आयुष्मान भारत योजना, गंभीर बीमारियों के इलाज में 5 लाख की सीमा नाकाफी, जेब से खर्च कर रहे मरीज

केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘आयुष्मान भारत योजना’ गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए वरदान मानी जाती है, लेकिन गंभीर बीमारियों के इलाज में अब यह भी नाकाफी साबित हो रही है। योजना के तहत मिलने वाला पांच लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा कवर कई मामलों में इलाज का पूरा खर्च नहीं उठा पा रहा है। विशेष रूप से भोपाल जैसे बड़े शहरों में, जहाँ सुपर स्पेशलिटी इलाज की सुविधा है, मरीजों को इस सीमा के खत्म होने के बाद अपनी जेब से भुगतान करना पड़ रहा है।

राजधानी भोपाल के कई निजी और सरकारी अस्पतालों में ऐसे मामले सामने आ रहे हैं। लिवर ट्रांसप्लांट, किडनी ट्रांसप्लांट, बोन मैरो ट्रांसप्लांट और गंभीर कैंसर जैसी बीमारियों का इलाज बेहद महंगा है। इन प्रक्रियाओं में खर्च अक्सर 10 से 20 लाख रुपये तक पहुंच जाता है, जबकि आयुष्मान कार्ड की सीमा केवल पांच लाख रुपये है। ऐसे में मरीज के परिजनों को बाकी की राशि का इंतजाम खुद करना पड़ता है, जो उनके लिए एक बड़ी चुनौती बन जाती है।

महंगे इलाज ने बढ़ाई मुश्किलें

विशेषज्ञों के अनुसार, अंग प्रत्यारोपण (Organ Transplant) जैसी प्रक्रियाओं में केवल सर्जरी का खर्च ही लाखों में होता है। इसके बाद मरीज को लंबी अवधि तक महंगी दवाइयां लेनी पड़ती हैं और आईसीयू का खर्च भी उठाना पड़ता है। उदाहरण के लिए, एक लिवर ट्रांसप्लांट का खर्च निजी अस्पतालों में 15 से 25 लाख रुपये तक हो सकता है। आयुष्मान कार्ड से शुरुआती राहत तो मिल जाती है, लेकिन पूरा इलाज संभव नहीं हो पाता।

कई बार मरीज को लंबे समय तक वेंटिलेटर या आईसीयू सपोर्ट की जरूरत पड़ती है। ऐसे मामलों में पांच लाख रुपये की राशि कुछ ही दिनों में समाप्त हो जाती है। इसके बाद अस्पताल प्रबंधन द्वारा परिजनों को सूचित कर दिया जाता है कि कार्ड की लिमिट खत्म हो चुकी है और आगे का भुगतान उन्हें नकद करना होगा। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह स्थिति बेहद कष्टदायक होती है।

सरकार से सीमा बढ़ाने की मांग

इस समस्या को देखते हुए स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों ने सरकार से आयुष्मान भारत योजना की सीमा बढ़ाने की मांग की है। उनका कहना है कि महंगाई और चिकित्सा उपकरणों की बढ़ती लागत को देखते हुए पांच लाख रुपये की राशि अब पर्याप्त नहीं है। विशेषकर उन बीमारियों के लिए जिन्हें ‘कैटस्ट्रॉफिक इलनेस’ (Catastrophic Illness) की श्रेणी में रखा जाता है, उनके लिए एक अलग फंड या बढ़ी हुई सीमा का प्रावधान होना चाहिए।

गौरतलब है कि कुछ राज्यों ने अपनी स्तर पर स्वास्थ्य बीमा योजनाओं की राशि बढ़ाई है, लेकिन केंद्रीय योजना में अभी भी पांच लाख की ही सीमा है। मरीजों का कहना है कि यदि सरकार गंभीर बीमारियों के लिए इस राशि को बढ़ाकर 10 या 15 लाख रुपये कर दे, तो वास्तव में गरीब परिवारों को बड़ी राहत मिल सकेगी। फिलहाल, कई परिवार इलाज के बीच में ही कर्ज लेने को मजबूर हैं।