मंदसौर जिले के आदर्श थाने मल्हारगढ़ में एक छात्र पर कथित तौर पर गलत तरीके से ड्रग केस दर्ज किए जाने के बाद हाईकोर्ट इंदौर पहले ही कड़ा रुख अपना चुका है। इस मामले में एसपी मंदसौर के माध्यम से छह पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया था। कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा था कि प्रथम दृष्टया पूरे थाने की सांठगांठ नजर आती है। इसी पृष्ठभूमि में अब इंदौर क्राइम ब्रांच का एक नया मामला सामने आया है, जिसने पुलिस की कार्यप्रणाली पर फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इंदौर क्राइम ब्रांच की कार्रवाई पर संदेह
ताजा मामला इंदौर क्राइम ब्रांच से जुड़ा है, जिसमें आरोप है कि आरोपी की गिरफ्तारी कहीं और हुई, लेकिन कागजों में उसे इंदौर से गिरफ्तार बताया गया। यह मामला भी हाईकोर्ट इंदौर तक पहुंच चुका है, जहां केस डायरी और दस्तावेजों के आधार पर पुलिस की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।
केस डायरी के मुताबिक क्या हुआ था
इंदौर क्राइम ब्रांच की केस डायरी के अनुसार, 4 जून 2025 को कार्यालय सहायक उप निरीक्षक बलवंत इंगले को एक मुखबिर से सूचना मिली थी। मुखबिर ने बताया कि मोहसिन मेव, गनी पटेल को एमडी ड्रग्स सप्लाई करने वाला है। इसके बाद क्राइम ब्रांच की टीम रवाना हुई और बीमा अस्पताल, मरीमाता चौराहा व रिक्शा स्टैंड क्षेत्र में घेराबंदी की गई। वहां एक व्यक्ति तौल कांटे से कुछ तौलता दिखाई दिया। पूछताछ में उसने अपना नाम मोहसिन मेव पिता एजाज खान और साथ में मौजूद व्यक्ति ने खुद को गनी पटेल पिता जावेद पटेल बताया।
पुलिस के अनुसार, मोहसिन के पास से 34 ग्राम और गनी के पास से 20.78 ग्राम एमडी मेफेड्रोन बरामद हुई। गिरफ्तारी मेमो में 5 जून की तारीख दर्ज की गई और जब्त ड्रग्स की कीमत करीब 54 लाख रुपए बताई गई। बाद में इसी मामले में प्रशांत और अब्दुल करीम को भी आरोपी बनाया गया।
परिजनों का आरोप: जावरा से उठाकर इंदौर दिखाया गया
मामले में नया मोड़ तब आया जब मोहसिन के पिता एजाज खान, निवासी डूंगरगेट थाना जावरा, ने गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि 4 जून की रात करीब 12:30 बजे सफेद कार, काली स्कॉर्पियो और दो-तीन मोटरसाइकिलों से 8-10 पुलिसकर्मी उनके घर पहुंचे और मोहसिन को जबरन उठाकर ले गए। पड़ोसी के घर का सीसीटीवी डीवीआर भी पुलिस अपने साथ ले गई। हालांकि, चौराहे पर लगे सीसीटीवी कैमरों में यह पूरी घटना रिकॉर्ड हो गई, जिसकी फुटेज अब उनके पास मौजूद है। फुटेज में मोहसिन सफेद शर्ट और नीले पजामे में दिखाई दे रहा है।
परिजनों को रात में बताया गया था कि पूछताछ के बाद छोड़ दिया जाएगा, लेकिन सुबह जावरा थाने पहुंचने पर बताया गया कि इंदौर पुलिस उसे किसी केस में ले गई है। इसके बाद पता चला कि 5 जून को उस पर गनी पटेल के साथ मिलकर झूठा एनडीपीएस केस दर्ज कर दिया गया।
जावरा थाने के रोजनामचे से खुली परतें
एजाज खान ने अपनी याचिका में जावरा थाने के 4 जून रात 12:57 बजे के रोजनामचे का भी जिक्र किया है। इसमें दर्ज है कि इंदौर क्राइम ब्रांच की टीम एनडीपीएस अपराध क्रमांक 64/25 धारा 8/22 के तहत संदेही की तलाश में जावरा आई थी और संदेही को साथ लेकर इंदौर रवाना हो गई। रोजनामचे में एएसआई रणवीर सिंह रघुवंशी, भागवत कोहली, प्रधान आरक्षक आशीष शर्मा, नीरज सिंह तोमर, संतोष यादव तथा आरक्षक सर्वेश सिंह और शंभू सिंह तोमर के नाम दर्ज हैं। जावरा पुलिस के जवान भी इस कार्रवाई में शामिल बताए गए हैं।
रिश्वत मांगने और झूठे केस में फंसाने का आरोप
एजाज खान ने मुख्यमंत्री से लेकर उच्च अधिकारियों तक लिखित शिकायत की है। उनका आरोप है कि मोहसिन को थाने में बैठाकर पैसों की मांग की गई और धमकी दी गई कि रकम नहीं देने पर एनडीपीएस एक्ट में फंसा दिया जाएगा। पैसे नहीं देने पर कथित तौर पर उसे गनी पटेल के साथ जोड़कर 34 ग्राम एमडी ड्रग्स का झूठा मामला बना दिया गया और जेल भेज दिया गया।
मल्हारगढ़ थाना केस से जुड़ता दिखता पैटर्न
इससे पहले मंदसौर के मल्हारगढ़ थाने में भी एक छात्र को कथित तौर पर राजस्थान पुलिस की बस से उठाकर कहीं और से गिरफ्तारी दिखाने का आरोप लगा था। परिजनों ने बस के अंदर का सीसीटीवी फुटेज सबूत के तौर पर पेश किया था। इस पर हाईकोर्ट ने एसपी मंदसौर को तलब किया, प्रक्रियागत गलती मानी गई और छह पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर जांच के आदेश दिए गए। कोर्ट ने प्रमुख सचिव गृह विभाग को भी तलब कर पुराने आदेशों, बॉडी कैमरे और अन्य निर्देशों की जानकारी मांगी थी।
इंदौर पुलिस पहले भी विवादों में
इंदौर पुलिस इससे पहले भी चंदननगर थाना मामले में कठघरे में आ चुकी है, जहां एक आरोपी के बेटे को 35 घंटे तक हथकड़ी लगाकर बैठाने का आरोप लगा था। इस पर हैबियस कॉर्पस याचिका दायर हुई थी और हाईकोर्ट ने सीपी संतोष सिंह को संबंधित टीआई इंद्रमणि पटेल पर विभागीय और आपराधिक कार्रवाई के निर्देश दिए थे। हालांकि बाद में याचिका वापस ले ली गई, जिससे कार्रवाई रुक गई। इसी थाने से जुड़े एक अन्य मामले में चार की जगह आठ फर्जी केस दिखाने का आरोप सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, जिसमें सीपी, एडिशनल डीसीपी और टीआई को पक्षकार बनाया गया है।