Indore News : इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी के सेवन से हड़कंप मच गया है। इस गंभीर लापरवाही के चलते अब तक 15 लोगों की जान जा चुकी है। स्थिति की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लगभग 350 लोग शहर के अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती होकर इलाज करा रहे हैं। प्रशासन और सरकार अब इस मामले में पूरी तरह से एक्शन मोड में आ गए हैं।
लगातार बढ़ते मौतों के आंकड़े के बाद जिला प्रशासन ने मोर्चा संभाल लिया है। कलेक्टर शिवम वर्मा ने नगर निगम और जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ शनिवार सुबह प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया। वे खुद फील्ड पर उतरे और हालात का जायजा लिया। प्रशासन की प्राथमिकता अब और अधिक जानमाल के नुकसान को रोकना है।
डोर-टू-डोर सर्वे और जागरूकता अभियान
प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए एक व्यापक रणनीति बनाई है। इसके तहत एनजीओ (NGO) के दो सौ से ज्यादा सदस्यों को तैनात किया गया है। ये सदस्य क्षेत्र में ‘रिंग सर्वे’ कर रहे हैं। वे घर-घर जाकर लोगों से स्वास्थ्य संबंधी जानकारी जुटा रहे हैं। साथ ही, लोगों से अपील की जा रही है कि वे केवल टैंकरों के जरिए उपलब्ध कराए जा रहे पेयजल का ही उपयोग करें।
जागरूकता फैलाने के लिए आठ से अधिक वाहनों के माध्यम से पूरे इलाके में अनाउंसमेंट किया जा रहा है। स्थानीय निवासियों को पंपलेट भी बांटे जा रहे हैं ताकि वे सावधानी बरत सकें। इसके अलावा, क्षेत्र में सीवरेज और ड्रेनेज की सफाई के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है, ताकि संक्रमण के स्रोत को खत्म किया जा सके।
सरकार और संगठन की सख्ती
भागीरथपुरा में जहरीले पानी से हुई मौतों के बाद मध्य प्रदेश सरकार सख्त हो गई है। जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए भाजपा संगठन भी सक्रिय हो गया है। भाजपा के प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा विशेष रूप से इंदौर पहुंचे हैं।
उन्होंने भाजपा कार्यालय में एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। इस महत्वपूर्ण बैठक में महापौर, क्षेत्रीय पार्षद, प्रदेश पदाधिकारी गौरव रणदिवे, डॉ. निशांत खरे और शहर अध्यक्ष मौजूद रहे।
बैठक में राहत कार्यों की समीक्षा की गई और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने पर चर्चा हुई। प्रशासन और सरकार का पूरा जोर अब प्रभावितों को बेहतर इलाज मुहैया कराने और क्षेत्र में साफ पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने पर है।