भागीरथपुरा मौत मामला: मंत्री के बयान पर भड़के सज्जन सिंह वर्मा, बोले—‘शर्म से गड़ जाना चाहिए’

मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में 13 लोगों की मौत ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। यह कोई साधारण हादसा नहीं, बल्कि लापरवाही, संवेदनहीनता और जवाबदेही से भागने की एक भयावह तस्वीर बनकर सामने आया है। देशभर में इस घटना को लेकर इंदौर और प्रदेश सरकार की तीखी आलोचना हो रही है। सवाल इसलिए भी ज्यादा गंभीर हो जाता है क्योंकि यह त्रासदी नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के विधानसभा क्षेत्र में हुई, जहां जनता को सुरक्षित और शुद्ध पेयजल मिलना सरकार की पहली जिम्मेदारी थी।

जब इस दर्दनाक घटना पर मीडिया ने मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से सवाल पूछे, तो लोगों को जवाब या संवेदना की उम्मीद थी। लेकिन इसके उलट मंत्री सवाल सुनते ही आपा खो बैठे। जवाब देने के बजाय उन्होंने अभद्र और अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल किया, जिसे किसी भी जिम्मेदार जनप्रतिनिधि के मुंह से सुनना समाज के लिए शर्मनाक है। इस व्यवहार के बाद मामला और भड़क गया। सोशल मीडिया पर लोगों ने मंत्री की तीखी आलोचना की। बाद में उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए माफी मांगने की कोशिश जरूर की, लेकिन जनता का गुस्सा शांत नहीं हुआ। लोगों का कहना है कि माफी शब्दों से नहीं, जिम्मेदारी और कार्रवाई से होती है।

असल में, यह पूरा मामला अचानक नहीं हुआ। भागीरथपुरा क्षेत्र में पिछले करीब एक महीने से लोग लगातार गंदे और बदबूदार पानी की शिकायत कर रहे थे। नगर निगम को बार-बार अवगत कराया गया कि पानी पीने लायक नहीं है, लेकिन न तो समय पर जांच कराई गई और न ही लीकेज ढूंढने की गंभीर कोशिश हुई। हालात सुधारने के बजाय निगम ने पानी में क्लोरीन की मात्रा बढ़ा दी और जनता को यह सलाह दे दी गई कि पानी को उबालकर पीएं। यह सलाह अपने आप में प्रशासन की असफलता को उजागर करती है, क्योंकि हर परिवार के लिए यह संभव नहीं होता कि वह हर बूंद पानी को उबालकर इस्तेमाल करे।

लापरवाही का नतीजा 23 दिसंबर को सामने आया, जब एक साथ कई लोग उल्टी-दस्त की चपेट में आ गए। छोटे बच्चे, बुजुर्ग और कमजोर लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। सीएम हेल्पलाइन से लेकर महापौर हेल्पलाइन तक शिकायतों की बाढ़ आ गई, लेकिन प्रशासन के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी। समय रहते यदि पानी की जांच, पाइपलाइन की मरम्मत और वैकल्पिक व्यवस्था की जाती, तो शायद 13 जिंदगियां यूं असमय खत्म नहीं होतीं। यह मौतें बीमारी से नहीं, सिस्टम की बेरुखी से हुईं—ऐसा कहना अब लोग गलत नहीं मान रहे।

इस पूरे घटनाक्रम पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने बेहद तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सीधे तौर पर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और उनकी पार्टी को कटघरे में खड़ा किया। सज्जन सिंह वर्मा ने कहा कि “वाह कैलाश बाबू, आपकी पार्टी और आपने इंदौर की जनता को नए साल में बहुत बड़ा तोहफा दिया है।” उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि आपके विधानसभा क्षेत्र में अब तक 10 बच्चों की मौत हो चुकी है, और आप संवेदना जताने के बजाय पत्रकारों को अपशब्द कह रहे हैं। यह सिर्फ गैर-जिम्मेदाराना नहीं, बल्कि अमानवीय व्यवहार है।

सज्जन सिंह वर्मा यहीं नहीं रुके। उन्होंने कहा कि “शर्म से गड़ जाना चाहिए।” उनके शब्दों में गुस्सा भी था और दर्द भी। उन्होंने कहा कि यदि इस समय रावण भी पृथ्वी पर होता, तो इन मासूम बच्चों की मौत देखकर उसका दिल भी पसीज जाता। लेकिन सत्ता में बैठे लोगों के सीने में दिल नहीं, पत्थर रखा हुआ है। आपकी संवेदनाएं मर चुकी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जनता की जान की कोई कीमत नहीं रह गई है और सत्ता सिर्फ लूट और अहंकार का माध्यम बन गई है।

भागीरथपुरा की यह घटना अब सिर्फ एक इलाके की समस्या नहीं रही। यह पूरे सिस्टम पर एक बड़ा सवाल बन चुकी है—क्या आम आदमी की जान इतनी सस्ती है? क्या जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग सवाल पूछे जाने पर गाली देकर बच निकल सकते हैं? इंदौर की जनता आज सिर्फ जवाब नहीं, बल्कि न्याय और ठोस कार्रवाई चाहती है। दोषियों पर कार्रवाई, पीड़ित परिवारों को न्याय और भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए ठोस व्यवस्था—यही इस त्रासदी से निकलने का एकमात्र रास्ता है।