ऑस्कर विजेता संगीतकार एआर रहमान इन दिनों अपने बयानों को लेकर चर्चा में है। हाल ही में उन्होंने बॉलीवुड में काम मिलने की प्रक्रिया और ‘सांप्रदायिक’ माहौल को लेकर एक टिप्पणी की थी।
भले ही रहमान ने बाद में इस पर स्पष्टीकरण जारी कर दिया हो, लेकिन इंडस्ट्री में उनके बयान पर बहस जारी है।तमाम हस्तियों की प्रतिक्रिया के बाद अब भजन सम्राट अनूप जलोटा ने भी इस विवाद में अपनी राय रखी है। जलोटा ने संगीतकार पर निशाना साधते हुए उन्हें एक चौंकाने वाली सलाह दे डाली है। अनूप जलोटा ने न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बातचीत के दौरान रहमान के बयान पर तीखी आपत्ति जताई।
उन्होंने कहा कि अगर रहमान को वाकई ऐसा लगता है कि उनके धर्म के कारण उन्हें बॉलीवुड में काम नहीं मिल रहा है, तो उन्हें ‘घर वापसी’ यानी दोबारा हिंदू धर्म अपनाने पर विचार करना चाहिए।
जलोटा ने याद दिलाया पुराना दौर
अनूप जलोटा ने रहमान के अतीत का जिक्र करते हुए कहा कि एआर रहमान पहले हिंदू थे और बाद में उन्होंने इस्लाम धर्म स्वीकार किया था। धर्म बदलने के बाद भी उन्होंने संगीत की दुनिया में खूब नाम कमाया और लोगों के दिलों में जगह बनाई।
जलोटा का तर्क है कि जब पहले धर्म आड़े नहीं आया, तो अब ऐसा सोचना गलत है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर रहमान को अब ऐसा विश्वास हो गया है कि उनके धर्म की वजह से अवसर कम हो रहे हैं, तो उन्हें अपना पुराना धर्म अपनाने के बारे में सोचना चाहिए।
“अगर उन्हें इस बात का विश्वास है कि हमारे देश में मुसलमान होने की वजह से उनको फिल्में नहीं मिल रही, म्यूजिक देने के लिए, तो वो फिर से हिंदू हो जाएं। उनको यह विश्वास होना चाहिए कि उनको हिंदू होने से फिर से फिल्में मिलनी शुरू हो जाएंगी। यही तो रहमान के मतलब का सार है। इसलिए मेरा सुझाव है कि वे हिंदू बनकर ट्राई करें और देखें कि क्या फिर से उन्हें फिल्म प्रोजेक्ट्स मिलने लगते हैं या नहीं।” — अनूप जलोटा
रहमान के किस बयान पर मचा है बवाल?
यह पूरा विवाद एआर रहमान के एक हालिया इंटरव्यू से शुरू हुआ। बीबीसी एशियन नेटवर्क को दिए इंटरव्यू में रहमान से पूछा गया था कि क्या एक तमिल संगीतकार के रूप में उन्होंने कभी हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में भेदभाव महसूस किया है।
इस पर रहमान ने जवाब दिया था, “शायद मुझे कभी इसका पता ही नहीं चला, शायद भगवान ने इसे छुपा रखा था, लेकिन मैंने ऐसा कुछ भी महसूस नहीं किया।
हालाकि, पिछले आठ वर्षों में शायद सत्ता में बदलाव आया है और अब पावर उन लोगों के हाथ में है जो रचनात्मक नहीं हैं। यह सांप्रदायिक मुद्दा भी हो सकता है।”
रहमान ने अपनी बात में आगे कहा था कि यह भेदभाव उनके सामने स्पष्ट रूप से नहीं है, लेकिन उन्हें इसका आभास होता है। इसके अलावा, उन्होंने फिल्म ‘छावा’ की आलोचना करते हुए उसकी छवि को ‘विभाजनकारी’ बताया था, जिस पर भी काफी चर्चा हुई थी।
रहमान ने दी थी सफाई
विवाद बढ़ने के बाद एआर रहमान ने एक वीडियो जारी कर माफी भी मांगी थी. उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका इरादा किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का नहीं था।
रहमान ने कहा, “संगीत हमेशा से हमारी संस्कृति से जुड़ने, उसका जश्न मनाने और उसका सम्मान करने का मेरा तरीका रहा है। भारत मेरी प्रेरणा, मेरा गुरु और मेरा घर है। मैं समझता हूं कि इरादों को कभी-कभी गलत समझा जा सकता है।” उन्होंने उम्मीद जताई कि लोग उनकी बात की गहराई को समझेंगे और विवाद को यहीं समाप्त करेंगे।