Mumbai News: भारत और रूस के बीच सदियों पुराने कूटनीतिक संबंधों को अब एक नई वित्तीय ऊंचाई देने की तैयारी पूरी हो चुकी है। मुंबई स्थित नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) में आयोजित होने वाला तीसरा रूस-भारत फोरम “वोल्गा से गंगा तक: सभ्यताओं का संवाद और पूंजी बाजारों का एकीकरण” दोनों देशों के आर्थिक इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होने जा रहा है।
यह रणनीतिक आयोजन केवल एक औपचारिक बैठक नहीं है, बल्कि यह भारतीय कंपनियों और वित्तीय संस्थानों के लिए रूस के सबसे बड़े पूंजी धारकों और नीति निर्माताओं के साथ सीधे संवाद का एक विशेष द्वार खोलता है।
प्रमुख हस्तियों का जमावड़ा: नीति और निवेश का संगम
इस फोरम की गंभीरता का अंदाजा इसमें शामिल होने वाले नामों से लगाया जा सकता है। भारत की ओर से RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा और NSE के प्रबंध निदेशक आशीषकुमार चौहान जैसे दिग्गज वित्तीय तंत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। वहीं, रूस की ओर से उप वित्त मंत्री इवान चेबेस्कोव, बैंक ऑफ रूस के प्रथम उप गवर्नर व्लादिमीर चिस्त्युखिन और प्रसिद्ध अर्थशास्त्री सर्गेई ग्लाज़येव की उपस्थिति यह दर्शाती है कि रूस, भारत के साथ एक ठोस और दीर्घकालिक वित्तीय एकीकरण के लिए पूरी तरह तैयार है।
रूसी पूंजी की भारतीय बाजार में तलाश
फोरम का मुख्य एजेंडा भारतीय अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में रूसी निवेश को आकर्षित करने के लिए एक व्यावहारिक ढांचा तैयार करना है। वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में, रूस अपनी विशाल पूंजी के लिए सुरक्षित और बढ़ते हुए बाजारों की तलाश में है, और भारत इस सूची में सबसे ऊपर है।
फोरम की मुख्य विशेषताएं:
निवेश परियोजनाओं की प्रस्तुति: पहली बार भारतीय निवेशकों के सामने रूस की प्रमुख औद्योगिक और तकनीकी परियोजनाओं का विवरण रखा जाएगा।
सीधा संवाद: भारतीय स्टार्टअप्स और स्थापित औद्योगिक घराने, रूस के ‘गैस मशीन्स ग्रुप’ और ‘BIREX’ जैसी बड़ी निवेश कंपनियों के मालिकों से सीधे मिल सकेंगे।
कानूनी और वित्तीय परामर्श: सीमा-पार निवेश (Cross-border investment) में आने वाली जटिलताओं को दूर करने के लिए दोनों देशों के विशेषज्ञ मौके पर ही समाधान साझा करेंगे।
एक नया रणनीतिक गठबंधन
फोरम के चेयरमैन एडुआर्ड ग्रेकोव ने आयोजन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा, “ ‘वोल्गा से गंगा तक’ फोरम सिर्फ चर्चा का मंच नहीं है; यह भारतीय और रूसी पूंजी बाजारों को सीधे जोड़ने वाली एक पाइपलाइन है। मुंबई अब इस वैश्विक आर्थिक बदलाव का केंद्र बन रहा है।”
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फोरम विशेष रूप से ऊर्जा, रक्षा, बुनियादी ढांचे और उच्च तकनीक (High-Tech) के क्षेत्रों में संयुक्त उद्यमों (Joint Ventures) के लिए जमीन तैयार करेगा। इससे न केवल भारत में विदेशी मुद्रा का प्रवाह बढ़ेगा, बल्कि तकनीकी हस्तांतरण में भी मदद मिलेगी।
पंजीकरण और संपर्क विवरण
जो व्यवसायी या निवेशक इस ऐतिहासिक गठबंधन का हिस्सा बनना चाहते हैं, वे आधिकारिक वेबसाइट https://rusinfor.com/ पर जाकर पंजीकरण कर सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए सीधे संपर्क भी किया जा सकता है:
निष्कर्ष: आज जब वैश्विक बाजार अस्थिरता के दौर से गुजर रहे हैं, भारत और रूस का यह ‘पूंजी बाजार एकीकरण’ न केवल द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देगा, बल्कि एक नई बहुध्रुवीय आर्थिक व्यवस्था की नींव भी रखेगा।