देश के उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ का अचानक इस्तीफा देना न सिर्फ चौंकाने वाला है, बल्कि काफी हद तक अकल्पनीय भी प्रतीत होता है। आज की राजनीति और संस्थागत स्थिरता के दौर में इस तरह की घटनाएं विरले ही देखने को मिलती हैं। उनके इस निर्णय ने राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है।
आखिरी मुलाकात और बातचीत ने नहीं दिए संकेत
शाम लगभग 5 बजे तक कई सांसदों के साथ मैं स्वयं श्री धनखड़ जी के साथ था। बातचीत सामान्य थी और किसी भी तरह के असंतोष या अस्वस्थता का आभास नहीं हुआ। इसके बाद शाम 7:30 बजे मेरी उनसे फोन पर एक निजी बातचीत भी हुई, जिसमें भी उन्होंने अपने इस्तीफे की कोई झलक नहीं दी। ऐसे में उनका यह कदम बेहद अप्रत्याशित कहा जा सकता है।
स्वास्थ्य कारणों का हवाला – पर क्या इतना ही कारण है?
श्री धनखड़ ने अपने इस्तीफे के पीछे स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया है। यह बात पूरी तरह से स्वीकार्य है कि कोई भी व्यक्ति अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता दे। लेकिन उनके अचानक इस निर्णय के पीछे शायद कुछ और भी है जो अभी सामने नहीं आया है। खासकर जब उन्होंने सरकार और विपक्ष दोनों के प्रति स्पष्ट और मुखर रुख अपनाया हो, तो सवाल उठते हैं।
कल होने वाली बैठक और संभावित घोषणा बनी रहस्य
सूत्रों के अनुसार, कल दोपहर 1 बजे उन्होंने बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई थी। इस बैठक में वे न्यायपालिका से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण घोषणाएं करने वाले थे। उनके इस्तीफे के साथ यह बैठक और संभावित निर्णय भी अब अधर में लटक गए हैं, जिससे कई कयास लगाए जा रहे हैं।
प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप की अपील
देश के व्यापक हित और लोकतांत्रिक व्यवस्था की निरंतरता को देखते हुए, हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील करते हैं कि वे श्री धनखड़ से संवाद करें और उन्हें अपने निर्णय पर पुनर्विचार करने के लिए प्रेरित करें। उनका अनुभव और दृष्टिकोण इस समय देश के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
कृषि समुदाय के लिए भी यह है महत्वपूर्ण क्षण
श्री धनखड़ किसान समुदाय की आवाज़ रहे हैं। उनके इस्तीफे से देश के करोड़ों कृषकों में निराशा की भावना है। वे एक ऐसे प्रतिनिधि रहे हैं, जिन्होंने हमेशा कृषकों की समस्याओं को सर्वोच्च मंच पर उठाया। उनका बने रहना इस वर्ग के लिए मनोबल बढ़ाने वाला होता।
हम कामना करते हैं अच्छे स्वास्थ्य और दृढ़ निर्णय की
इस मौके पर हम सभी की ओर से श्री जगदीप धनखड़ जी के अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना करते हैं। साथ ही आग्रह करते हैं कि वे अपने फैसले पर एक बार फिर से विचार करें, क्योंकि इस निर्णय का असर केवल संवैधानिक पद तक सीमित नहीं है – यह देश की दिशा को भी प्रभावित कर सकता है।