500 करोड़ जमीन विवाद, क्रिश्चियन कॉलेज को हाईकोर्ट का बड़ा झटका

इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा द्वारा अक्टूबर में जारी किए गए आदेश के बाद क्रिश्चियन कॉलेज की विवादित भूमि का मुद्दा एक बार फिर सुर्खियों में है। यह आदेश कॉलेज की लगभग 500 करोड़ रुपये मूल्य की जमीन से जुड़े कथित अनियमित निर्माण और उपयोग को रोकने के उद्देश्य से जारी किया गया था। इसके खिलाफ कॉलेज प्रबंधन ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन अदालत ने कोई राहत देने से इनकार कर दिया।

किशोर कुमार का कॉलेज, पर जमीन पर ‘खेल’ के आरोप

क्रिश्चियन कॉलेज, जो कभी मशहूर गायक किशोर कुमार और कई प्रतिष्ठित हस्तियों की शिक्षा का केंद्र रहा है, अब ज़मीन विवाद में उलझा है। प्रबंधन की ओर से कॉलेज प्रिंसिपल डॉ. अमित डेविड लंबे समय से 68.303 हेक्टेयर में से 1.702 हेक्टेयर भूमि पर नक्शा पास कराने का प्रयास कर रहे थे। यह नक्शा शैक्षणिक उपयोग के बजाय व्यावसायिक ऑफिस और दुकानों के निर्माण के लिए था, जो विवाद की जड़ माना जा रहा है।

हाईकोर्ट ने राहत देने से किया इंकार

कलेक्टर द्वारा जारी नोटिस को चुनौती देते हुए कॉलेज ने दावा किया कि जमीन निजी स्वामित्व की है और कलेक्टर का आदेश पक्षपातपूर्ण है। वहीं शासन पक्ष ने तर्क दिया कि मामला अभी कलेक्टर कोर्ट में विचाराधीन है और कॉलेज को वहां जवाब देने का पूरा मौका दिया गया है।

दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता कलेक्टर कोर्ट में अपना पक्ष रख सकते हैं, इसलिए याचिका पर बिना मेरिट के फैसला देना उचित नहीं है। नतीजतन, याचिका निरस्त कर दी गई।

कलेक्टर की जांच में क्या सामने आया?

यह मामला कलेक्टोरेट के विभिन्न कार्यालयों में वर्षों से लंबित था। प्रिंसिपल द्वारा टीएंडसीपी में नक्शा पास कराने की फाइल लगने के बाद कलेक्टर ने एसडीएम जूनी और तहसीलदार की संयुक्त टीम से जमीन का सत्यापन करवाया।

जांच रिपोर्ट में एक बड़ा खुलासा हुआ—

दस्तावेजों में दर्ज है कि यह भूमि महाराजा होलकर ने दिसंबर 1887 में कुछ शर्तों के साथ दान में दी थी। शर्तों के मुताबिक:

  • भूमि का उपयोग केवल विद्यालय और महिला अस्पताल के लिए ही होना था।
  • संस्था का कार्य बंद होने पर जमीन वापस शासक को लौटाने का प्रावधान था।
  • जांच में पाया गया कि अब कॉलेज लगभग बंद होने की स्थिति में है और परिसर में कोई महिला अस्पताल भी संचालित नहीं हो रहा है। इससे दान की मूल शर्तें पूरी तरह टूट चुकी हैं।

टीएंडसीपी को मंजूरी रोकने का आदेश

कलेक्टर वर्मा ने जांच रिपोर्ट के आधार पर टीएंडसीपी को स्पष्ट निर्देश दिए कि विवादित जमीन पर किसी भी प्रकार की व्यावसायिक निर्माण मंजूरी न दी जाए। इसके साथ ही कॉलेज प्रबंधन को नोटिस जारी किया गया है और उनसे जवाब मांगा गया है। पूरा मामला वर्तमान में कलेक्टर कोर्ट में चल रहा है।

सरकार जमीन वापस लेने की तैयारी में

कलेक्टर के पत्र में यह भी लिखा गया है कि दान की शर्तें खत्म हो चुकी हैं, इसलिए यह भूमि अब मप्र शासन की संपत्ति मानी जाएगी। ऐसे में सरकार जमीन वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर चुकी है। इसके बाद इस जमीन पर व्यावसायिक गतिविधि या नया निर्माण पूरी तरह रोक दिया गया है।