श्रीनगर/नई दिल्ली: आस्था और विश्वास का संगम ‘श्री अमरनाथ यात्रा’ इस वर्ष 3 जुलाई 2026 से शुरू होने जा रही है। पवित्र गुफा में बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए यह यात्रा 28 अगस्त 2026 तक यानि रक्षाबंधन के दिन समाप्त होगी।
श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड (SASB) ने यात्रा के सुचारू संचालन के लिए तारीखों का ऐलान कर दिया है। इस बार यह पावन यात्रा कुल 57 दिनों की होगी, जिसके लिए पंजीकरण की प्रक्रिया 15 अप्रैल से देशव्यापी स्तर पर शुरू कर दी जाएगी।
पंजीकरण: ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों विकल्प
श्रद्धालु इस वर्ष दो माध्यमों से अपना पंजीकरण (Registration) करा सकते हैं:
ऑनलाइन प्रक्रिया: श्रद्धालु श्राइन बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट या मोबाइल ऐप के माध्यम से घर बैठे आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए मोबाइल नंबर और ईमेल का सत्यापन अनिवार्य होगा। आवेदन के समय पासपोर्ट साइज फोटो और 8 अप्रैल 2026 के बाद जारी किया गया ‘अनिवार्य स्वास्थ्य प्रमाण पत्र’ (CHC) अपलोड करना होगा।
ऑफलाइन प्रक्रिया: जो लोग डिजिटल माध्यम का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं, वे पंजाब नेशनल बैंक, जम्मू-कश्मीर बैंक या यस बैंक की अधिकृत शाखाओं में जाकर आवेदन कर सकते हैं। यह प्रक्रिया ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के आधार पर होगी। यहां बायोमेट्रिक सत्यापन के साथ प्रति व्यक्ति 150 रुपये शुल्क जमा करना होगा।
RFID कार्ड: सुरक्षा और ट्रैकिंग के लिए अनिवार्य
रजिस्ट्रेशन के बाद भी यात्रा तब तक अधूरी है जब तक आपके पास RFID कार्ड न हो। जम्मू-कश्मीर पहुंचने पर यात्रियों को निर्धारित केंद्रों से यह कार्ड प्राप्त करना होगा। श्राइन बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि बिना RFID कार्ड के किसी भी यात्री को डोमैल (बालटाल) या चंदनवाड़ी (पहलगाम) प्रवेश द्वार से आगे जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। यह कार्ड यात्रियों की सुरक्षा और रियल-टाइम ट्रैकिंग के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
पात्रता और स्वास्थ्य नियम
अमरनाथ यात्रा की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए कुछ सख्त नियम बनाए गए हैं:
आयु सीमा: केवल 13 वर्ष से 70 वर्ष के बीच के लोग ही यात्रा कर सकते हैं।
गर्भवती महिलाएं: 6 सप्ताह से अधिक की गर्भवती महिलाओं को यात्रा की अनुमति नहीं है।
मेडिकल सर्टिफिकेट: अधिकृत डॉक्टर द्वारा जारी स्वास्थ्य प्रमाण पत्र सबसे आवश्यक दस्तावेज है, क्योंकि ऊंचाई पर ऑक्सीजन की कमी और ठंड चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
मार्ग का चयन: पहलगाम या बालटाल?
यात्री अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार दो रास्तों में से किसी एक को चुन सकते हैं:
पहलगाम मार्ग: यह पारंपरिक मार्ग है, जिसकी दूरी लगभग 46 किलोमीटर है। इसमें समय अधिक लगता है, लेकिन चढ़ाई बालटाल की तुलना में थोड़ी सरल है।
बालटाल मार्ग: यह छोटा रास्ता है (करीब 14 किलोमीटर), लेकिन इसकी खड़ी चढ़ाई इसे काफी कठिन बनाती है।
हेलीकॉप्टर सेवा: बुजुर्गों और चलने में असमर्थ लोगों के लिए बालटाल और पहलगाम दोनों तरफ से हेलीकॉप्टर की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी।
सावधानी: यात्रा के दौरान गरम कपड़े, रेनकोट और आरामदायक ट्रेकिंग शूज साथ रखें। बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए अपनी बारी का इंतजार करें और श्राइन बोर्ड के दिशा-निर्देशों का पालन करें।