आज के डिजिटल युग में स्मार्टफोन हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। लोग लाखों रुपये खर्च कर लेटेस्ट फीचर्स वाला फोन तो खरीद लेते हैं, लेकिन चार्जर खराब होते ही चंद रुपये बचाने के चक्कर में लोकल मार्केट से सस्ता चार्जर उठा लाते हैं।
ये चार्जर देखने में बिल्कुल ब्रांडेड जैसे लगते हैं, लेकिन तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार, ये आपके फोन के लिए किसी ‘धीमे जहर’ से कम नहीं हैं।
अगर आप भी लोकल चार्जर का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो इन 3 बड़े नुकसानों के बारे में जरूर जान लें:
1. बैटरी लाइफ का ‘किलर’ है लोकल चार्जर
ओरिजिनल चार्जर को फोन की विशिष्ट क्षमता के अनुसार डिजाइन किया जाता है। इसके विपरीत, लोकल चार्जर में वोल्टेज और करंट को नियंत्रित करने की क्षमता नहीं होती। जब फोन को सही पावर सप्लाई नहीं मिलती, तो बैटरी सेल्स पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इसका परिणाम यह होता है कि बैटरी की बैकअप क्षमता तेजी से घटने लगती है और अंततः बैटरी फूल (Swelling) जाती है।
2. इंटरनल पार्ट्स और मदरबोर्ड का डैमेज होना
एक असली चार्जर में सेफ्टी चिप्स लगी होती हैं जो ओवरहीटिंग और शॉर्ट सर्किट को रोकती हैं। लोकल चार्जर में इन सुरक्षा मानकों की भारी कमी होती है। बिजली के हल्के से उतार-चढ़ाव (Fluctuation) से फोन का मदरबोर्ड, चार्जिंग IC या टचस्क्रीन खराब हो सकती है। याद रखें, मदरबोर्ड रिपेयर कराने का खर्च फोन की मूल कीमत का 40% से 50% तक हो सकता है।
3. आग और विस्फोट का जानलेवा खतरा
सस्ते चार्जर में इस्तेमाल होने वाले तार और प्लास्टिक की क्वालिटी बेहद घटिया होती है। चार्जिंग के दौरान ये बहुत जल्दी गर्म हो जाते हैं, जिससे शॉर्ट सर्किट होने का डर बना रहता है। आए दिन फोन फटने या घर में आग लगने की खबरें आती हैं, जिनके पीछे मुख्य कारण ये घटिया चार्जर ही होते हैं।
वारंटी पर भी पड़ता है असर
स्मार्टफोन कंपनियां स्पष्ट रूप से कहती हैं कि यदि फोन में खराबी किसी अनधिकृत (Uncertified) चार्जर के इस्तेमाल से आई है, तो फोन की वारंटी खत्म मानी जाएगी। ऐसे में आपको रिपेयरिंग के लिए अपनी जेब से मोटी रकम खर्च करनी पड़ेगी।
स्मार्टफोन की लंबी उम्र और अपनी सुरक्षा के लिए हमेशा ब्रांडेड या BIS सर्टिफाइड चार्जर का ही चुनाव करें। 200-300 रुपये बचाने का लालच आपके हजारों के फोन को हमेशा के लिए कबाड़ बना सकता है।