भागीरथपुरा कांड को एक माह, लेकिन संकट बरकरार, आदेश के बाद रुकीं 200 से ज्यादा वार्डों की फाइलें

भागीरथपुरा कांड को लगभग एक महीना बीतने को है, लेकिन हालात अब भी पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाए हैं। क्षेत्र में लीकेज की समस्याएं लगातार सामने आ रही हैं और दूषित पानी से प्रभावित मरीजों के मिलने का सिलसिला भी थमने का नाम नहीं ले रहा। इस बीच एक और बड़ा तथ्य उजागर हुआ है, जिसने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।

शासन के पत्र से रुकीं 200 से ज्यादा वार्डों की फाइलें

सूत्रों के अनुसार, शासन से जारी एक पत्र के बाद नगर निगम के अधिकारियों ने 200 से अधिक वार्डों से जुड़ी पेयजल, ड्रैनेज, सडक़ निर्माण और अन्य विकास कार्यों की फाइलों को मंजूरी नहीं दी। नगरीय प्रशासन और विकास विभाग के आयुक्त द्वारा जारी दिशा-निर्देशों में साफ कहा गया था कि शासन द्वारा तैयार किए जा रहे नए एसओआर (शेड्यूल ऑफ रेट) के अनुसार ही टेंडर बनाए जाएं। इसी कारण भागीरथपुरा सहित कई क्षेत्रों की फाइलें अटक गईं।

अमृत-2.0 और डुप्लीकेसी ने बढ़ाई परेशानी

कई विकास कार्य अमृत-2.0 योजना के तहत प्रस्तावित थे। ऐसे में डुप्लीकेसी की आशंका के चलते भी फाइलों को रोक दिया गया। परिणामस्वरूप, न केवल भागीरथपुरा बल्कि अन्य वार्डों के भी जरूरी काम समय पर शुरू नहीं हो सके। हालांकि अब शासन द्वारा सडक़ निर्माण से संबंधित नया एसओआर भेजे जाने के बाद इन फाइलों को तेजी से मंजूरी दी जा रही है।

जिम्मेदारी तय करने पर अब भी सवाल

भागीरथपुरा कांड में आखिर जिम्मेदार कौन है, यह सवाल अब भी बना हुआ है। मामले के तूल पकड़ने के बाद शासन ने तत्कालीन निगमायुक्त को हटाया और अपर आयुक्त को निलंबित किया। कुछ अन्य अधिकारियों पर भी कार्रवाई हुई, लेकिन जनप्रतिनिधियों पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। पार्टी स्तर पर केवल पूछताछ तक ही मामला सीमित रहा, न तो नोटिस जारी हुए और न ही कोई सख्त कार्रवाई सामने आई।

इंदौर की छवि को लगा बड़ा झटका

24 मौतों के साथ भागीरथपुरा कांड ने देश और विदेश में इंदौर की छवि को गहरी ठेस पहुंचाई है। इस बीच यह जानकारी भी सामने आई कि नगरीय प्रशासन और विकास विभाग के आयुक्त संकेत भोंडवे के निर्देश पर सभी निगमायुक्तों और नगर पालिकाओं को प्रमुख अभियंता प्रदीप एस. मिश्रा का दो पेज का आदेश भेजा गया था। इसमें सडक़ निर्माण की योजनाएं नए आईएसएसआर के तहत तैयार करने के निर्देश दिए गए थे।

सडक़ निर्माण से जुड़ा हर काम नए एसओआर से प्रभावित

सडक़ निर्माण में केवल सडक़ ही नहीं, बल्कि फुटपाथ, साइकल ट्रैक, ड्रैनेज और जंक्शन डिजाइन जैसे कई काम शामिल होते हैं। 27 सितंबर 2025 को जारी आदेश के बाद ही 200 से अधिक वार्डों की फाइलों को मंजूरी नहीं मिली। इनमें भागीरथपुरा के जनकार्य, जल यंत्रालय और ड्रैनेज से जुड़े महत्वपूर्ण काम भी शामिल थे।

जांच के दौरान भी उठा एसओआर का मुद्दा

सूत्रों का कहना है कि जब अपर मुख्य सचिव संजय दुबे इंदौर आए और भागीरथपुरा मामले की जांच की, तब उनके सामने भी नए एसओआर से जुड़ा यह विषय रखा गया था। इस पर उन्होंने कड़ी नाराजगी जाहिर की थी। बताया जा रहा है कि समय पर काम न होने के कारण ही दूषित पानी से 500 से अधिक लोग बीमार पड़े और 24 लोगों की जान चली गई।

महापौर और समिति प्रभारी की आपत्ति

महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने भी नए एसओआर की गलत व्याख्या कर वर्क ऑर्डर जारी न करने को लेकर आयुक्त से शिकायत की थी। वहीं, निगम की जनकार्य समिति के प्रभारी राजेन्द्र राठौर ने स्वीकार किया कि नए एसओआर के चलते कई वार्डों की फाइलों को मंजूरी नहीं मिल सकी। उन्होंने बताया कि फिलहाल केवल सडक़ निर्माण से संबंधित नया एसओआर लागू हुआ है, जबकि जल यंत्रालय और अन्य विभागों के काम अभी पुराने एसओआर के आधार पर ही स्वीकृत किए जा रहे हैं।

अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग तेज

सूत्रों का यह भी कहना है कि इस पूरे मामले में भोपाल स्तर पर बैठे आयुक्त संकेत भोंडवे के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके उलट, अधीनस्थ अधिकारियों को ही जिम्मेदार ठहरा दिया गया। भागीरथपुरा कांड के बाद मचे हंगामे के चलते अब तेजी से काम शुरू कराए जा रहे हैं और टेंडरों के साथ फाइलें भी दौड़ने लगी हैं।

पूरे प्रदेश के नगरीय निकाय रहे प्रभावित

यह स्थिति सिर्फ इंदौर नगर निगम तक सीमित नहीं रही, बल्कि प्रदेश के सभी नगरीय निकाय नए एसओआर के कारण लंबे समय तक उलझे रहे। अब जबकि सडक़ निर्माण से जुड़ा नया एसओआर जारी हो चुका है, उम्मीद की जा रही है कि रुके हुए विकास कार्य तेजी से पूरे किए जाएंगे और भविष्य में ऐसी लापरवाही दोहराई नहीं जाएगी।