद्योगों पर जल संसाधन विभाग का ,सिंचाई ( irrigation ) 1665 करोड़ रुपए बकाया है। करीब दो दशक से तो चुनिंदा किसान ही सिंचाई कर जमा कर रहे हैं, जिसके कारण जल कर की राशि लगातार बढ़ती जा रही है। यह पैसा किसानों से वसूलने सरकार लगने वाले ब्याज को माफ करने की तैयारी में है, जिससे सरकारी खजाने में पैसा जमा हो सके।
35-40 लाख हेक्टेयर पानी irrigation के लिए उपयोग होता है
जल संसाधन विभाग प्रदेश में रबी और खरीफ सीजन में किसानों को सिंचाई ( irrigation ) के लिए करीब 35-40 लाख हेक्टेयर में पानी उपलब्ध कराती है। लेकिन उद्योग और नगरीय निकायों से जल कर की राशि समय-समय पर मिलती रहती है, लेकिन किसानों से लगातार सिंचाई पर लगने वाली जल कर की राशि नहीं मिल रही है। खासकर छोटे किसान तो जल कर का पैसा जमा कराते है, मगर बडेÞ किसान राजनीतिक हस्तक्षेप कर बच जाते हैं और इन पर सिंचाई का लाखों रुपए बकाया है। किसानों से सिंचाई का पैसा जमा कराने के लिए सरकार ने बीच का रास्ता निकालने प्रस्ताव शासन को भेजा है, जिसके तहत 31 मार्च 2024 तक का पैसा जमा करने वाले किसानों से ब्याज की राशि नहीं वसूली जाएगी। वर्तमान में ब्याज सहित किसानों और अन्य संस्थाओं पर सरकार का 1665 करोड़ 65 लाख रुपए की राशि बकाया है। सबसे ज्यादा 725 करोड़ रुपए की राशि गंगा कछार रीवा परिक्षेत्र के किसानों पर बकाया है।
किस क्षेत्र में कितना बकाया…
परिक्षेत्र | बकाया राशि (करोड़ रुपए) |
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चंबल बेतवा कछार | 137.31 |
गंगा कछार रीवा | 725.68 |
यमुना कछार ग्वालियर | 236.47 |
नर्मदा ताप्ती इंदौर | 44.23 |
जल संसाधन उज्जैन | 50.31 |
जल संसाधन नर्मदापुरम | 227.46 |
राजघाट नहर दतिया | 110.54 |
घसान केन सागर | 54.41 |
वैनगंगा कछार सिवनी | 75.92 |
एसएसपी इंदौर | 03.19 |
कुल राशि | 1664.65 |
इस साल रखा था 624 करोड़ का टारगेट
राज्य सरकार ने किसानों, नगरीय निकायों, पंचायती संस्थाओं तथा उद्योगों से वसूली के लिए वर्ष 2024-25 के लिए 624 करोड़ 65 लाख रुपए का टारगेट रखा था, जिसमें से 31 दिसंबर 2024 तक 407 करोड़ 58 लाख रुपए की ही वसूली हो सकी। यानि टारगेट का 75 प्रतिशत पैसा ही निकायों, उद्योग और पावर प्लांट से जमा हुआ है। किसानों ने जल कर की राशि जमा करना उचित नहीं माना, जिसके कारण उन पर जल टैक्स लगातार बढ़ता जा रहा है।
ब्याज माफ करने शासन को प्रस्ताव भेजा
किसानों पर बकाया जल कर पर लगने वाले ब्याज की राशि को माफ करने प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। करीब 70 फीसदी किसान सिंचाई कर की राशि जमा नहीं करते हैं। लगने वाले ब्याज के कारण भी कई किसान पैसा जमा नहीं करते। इसलिए ब्याज की राशि माफ करने का प्रस्ताव है।
–विनोद देवड़ा, प्रमुख अभियंता, जल संसाधन विभाग