भोपाल के भेल दशहरा मैदान में ओबीसी, एससी, एसटी, जयस, भीम आर्मी, अपाक्स और अजाक्स के संयुक्त संघर्ष मोर्चा द्वारा आयोजित महासम्मेलन में आरक्षित वर्ग का अभूतपूर्व जनसैलाब उमड़ पड़ा। मध्य प्रदेश के अलग-अलग जिलों से हजारों वाहन मैदान की ओर पहुंचे, जिससे पूरे क्षेत्र में यातायात व्यवस्था प्रभावित हो गई और जिला प्रशासन को स्थिति संभालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। मैदान नील और पीले रंग के झंडों से पट गया और “जय बिरसा, जय ज्योति, जय भीम” के नारों से आसमान गूंज उठा।
महासम्मेलन में वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि मध्य प्रदेश की कुल आबादी का करीब 88 प्रतिशत हिस्सा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक समाज से आता है, इसके बावजूद इन्हें उनके संवैधानिक अधिकार आज भी पूरी तरह नहीं मिल पा रहे हैं। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि आरक्षण, प्रतिनिधित्व और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों पर सरकार की नीतियां भेदभावपूर्ण हैं, जिससे समाज में असंतोष लगातार बढ़ रहा है।
सम्मेलन का प्रमुख मुद्दा अजाक्स के प्रांताध्यक्ष और आदिवासी वर्ग से आने वाले आईएएस अधिकारी श्री संतोष वर्मा पर प्रस्तावित कार्रवाई रहा। मंच से बार-बार मांग उठी कि उनके खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई को तत्काल शून्य किया जाए। वक्ताओं ने इसे आदिवासी समाज के खिलाफ साजिश करार देते हुए कहा कि एक ओर सरकार आदिवासी कल्याण की बात करती है और दूसरी ओर एक वरिष्ठ आदिवासी अधिकारी पर कार्रवाई करती है, जो दोहरी नीति का स्पष्ट उदाहरण है।
अजाक्स के प्रांतीय कार्यकारी अध्यक्ष इंजीनियर एस.एल. सूर्यवंशी ने प्रस्तावना भाषण में कहा कि अजाक्स ने हमेशा संवैधानिक मूल्यों, पदोन्नति में आरक्षण और सामाजिक न्याय के लिए संघर्ष किया है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय उदाहरण देते हुए कहा कि अमेरिका में संविधान में आरक्षण का स्पष्ट प्रावधान न होने के बावजूद न्यायालय के फैसलों से अश्वेत समाज को 50 प्रतिशत तक आरक्षण मिला, जबकि भारत में संविधान में प्रावधान होने के बाद भी आरक्षण को रोका जा रहा है, जो गंभीर अन्याय है।
जयस के राष्ट्रीय अध्यक्ष एडवोकेट लोकेश मुजाल्दा ने आदिवासी समाज के समग्र विकास के लिए संविधान की पांचवीं अनुसूची को प्रभावी रूप से लागू करने की मांग की। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज का सरकार और प्रशासन में प्रतिनिधित्व नगण्य है, जिसके कारण यह वर्ग लगातार उपेक्षा और अत्याचार का शिकार हो रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आदिवासी समाज के साथ हो रहे अन्याय को नहीं रोका गया तो आंदोलन और तेज होगा।
भीम आर्मी के राष्ट्रीय चीफ विनयरतन सिंह ने इस महासम्मेलन को भविष्य के बड़े आंदोलन की भूमिका बताया। उन्होंने कहा कि दलित समाज पर हो रहे अत्याचार अब बर्दाश्त से बाहर हैं और भीम आर्मी हर स्तर पर ऐसे अन्याय के खिलाफ खड़ी रहेगी। वहीं भीम आर्मी के नेताओं ने यह भी कहा कि सम्मान और अधिकार नहीं मिलने की स्थिति में समाज को कठोर निर्णय लेने पर मजबूर होना पड़ सकता है।
ओबीसी समाज के वक्ताओं ने पिछड़े वर्ग के आरक्षण का मुद्दा जोर-शोर से उठाया। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में पिछड़े वर्ग की आबादी 52 से 58 प्रतिशत तक है, लेकिन उन्हें पूरा आरक्षण नहीं दिया जा रहा। वक्ताओं ने सवाल उठाया कि जब सामान्य वर्ग को बिना किसी आंदोलन के 10 प्रतिशत आरक्षण मिल सकता है, तो पिछड़े वर्ग को उसका हक क्यों नहीं दिया जा रहा, जबकि प्रदेश का नेतृत्व स्वयं पिछड़े वर्ग से आता है।
सम्मेलन में अनुसूचित जाति के वाल्मिकी, सुदर्शन जैसे उपेक्षित समाजों की स्थिति पर भी चिंता जताई गई। वक्ताओं ने कहा कि सफाई जैसे महत्वपूर्ण कार्य करने वाले समाज को आज भी अस्पृश्य माना जाता है, जो सामाजिक सोच पर सवाल खड़ा करता है। उनके विकास के बिना मध्य प्रदेश को विकसित राज्य नहीं बनाया जा सकता।
कार्यक्रम की शुरुआत संविधान निर्माता भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर और आदिवासी नायक बिरसा मुंडा के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुई। यह महासम्मेलन शाम करीब पांच बजे तक चला, जिसमें भविष्य की रणनीति और आगामी बड़े आंदोलन की रूपरेखा पर भी चर्चा की गई। आयोजन में प्रदेश के दूरदराज क्षेत्रों से करीब 50 हजार कार्यकर्ता पहुंचे, जिनमें पैदल यात्रा कर आए लोगों का मंच से विशेष सम्मान भी किया गया।
अंत में अजाक्स के प्रांताध्यक्ष संतोष वर्मा ने सभी संगठनों, कार्यकर्ताओं, प्रशासन, पुलिस बल और मीडिया के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन एडवोकेट रामेश्वर ठाकुर ने किया। संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन यहीं समाप्त नहीं होगा, बल्कि आरक्षित समाज के अधिकारों की लड़ाई और तेज की जाएगी।