मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला! EWS उम्मीदवारों को मिलेगी आयु सीमा में 5 साल की छूट

यूपीएससी सिविल सर्विस परीक्षा (UPSC CSE 2025) की तैयारी कर रहे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के उम्मीदवारों के लिए एक महत्वपूर्ण अपडेट सामने आई है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए ईडब्ल्यूएस उम्मीदवारों को बड़ा लाभ दिया है। कोर्ट के इस निर्णय के तहत, ईडब्ल्यूएस उम्मीदवारों को आयु सीमा में 5 साल की छूट मिलेगी और अटेम्प्ट की संख्या को बढ़ाकर 9 कर दिया गया है। यह फैसला समानता की दिशा में एक अहम कदम हो सकता है, जिससे ईडब्ल्यूएस उम्मीदवारों को प्रशासनिक सेवाओं और शिक्षा में समान अवसर मिल सकते हैं।

ईडब्ल्यूएस उम्मीदवारों को आयु सीमा में 5 साल की छूट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले के अनुसार, ईडब्ल्यूएस उम्मीदवारों को यूपीएससी सीएसई परीक्षा में आयु सीमा में 5 साल की छूट दी जाएगी। पहले यह सुविधा सिर्फ आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों के लिए उपलब्ध थी, लेकिन अब इसे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के उम्मीदवारों को भी दिया जाएगा। इससे ईडब्ल्यूएस उम्मीदवारों को अपनी तैयारी और परीक्षा में बेहतर अवसर मिलेंगे।

अटेम्प्ट की संख्या में बढ़ोतरी

इसके अलावा, हाईकोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि ईडब्ल्यूएस उम्मीदवारों के लिए अटेम्प्ट की संख्या को बढ़ाकर 9 कर दिया जाएगा। पहले ईडब्ल्यूएस उम्मीदवारों को यूपीएससी परीक्षा में 6 अटेम्प्ट मिलते थे, लेकिन अब वे 9 अटेम्प्ट तक इस परीक्षा में बैठ सकते हैं। यह बदलाव उनके लिए एक बड़ी राहत साबित हो सकता है, क्योंकि इससे अधिक अवसर मिलने की संभावना है और वे अपने प्रयासों को और भी सशक्त बना सकते हैं।

कपिल सिब्बल की पैरवी

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के सीनियर वकील कपिल सिब्बल ने पैरवी की थी। उन्होंने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से उच्च न्यायालय के सामने अपने तर्क रखे और 10 फरवरी 2025 के आदेश का हवाला दिया। इसमें अधिवक्ता धीरज तिवारी द्वारा की गई पैरवी का भी उल्लेख किया गया था। कपिल सिब्बल की कड़ी पैरवी के बाद हाईकोर्ट ने यह फैसला सुनाया।

यूपीएससी को निर्देश

हाईकोर्ट ने इस संबंध में यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (UPSC) को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता और ऐसे अन्य उम्मीदवारों के आवेदन स्वीकार किए जाएं, जिन्होंने आयु सीमा की शर्तों को पूरा नहीं किया है। इसके साथ ही, कोर्ट ने आयोग को यह भी निर्देश दिया है कि बिना अनुमति के नियुक्ति आदेश जारी करने से बचा जाए।

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