इंदौर: रिटायर्ड IAS एसबी सिंह के बिल्डिंग निर्माण से धंसी सड़क, महापौर के निर्देशों के बावजूद निगम ने सिर्फ नोटिस दिया

Indore News : इंदौर शहर में सड़कों की खुदाई और निर्माण कार्यों से होने वाले नुकसान पर सख्त कार्रवाई के दावों के बीच एक बड़ा मामला सामने आया है। यहां एक सेवानिवृत्त IAS और भोपाल के पूर्व संभागायुक्त एसबी सिंह की बहुमंजिला इमारत के निर्माण कार्य के दौरान सड़क का एक बड़ा हिस्सा धंस गया। इस घटना ने इंदौर नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि निगम ने अब तक सिर्फ एक नोटिस जारी करने के अलावा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है।

यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कुछ ही समय पहले महापौर पुष्यमित्र भार्गव और निगमायुक्त दिलीप यादव ने एक बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए थे कि सड़क को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। लेकिन एक वरिष्ठ पूर्व अधिकारी से जुड़े मामले में निगम का नरम रुख दोहरे मापदंड की ओर इशारा कर रहा है।

प्रशासन के दावों और हकीकत में अंतर

इंदौर नगर निगम के अधिकारी अक्सर आम नागरिकों के छोटे-मोटे निर्माण कार्यों पर भी पैनी नजर रखते हैं और नियमों का उल्लंघन होने पर तत्काल कार्रवाई करते हैं। हालांकि, जब बात प्रभावशाली और बड़े लोगों की आती है, तो यही नियम और सख्ती अक्सर नदारद दिखती है। रिटायर्ड IAS एसबी सिंह के मामले में भी यही देखने को मिल रहा है। निर्माण स्थल पर बेसमेंट की खुदाई के चलते सड़क का हिस्सा कमजोर होकर धंस गया, जिससे यातायात प्रभावित हुआ और स्थानीय निवासियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

नोटिस देकर निगम ने साधी चुप्पी

सड़क धंसने की घटना के बाद नगर निगम के संबंधित अधिकारियों ने मौके का मुआयना तो किया, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल एक नोटिस जारी कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। सूत्रों के अनुसार, निगम पर राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव के चलते सख्त कदम उठाने से बचा जा रहा है। महापौर द्वारा सार्वजनिक रूप से की गई घोषणाओं के बावजूद, इस मामले में निगम की चुप्पी और निष्क्रियता शहर में चर्चा का विषय बनी हुई है।

लोगों का कहना है कि अगर यही घटना किसी आम नागरिक के निर्माण कार्य के दौरान हुई होती, तो अब तक निगम ने न केवल काम रुकवा दिया होता, बल्कि भारी जुर्माना भी लगा दिया होता। यह घटना प्रशासन की उस छवि को धूमिल करती है, जिसमें सभी के लिए एक समान कानून और नियम होने का दावा किया जाता है। अब देखना यह होगा कि क्या निगम अपने ही महापौर के निर्देशों का पालन करते हुए इस मामले में कोई सख्त कदम उठाता है या इसे भी ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।