Dhar News : मकर संक्रांति के पावन पर्व पर जहाँ पूरा जिला उत्सव के माहौल में था, वहीं साइबर अपराधी सक्रिय होकर जिले के आला अधिकारियों के नाम पर जालसाजी करने में जुटे थे। ताजा मामला धार कलेक्टर प्रियंक मिश्रा के नाम का है, जिनका उपयोग कर ठगों ने एक फर्जी फेसबुक अकाउंट बनाया और लोगों को भ्रमित करने का प्रयास किया।
मैसेंजर पर बधाई संदेशों से शुरुआत
असामाजिक तत्वों ने कलेक्टर प्रियंक मिश्रा की फोटो और नाम का उपयोग कर हूबहू दिखने वाली एक फर्जी प्रोफाइल तैयार की। इस अकाउंट से फेसबुक मैसेंजर के माध्यम से लोगों को मकर संक्रांति की शुभकामनाएं भेजी गई। साइबर विशेषज्ञों का मानना है कि यह ठगों की एक पुरानी पद्धति है, जिसमें पहले विश्वास जीता जाता है और फिर “इमरजेंसी” या “मदद” के नाम पर पैसों की मांग की जाती है।
प्रशासन की त्वरित प्रतिक्रिया
जैसे ही यह मामला संज्ञान में आया, जिला प्रशासन ने तुरंत स्थिति स्पष्ट की। आधिकारिक बयान में कहा गया कि कलेक्टर प्रियंक मिश्रा का केवल एक ही सत्यापित फेसबुक अकाउंट है। प्रशासन ने नागरिकों को आगाह किया है कि वे किसी भी संदिग्ध प्रोफाइल से आने वाले संदेशों का उत्तर न दें और न ही किसी लिंक पर क्लिक करें।
पहले भी हो चुकी है कोशिश
यह पहली बार नहीं है जब धार कलेक्टर को निशाना बनाया गया हो। इससे पहले भी उनके नाम और फोटो का उपयोग कर एक फर्जी वॉट्सऐप अकाउंट बनाया गया था। उस समय जांच में पाया गया था कि वह नंबर श्रीलंका के कंट्री कोड का था। समय रहते जानकारी सामने आने से कई लोग आर्थिक नुकसान से बच गए थे।
कलेक्टर की अपील: न दें निजी जानकारी
स्वयं कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने जिलेवासियों से सतर्क रहने की अपील की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि:
कोई भी शासकीय अधिकारी सोशल मीडिया के माध्यम से व्यक्तिगत जानकारी या पैसों की मांग नहीं करता।
अपना OTP (ओटीपी), बैंक विवरण या कोई भी गोपनीय दस्तावेज साझा न करें।
यदि कोई संदिग्ध मैसेज प्राप्त होता है, तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या नजदीकी पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराएं।
निष्कर्ष: डिजिटल युग में इस तरह की ‘फिशिंग’ और ‘इम्पर्सनेशन’ (भेष बदलना) की घटनाएं बढ़ रही हैं। प्रशासन की मुस्तैदी और नागरिकों की जागरूकता ही साइबर ठगी से बचने का एकमात्र प्रभावी तरीका है।