उज्जैन में सिंहस्थ 2028 के लिए बनाई गई विवादास्पद लैंड पूलिंग एक्ट योजना को मध्य प्रदेश सरकार ने आखिरकार रद्द कर दिया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस योजना को तुरंत प्रभाव से ड्रॉप करने का ऐलान किया, जिससे लंबे समय से विरोध में खड़े किसानों और स्थानीय निवासियों ने राहत की सांस ली। यह कदम सरकार की रणनीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है, खासकर तब जब किसान लगातार इस योजना के खिलाफ आवाज बुलंद कर रहे थे।

क्या थी सिंहस्थ लैंड पूलिंग योजना?
सिंहस्थ महाकुंभ 2028 के लिए अस्थायी शहर और व्यापक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने हेतु बड़ी मात्रा में भूमि की जरूरत थी। इसी लक्ष्य से सरकार ने लैंड पूलिंग मॉडल अपनाने का प्रस्ताव रखा था।
इस योजना में—
- उज्जैन और आसपास के गांवों की कृषि भूमि को सरकार एक “पूल” में शामिल करती
- फिर उस क्षेत्र में सड़क, बिजली, सीवेज और अन्य सुविधाओं का विकास किया जाता
- विकसित भूमि का एक हिस्सा किसानों को वापस देने का वादा था
- बाकी भूमि सिंहस्थ आयोजन और उससे जुड़ी सुविधाओं में उपयोग की जानी थी
- इस मॉडल का उद्देश्य भूमि अधिग्रहण की जटिल प्रक्रिया को सरल बनाना और विकास कार्यों को गति देना था।
