Bhopal News: मध्य प्रदेश में कर चोरी रोकने और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए स्टेट जीएसटी विभाग ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। अब किसी कारोबारी के यहाँ छापा (सर्च) पड़ेगा या नहीं, इसका फैसला कोई अधिकारी व्यक्तिगत पसंद-नापसंद के आधार पर नहीं कर सकेगा।
वाणिज्यिक कर विभाग के विशेष पोर्टल द्वारा ‘डेटा एनालिटिक्स’ और ‘रिस्क मैपिंग’ के जरिए रैंडम तरीके से रिटर्न की जांच की जाएगी और गड़बड़ी मिलने पर ही कार्यवाही होगी।
वाणिज्यिक कर आयुक्त अनय द्विवेदी द्वारा जारी नई गाइडलाइन के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2024-25 के रिटर्न की पड़ताल पूरी तरह डिजिटल होगी।
भ्रष्टाचार रोकने के लिए ‘डिजिटल दीवार’
नई व्यवस्था में ज्वाइंट कमिश्नर स्तर के अधिकारियों को पोर्टल के माध्यम से तीन विकल्पों पर काम करना होगा:
सर्च का प्रस्ताव: यदि पोर्टल पर गंभीर गड़बड़ी दिखती है, तो प्रस्ताव ऑनलाइन मुख्यालय भेजा जाएगा।
स्क्रूटनी: यदि मामला छोटा है, तो अधिकारी केवल जांच (स्क्रूटनी) करेंगे।
केस क्लोजर: यदि कोई विसंगति नहीं मिलती, तो केस को तत्काल बंद करना होगा।
जीएसटी व्यवस्था में 4 बड़े बदलाव
1. क्रॉस-डिवीजन जांच मॉडल: अब स्थानीय अधिकारियों का प्रभाव खत्म करने के लिए ‘क्रॉस-डिवीजन’ सिस्टम लागू किया गया है। भोपाल के किसी व्यापारी के रिटर्न की जांच इंदौर या अन्य संभाग का अधिकारी करेगा। यह पूरी प्रक्रिया रैंडम और ऑनलाइन आवंटित होगी।
2. फर्जी बिलिंग पर सर्जिकल स्ट्राइक: बोगस बिलिंग, सर्कुलर ट्रेडिंग और बिना व्यापार के इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) क्लेम करने वाली फर्मों को ‘सर्च और सीजर’ (धारा 67) के लिए तुरंत चिन्हित किया जाएगा। ऐसे मामलों की फाइल सीधे मुख्यालय भेजी जाएगी।
3. अधिकारियों के लिए ‘डेडलाइन’ और टारगेट: अधिकारियों की जवाबदेही तय करते हुए हर महीने कम से कम 45 केस और एंटी-इवेजन ब्यूरो के अधिकारियों के लिए 90 प्रकरणों का निपटारा अनिवार्य कर दिया गया है। लापरवाही बरतने पर अधिकारी सीधे जिम्मेदार होंगे।
4. अनावश्यक नोटिसों से राहत: अब अधिकारी छोटी या किसी एक तकनीकी गलती पर नोटिस नहीं भेज सकेंगे। नोटिस तभी जारी होगा जब GSTR-1, 3B, 2B और ई-वे बिल जैसे कम से कम दो या तीन डेटा स्रोतों में विसंगति (Mismatch) पाई जाएगी।
रिस्क मैपिंग और डेटा एनालिटिक्स का उपयोग
सीए एसोसिएशन की लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करते हुए विभाग अब ‘रिस्क मैपिंग’ का सहारा लेगा। इसमें सॉफ्टवेयर खुद ही उन संदिग्ध प्रोफाइल्स को अलग कर देगा जो टैक्स चोरी के पैटर्न में फिट बैठते हैं।
इससे ईमानदार व्यापारियों को ‘इंस्पेक्टर राज’ और अनावश्यक जांचों से मुक्ति मिलेगी, जबकि संगठित कर चोरी करने वालों पर नकेल कसी जा सकेगी। इस बदलाव से न केवल पारदर्शिता आएगी, बल्कि विभाग की कार्यक्षमता में भी सुधार होने की उम्मीद है।