New Delhi:अगर आप आने वाले दिनों में छुट्टियों की प्लानिंग कर रहे हैं या किसी जरूरी काम से हवाई सफर करने वाले हैं, तो यह खबर आपके बजट को बिगाड़ सकती है। 1 अप्रैल से विमान ईंधन यानी एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की नई कीमतें लागू होने वाली है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के चलते इस बार ईंधन के दामों में भारी बढ़ोतरी के संकेत मिल रहे हैं, जिसका सीधा असर आपके हवाई टिकट की कीमत पर पड़ेगा।
क्यों महंगा हो रहा है विमान ईंधन?
हर महीने की पहली तारीख को तेल विपणन कंपनियां (IOC, BPCL और HPCL) ATF के दामों की समीक्षा करती हैं। इस बार स्थितियां काफी चुनौतीपूर्ण हैं:
कच्चे तेल में उबाल: अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतें 116 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं।
रुपये की कमजोरी: डॉलर के मुकाबले रुपये के गिरते स्तर ने आयात को और महंगा कर दिया है।
वैश्विक तनाव: इजराइल-ईरान संकट के कारण सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, जिसका असर 1 मार्च की समीक्षा में नहीं दिखा था, लेकिन अब 1 अप्रैल से यह प्रभावी होने वाला है।
टिकट और ईंधन का गणित: 30-40% लागत सिर्फ तेल की
किसी भी एयरलाइन के कुल परिचालन खर्च (Operating Cost) का 30 से 40 फीसदी हिस्सा अकेले ईंधन यानी ATF का होता है। जब ATF महंगा होता है, तो एयरलाइंस अपनी लागत निकालने के लिए टिकट की कीमतों में बढ़ोतरी कर देती हैं। यानी ईंधन की कीमत में मामूली बढ़त भी आम यात्री की जेब पर बड़ा बोझ डालती है।
राज्यों का वैट (VAT): कहीं सस्ता, कहीं महंगा सफर
ATF की कीमतों में एक बड़ा अंतर राज्यों द्वारा लगाए जाने वाले वैल्यू ऐडेड टैक्स (VAT) के कारण आता है। चूँकि ATF अभी GST के दायरे में नहीं है, इसलिए हर राज्य अपनी मर्जी से टैक्स वसूलता है:
महाराष्ट्र और दिल्ली: यहां वैट 20 से 25 फीसदी तक है, जिससे ईंधन महंगा पड़ता है।
आंध्र प्रदेश और तेलंगाना: इन राज्यों ने वैट घटाकर मात्र 1 फीसदी कर दिया है, जिससे वहां एविएशन सेक्टर में तेजी देखी गई है।
यही कारण है कि एक ही दूरी के लिए अलग-अलग शहरों से उड़ान भरने पर किराए में बड़ा अंतर देखने को मिलता है।
मंत्रालय की तैयारी: राज्यों को पत्र और शुल्क की समीक्षा
बढ़ती कीमतों के बीच नागरिक उड्डयन मंत्रालय सक्रिय हो गया है। सूत्रों के अनुसार, एविएशन मिनिस्टर जल्द ही सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को VAT घटाने के लिए पत्र लिखने की तैयारी में हैं। साथ ही, मंत्रालय एयरपोर्ट ऑपरेटर्स के साथ बैठक कर एयरपोर्ट चार्जेस की समीक्षा भी कर सकता है, ताकि अगर ईंधन महंगा हो, तो यात्रियों को अन्य शुल्कों में राहत देकर किराए को संतुलित किया जा सके।
निष्कर्ष
1 अप्रैल से होने वाली यह बढ़ोतरी न केवल इमरजेंसी में यात्रा करने वालों के लिए मुश्किल पैदा करेगी, बल्कि पर्यटन सीजन शुरू होने से पहले ट्रैवल इंडस्ट्री को भी झटका दे सकती है। अब सबकी नजरें 1 अप्रैल की सुबह तेल कंपनियों द्वारा जारी होने वाली नई रेट लिस्ट पर टिकी हैं।