New Delhi: इंदौर के भागीरथपुरा में हुई जल प्रदूषण त्रासदी को लेकर केंद्र सरकार ने अब गंभीरता दिखाई है। सोमवार को राज्यसभा में केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के राज्य मंत्री तोखन साहू ने बताया कि सरकार ने इस मामले का संज्ञान ले लिया है।
मंत्री ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि अमृत और अमृत 2.0 योजनाओं के माध्यम से राज्यों को वित्तीय एवं तकनीकी सहायता दी जा रही है। भागीरथपुरा में दिसंबर से दस्त और उल्टी की शिकायतों के बाद कई लोगों की मौत हो चुकी है।
1997 की पुरानी पाइपलाइन है समस्या की जड़
मंत्री साहू ने बताया कि इस क्षेत्र में 1997 में बिछाई गई पाइपलाइनें हैं। इनमें से कई क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। नगर प्रशासन ने पुरानी पाइपलाइनों की पहचान कर ली है। इन्हें अमृत 2.0 योजना में शामिल किया गया है।
लगभग 28 साल पुरानी इन पाइपलाइनों में रिसाव के कारण पानी दूषित हो रहा था। इससे स्थानीय निवासियों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ा।
चार जल परियोजनाओं के लिए निविदाएं जारी
इंदौर नगर निगम ने अमृत 2.0 के तहत चार पैकेज के लिए निविदाएं जारी की हैं। पैकेज-1 का क्रियान्वयन शुरू हो चुका है। बाकी तीन पैकेज अनुमोदन के अंतिम चरण में हैं।
यह परियोजना संपूर्ण जल आपूर्ति श्रृंखला को कवर करेगी। इसमें मौजूदा जल आपूर्ति प्रणाली का व्यापक नवीनीकरण शामिल है। साथ ही संवर्धन और आधुनिकीकरण का काम भी होगा।
14,181 रिसाव का पता चला, 12,634 की मरम्मत
राज्य सरकार की रिपोर्ट के अनुसार अब तक 14,181 रिसाव का पता लगाया गया है। इनमें से 12,634 की मरम्मत पूरी हो चुकी है। शेष रिसाव पर भी काम जारी है।
जल को दूषित होने से बचाने के लिए शहरी स्थानीय निकायों को मानक संचालन प्रक्रियाएं जारी की गई हैं। इन एसओपी का पालन अनिवार्य किया गया है।
3,298 में से 3,109 ओवरहेड टैंकों की सफाई
मध्य प्रदेश में कुल 3,298 ओवरहेड टैंक हैं। इनमें से 3,109 की सफाई पूरी हो चुकी है। बाकी टैंकों की सफाई भी जल्द होगी।
मंत्री ने अपने लिखित जवाब में बताया कि 80,976 नमूनों की जांच की गई। इनमें से 656 नमूने दूषित पाए गए। प्रदूषण वाले 588 बिंदुओं पर कार्रवाई की गई है।
जल राज्य का विषय, केंद्र कर रहा सहयोग
मंत्री साहू ने स्पष्ट किया कि जल राज्य का विषय है। केंद्र सरकार परामर्श एवं अवसंरचना निधि के माध्यम से सहयोग करती है। राज्यों के प्रयासों में केंद्र की भागीदारी जारी रहेगी।
अमृत योजना के तहत शहरों में जल आपूर्ति में सुधार किया जा रहा है। इंदौर जैसे बड़े शहरों को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है।
आगे की कार्रवाई
इंदौर नगर निगम को पुरानी पाइपलाइनों को बदलने का निर्देश दिया गया है। नई परियोजनाओं के पूरा होने तक अस्थायी उपाय जारी रहेंगे। स्थानीय प्रशासन पानी की गुणवत्ता की नियमित जांच कर रहा है।
केंद्र सरकार की इस पहल से उम्मीद है कि भविष्य में ऐसी त्रासदी नहीं दोहराई जाएगी। जल आपूर्ति प्रणाली के आधुनिकीकरण से नागरिकों को स्वच्छ पानी मिल सकेगा।