साल का पहला सूर्य ग्रहण कल दोपहर से शुरू, सूतक काल का समय और जरूरी जानकारियां यहां पढ़ें

साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी को लगेगा। यह एक वलयाकार सूर्य ग्रहण (Annular Solar Eclipse) होगा, जिसमें चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह ढकने में असमर्थ रहता है। इसके कारण सूर्य के चारों ओर एक चमकदार अंगूठी जैसी आकृति बनती है, जिसे ‘रिंग ऑफ फायर’ कहा जाता है। भारत के कई इलाकों में यह दुर्लभ खगोलीय घटना देखी जा सकेगी।

कब और कितने समय तक रहेगा सूर्य ग्रहण?

17 फरवरी 2026 को यह सूर्य ग्रहण भारतीय समयानुसार दोपहर के आसपास शुरू होगा। वलयाकार सूर्य ग्रहण की कुल अवधि कुछ घंटों की रहेगी। इस दौरान सूर्य का एक बड़ा हिस्सा चंद्रमा की छाया में आ जाएगा, लेकिन सूर्य की बाहरी किनारी चमकती रहेगी।

यह ग्रहण दक्षिण अमेरिका, अफ्रीका, अंटार्कटिका और एशिया के कुछ हिस्सों में दिखाई देगा। भारत में यह आंशिक सूर्य ग्रहण के रूप में नजर आ सकता है।

वलयाकार सूर्य ग्रहण क्या होता है?

वलयाकार सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आता है। लेकिन चंद्रमा अपनी कक्षा में पृथ्वी से अपेक्षाकृत दूर होता है। इस वजह से उसका आकार सूर्य को पूरी तरह ढकने के लिए पर्याप्त नहीं होता। नतीजतन सूर्य की बाहरी परिधि एक चमकदार वलय के रूप में दिखती है।

यही कारण है कि इसे ‘रिंग ऑफ फायर’ कहा जाता है। यह खगोलीय दृश्य बेहद दुर्लभ और आकर्षक माना जाता है।

सूतक काल का समय और धार्मिक मान्यताएं

हिंदू धर्म में सूर्य ग्रहण का विशेष महत्व माना जाता है। पंचांग के अनुसार सूर्य ग्रहण से पहले सूतक काल लागू होता है। सूर्य ग्रहण में सूतक काल ग्रहण शुरू होने से लगभग 12 घंटे पहले प्रारंभ हो जाता है।

सूतक काल के दौरान मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। भोजन बनाना और खाना वर्जित माना जाता है। गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। पूजा-पाठ, दान और स्नान को इस समय शुभ माना जाता है।

हालांकि, कुछ विशेषज्ञों के अनुसार यदि ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देता तो सूतक काल मान्य नहीं होता। 17 फरवरी 2026 के ग्रहण की भारत में दृश्यता के आधार पर ही सूतक काल की वैधता तय होगी।

ग्रहण के दौरान क्या करें और क्या न करें?

ग्रहण के समय नंगी आंखों से सूर्य को देखना खतरनाक होता है। इससे आंखों को गंभीर नुकसान हो सकता है। सूर्य ग्रहण देखने के लिए विशेष सोलर फिल्टर वाले चश्मे का उपयोग करना चाहिए।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण काल में तुलसी के पत्ते भोजन और पानी में डालकर रखने की सलाह दी जाती है। ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करके दान-पुण्य करना शुभ माना जाता है। गंगाजल का छिड़काव घर में करने की भी परंपरा है।

भारत में सूर्य ग्रहण का इतिहास

इससे पहले भारत में अक्टूबर 2023 में वलयाकार सूर्य ग्रहण की घटना देखी गई थी, जो मुख्य रूप से अमेरिका में दिखाई दी थी। भारत में आखिरी बार पूर्ण सूर्य ग्रहण 2009 में दिखा था। फरवरी 2026 का ग्रहण भारत के लिए एक महत्वपूर्ण खगोलीय घटना होगी।

खगोल विज्ञानियों का कहना है कि सूर्य ग्रहण पूरी तरह से प्राकृतिक खगोलीय घटना है। इसका मानव जीवन पर कोई प्रत्यक्ष वैज्ञानिक प्रभाव नहीं पड़ता। हालांकि, धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से इसका विशेष महत्व बना हुआ है।

2026 में कुल कितने ग्रहण लगेंगे?

साल 2026 में कुल चार ग्रहण लगेंगे। इनमें दो सूर्य ग्रहण और दो चंद्र ग्रहण शामिल हैं। पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी को और दूसरा 12 अगस्त 2026 को लगेगा। चंद्र ग्रहण मार्च और सितंबर में लगने की संभावना है।

खगोल प्रेमियों के लिए 2026 का साल काफी खास रहने वाला है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि ग्रहण देखने की तैयारी पहले से कर लेनी चाहिए और सुरक्षित तरीकों का ही इस्तेमाल करना चाहिए।