देखने वाली नहीं, दिखाने वाली फिल्म है ‘अस्सी’: बहुत जल्द सिनेमाघरों में होने वाली है रिलीज़

Mumbai News : बॉलीवुड में जहां फिल्मों का प्रचार सितारों के बड़े-बड़े चेहरों से होता है, वहीं एक नई फिल्म ‘अस्सी’ अपनी अनूठी रणनीति के कारण चर्चा में है।

20 फरवरी को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली इस फिल्म के न तो स्टारकास्ट की घोषणा की गई है, न ही निर्देशक या निर्माता का नाम सामने लाया गया है। फिल्म की पहचान अब तक सिर्फ उसके नाम से बनी है, और इसी रहस्य ने दर्शकों में भारी जिज्ञासा पैदा कर दी है।

फिल्म का ट्रेलर ‘बॉर्डर 2’ के साथ सिनेमाघरों में दिखाया जा रहा है, जो यह साफ करता है कि यह कोई हल्की-फुल्की कहानी नहीं, बल्कि दर्शकों से सीधे संवाद करने वाली एक गंभीर फिल्म है।

कहानी जो सवाल पूछती है

‘अस्सी’ की कहानी एक महिला के खिलाफ हुए अपराध और उसके बाद की घटनाओं पर केंद्रित है। यह एक इन्वेस्टिगेटिव और कोर्टरूम ड्रामा है, लेकिन इसका दायरा सिर्फ कानूनी प्रक्रिया तक सीमित नहीं है। फिल्म समाज की उस मानसिकता पर भी सवाल उठाती है, जो ऐसे अपराधों को जन्म देती है और फिर उन्हें सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देती है।

मेकर्स का मानना है कि यह फिल्म दर्शकों के जेहन में गहरे सवाल छोड़ जाएगी, जो सिनेमाघर से बाहर निकलने के बाद भी उनके साथ रहेंगे। इसी वजह से इसे एक ‘अर्जेंट वॉच’ यानी ऐसी फिल्म कहा जा रहा है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

लेखक के नाम पर फिल्म का प्रचार

इस फिल्म का प्रचार लेखक गौरव सोलंकी के नाम से किया जा रहा है, जो बॉलीवुड की परंपराओं से बिल्कुल अलग है। यह कदम उस व्यवस्था पर एक शांत टिप्पणी है, जहां अक्सर कहानी और लेखक को सितारों की चमक के आगे कम आंका जाता है। ‘अस्सी’ इस बात पर जोर देती है कि सिनेमा की असली बुनियाद विचार और कहानी होती है, न कि सिर्फ स्टार पावर।

“यह देखने वाली नहीं, बल्कि दिखाने वाली फिल्म है।” — गौरव सोलंकी

राजस्थान के एक छोटे कस्बे से आने वाले गौरव सोलंकी ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई और एक सुरक्षित नौकरी छोड़कर लेखन को अपना करियर बनाया। उनका मानना है कि कहानियां वहीं से निकलती हैं, जहां जिंदगी को करीब से महसूस किया जाता है।

Gen Z और छोटे शहरों के लिए एक उम्मीद

यह फिल्म खासकर आज की युवा पीढ़ी, यानी Gen Z के लिए प्रासंगिक मानी जा रही है, जो सवाल करने और सच को चुनौती देने से नहीं हिचकती। इसके साथ ही, यह छोटे शहरों के कंटेंट क्रिएटर्स के लिए भी एक प्रेरणा है।

गौरव का मानना है कि भोपाल, इंदौर और रायपुर जैसे शहरों के कहानीकार ही बॉलीवुड का भविष्य हैं। उन्होंने रायपुर से अपने खास लगाव का भी जिक्र किया।

कुल मिलाकर ‘अस्सी’ सिर्फ मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि समाज में एक जरूरी बहस शुरू करने के इरादे से आ रही है। यह एक ऐसी कहानी है, जो पर्दे पर खत्म नहीं होती, बल्कि लोगों के बीच अपनी जगह बनाती है।