सितंबर का महीना न केवल ऋतु परिवर्तन का समय होता है बल्कि धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। वर्ष 2025 का सितंबर महीना विशेष रूप से शुभ और पावन रहेगा क्योंकि इसमें अनेक बड़े पर्व, व्रत और त्योहार पड़ रहे हैं। इस दौरान हर दिन भक्ति और आस्था से परिपूर्ण वातावरण रहेगा। गणेशोत्सव से लेकर नवरात्रि और पितृपक्ष से लेकर सूर्य-चंद्र ग्रहण तक, यह महीना धार्मिक दृष्टि से काफी खास साबित होने वाला है।
भक्ति और व्रत का आरंभ गणेशोत्सव से
सितंबर 2025 की शुरुआत गणेश उत्सव से होगी। भगवान गणेश के भक्त इस समय बड़े धूमधाम से बप्पा की पूजा-अर्चना करेंगे। उत्सव की शुरुआत 31 अगस्त को होगी और 6 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के साथ गणेश विसर्जन का आयोजन किया जाएगा। भक्तजन गणपति बप्पा को विदाई देंगे और अनंत भगवान का पूजन कर सुख-समृद्धि की कामना करेंगे। इस दौरान 3 सितंबर को परिवर्तिनी एकादशी और 4 सितंबर को वामन जयंती मनाई जाएगी। इसके साथ ही 5 सितंबर को ओणम और प्रदोष व्रत भी पड़ रहे हैं।
पितृपक्ष और श्राद्ध का महत्व
गणेशोत्सव के बाद सितंबर का एक और महत्वपूर्ण पर्व है पितृपक्ष, जो 8 सितंबर से प्रारंभ होकर 21 सितंबर तक चलेगा। इस दौरान 15 दिनों तक लोग अपने पितरों का तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध करेंगे। हिंदू धर्म में माना जाता है कि पितृपक्ष के दौरान पितरों को याद करके उनके लिए अर्पित किए गए दान और तर्पण से परिवार पर आशीर्वाद की वर्षा होती है। पितृपक्ष का समापन सर्वपितृ अमावस्या (21 सितंबर) को होगा।
नवरात्रि और शक्ति उपासना
पितृपक्ष समाप्त होने के बाद आस्था का सबसे बड़ा पर्व शारदीय नवरात्रि प्रारंभ होगा। यह पर्व 22 सितंबर से शुरू होकर 30 सितंबर तक चलेगा। नवरात्रि के दौरान भक्त नौ दिनों तक माता दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना करेंगे। इस बार दुर्गा अष्टमी 30 सितंबर को पड़ रही है। नवरात्रि का यह समय न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा और साधना के लिए भी विशेष माना जाता है।
ग्रहणों का खास महत्व
सितंबर 2025 के महीने को और खास बनाने वाला एक बड़ा कारण है दो ग्रहण। इस माह साल का दूसरा और अंतिम चंद्र ग्रहण 7 सितंबर (पूर्णिमा) को लगेगा। इसके बाद 21 सितंबर को सूर्य ग्रहण होगा, जिसे वर्ष का अंतिम सूर्य ग्रहण माना जाएगा। ग्रहण का धार्मिक दृष्टि से भी खास महत्व होता है और इन अवसरों पर विशेष पूजा-पाठ, स्नान और दान का विधान है।
अन्य प्रमुख पर्व और तिथियां
इस माह में कई छोटे-बड़े व्रत और त्योहार भी मनाए जाएंगे। 14 सितंबर को महालक्ष्मी व्रत, जीवित्पुत्रिका व्रत और कालाष्टमी एक ही दिन पड़ रहे हैं। 17 सितंबर को विश्वकर्मा पूजा और इंदिरा एकादशी होगी। वहीं 19 सितंबर को एक और शुक्र प्रदोष व्रत पड़ रहा है। इसके अलावा 22 सितंबर को महाराजा अग्रसेन जयंती मनाई जाएगी। महीने का समापन शक्ति साधना और नवरात्रि की धूमधाम के बीच होगा।