नववर्ष पर महाकाल दरबार में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब, 45 मिनट में दर्शन, वीआईपी व्यवस्था स्थगित

नववर्ष के स्वागत के साथ ही उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में आस्था का अद्भुत नज़ारा देखने को मिल रहा है। साल के अंतिम दिनों में बाबा महाकाल के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का ऐसा सैलाब उमड़ा कि पूरा उज्जैन शिवमय हो गया। मंदिर समिति के मुताबिक 25 से 31 दिसंबर के बीच 7 लाख से अधिक श्रद्धालु बाबा के दरबार में हाजिरी लगा चुके हैं। देशभर से आ रहे भक्तों के चलते उज्जैन की गलियों से लेकर मंदिर प्रांगण तक “जय श्री महाकाल” के जयकारे गूंज रहे हैं।

श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रशासन ने बाहर से आने वाले भक्तों के लिए शहर के अलग-अलग हिस्सों में पार्किंग की विशेष व्यवस्था की है। ताकि मंदिर क्षेत्र में अनावश्यक भीड़ और जाम की स्थिति न बने। इसके साथ ही हरसिद्धि मंदिर से लेकर चार धाम और बड़ा गणपति क्षेत्र में लड्डू प्रसाद काउंटर, 250 रुपये की शीघ्र दर्शन टिकट व्यवस्था, जूता-चप्पल स्टैंड जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। भीड़ ज्यादा होने पर श्रद्धालुओं को त्रिवेणी संग्रहालय और चार धाम क्षेत्र से प्रवेश दिया जा रहा है, जिससे व्यवस्था संतुलित बनी रहे।

भीड़ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि श्रद्धालुओं को करीब ढाई किलोमीटर पैदल चलने के बाद बाबा महाकाल के दर्शन हो पा रहे हैं। हालात को देखते हुए मंदिर समिति ने वीआईपी और वीवीआईपी दर्शन व्यवस्था पूरी तरह बंद कर दी है। इतना ही नहीं, श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए 5 जनवरी तक ऑनलाइन भस्म आरती बुकिंग भी स्थगित कर दी गई है। प्रशासन का दावा है कि इन दिनों उज्जैन में रोजाना डेढ़ से दो लाख श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।

श्रद्धालुओं की इस भारी आमद का असर शहर के ट्रैफिक पर भी साफ दिखाई दे रहा है। सामान्य दिनों में जहां उज्जैन में करीब 6 हजार चार पहिया वाहन प्रतिदिन आते हैं, वहीं इन दिनों यह संख्या 12 हजार तक पहुंच गई है। जाम की स्थिति से निपटने के लिए उज्जैन पुलिस ने इस बार हाईटेक क्राउड मैनेजमेंट का सहारा लिया है। पहली बार ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए गूगल मैप में तकनीकी बदलाव किए गए हैं।

पुलिस प्रशासन अब गूगल मैप के जरिए शहर के हैवी ट्रैफिक रूट्स पर नजर रख रहा है। जिन रास्तों पर भीड़ ज्यादा होती है, उन्हें अस्थायी रूप से ब्लॉक कर श्रद्धालुओं को वैकल्पिक मार्गों से मंदिर की ओर भेजा जा रहा है। इसके लिए गुरुग्राम की एक आईटी कंपनी, साइबर टीम और पुलिस के 10 सदस्य मिलकर लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं। गूगल के एल्गोरिदम में किए गए इन बदलावों से भीड़ को शहर के भीतर फैलने से पहले ही नियंत्रित किया जा रहा है।

महाकाल दर्शन के लिए उमड़ी भीड़ का असर होटल और धर्मशालाओं पर भी देखने को मिल रहा है। शहर के ज्यादातर होटल फुल हो चुके हैं, और जो थोड़े-बहुत कमरे बचे हैं, उनमें वेटिंग चल रही है। रेलवे स्टेशन पर भी यही माहौल है। ट्रेन से उज्जैन पहुंचते ही श्रद्धालु “जय श्री महाकाल” के जयकारों के साथ अवंतिका नगरी में प्रवेश कर रहे हैं, जिससे पूरा शहर भक्तिमय वातावरण में डूबा हुआ है।

नववर्ष 2026 को और भी खास बनाने के लिए महाकाल दरबार को भव्य रूप से सजाया जाएगा। डमरू फाउंडेशन द्वारा श्री महाकालेश्वर मंदिर और महाकाल लोक में विशेष सजावट की जा रही है। इस दौरान करीब 5 लाख रुद्राक्ष और 11 हजार डमरू से बाबा का दरबार सजाया जाएगा। यह अद्भुत सजावट श्रद्धालुओं के लिए आस्था और आकर्षण का केंद्र बनेगी।

कुल मिलाकर, नववर्ष के आगमन पर महाकाल नगरी में श्रद्धा, व्यवस्था और तकनीक का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। बाबा महाकाल के दर्शन के लिए उमड़ा यह जनसैलाब न सिर्फ आस्था की ताकत दिखा रहा है, बल्कि प्रशासन के लिए भी एक बड़ी परीक्षा बना हुआ है।