इंदौर के ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले आयुष झा ने लुम्बिनी चैंपियनशिप में गोल्ड जीता

इंदौर जिले के ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले पहलवान आयुष झा ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक जीतकर जिले, प्रदेश और देश का नाम रोशन किया है। उन्होंने नेपाल के लुम्बिनी में आयोजित साउथ एशियन कॉम्बैट चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल हासिल किया।
राज्य में युवा खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए लगातार प्रोत्साहित किए जाने की नीति का असर अब जमीन पर दिखाई दे रहा है। इसी क्रम में इंदौर जिले के प्रतिभावान खिलाड़ियों को प्रशासनिक स्तर पर सहयोग दिया जा रहा है, जिसका ताजा उदाहरण आयुष झा की उपलब्धि के रूप में सामने आया है।
आयुष झा इंदौर जिले के ग्राम काली बिलौद के निवासी हैं। ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने के बावजूद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में जगह बनाई और पदक जीतकर अपनी तैयारी तथा प्रदर्शन को साबित किया।
जिला प्रशासन से मिली आर्थिक सहायता
अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भागीदारी के लिए आयुष झा को जिला प्रशासन की ओर से आर्थिक मदद भी दी गई थी। कलेक्टर शिवम वर्मा की पहल पर उन्हें 30 हजार रुपये की सहायता प्रदान की गई। यह राशि उनकी प्रतियोगिता में भागीदारी के लिए उपलब्ध कराई गई थी।
प्रशासनिक सहयोग मिलने के बाद आयुष ने प्रतियोगिता में उतरकर बेहतर प्रदर्शन किया और स्वर्ण पदक हासिल किया। इस उपलब्धि को जिला प्रशासन द्वारा खिलाड़ियों को दिए जा रहे प्रोत्साहन से भी जोड़ा जा रहा है, क्योंकि भागीदारी के स्तर पर मिलने वाली मदद कई खिलाड़ियों के लिए महत्वपूर्ण रहती है।
गोल्ड जीतने के बाद कलेक्टर कार्यालय पहुंचे आयुष
स्वर्ण पदक जीतने के बाद आयुष झा कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने कलेक्टर शिवम वर्मा के प्रति आभार व्यक्त किया। मुलाकात के दौरान उन्होंने प्रशासन की ओर से मिले सहयोग के लिए धन्यवाद दिया।
इस अवसर पर कलेक्टर शिवम वर्मा ने आयुष झा को मिठाई खिलाकर शुभकामनाएं दीं। जिला प्रशासन की ओर से उनकी उपलब्धि को इंदौर के लिए गौरवपूर्ण बताया गया।
आयुष की सफलता ऐसे समय में सामने आई है, जब प्रदेश में युवा खिलाड़ियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाने के प्रयासों पर जोर दिया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाली प्रतिभाओं को पहचान और सहयोग मिलने पर वे बड़े स्तर पर प्रदर्शन कर सकती हैं, इसका उदाहरण आयुष झा की यह जीत है।
नेपाल के लुम्बिनी में मिली यह सफलता इंदौर जिले के खेल परिदृश्य के लिए भी अहम मानी जा रही है। इससे स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षण ले रहे अन्य खिलाड़ियों को भी प्रेरणा और भागीदारी के अवसरों के लिए संस्थागत सहयोग की दिशा में भरोसा मिलेगा।