इंदौर में दूषित पानी की सप्लाई को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। अदालत ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लेते हुए प्रशासनिक लापरवाही पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि शहर की खूबसूरती और स्वच्छता को बनाए रखना बेहद जरूरी है और इसमें किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
दूषित जल वितरण के मामले में सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने इसे प्रशासन की गंभीर लापरवाही करार दिया है। कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ नहीं किया जा सकता। इस मामले में जवाबदेही तय करते हुए हाईकोर्ट ने इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा और नगर निगम आयुक्त दिलीप कुमार यादव को नोटिस जारी किया है।
नगर निगम ने पेश की स्टेटस रिपोर्ट
सुनवाई के दौरान इंदौर नगर निगम की ओर से हाई कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट पेश की गई। निगम ने अदालत को बताया कि समस्या के समाधान के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। हालांकि, कोर्ट निगम के अब तक के प्रयासों और मौजूदा स्थिति को लेकर पूरी तरह संतुष्ट नजर नहीं आया और अधिकारियों से जवाब तलब किया है।
तीन याचिकाएं दाखिल
इस गंभीर मुद्दे को लेकर अब तक हाईकोर्ट में कुल तीन जनहित याचिकाएं दाखिल की जा चुकी हैं। इन याचिकाओं में शहर के विभिन्न इलाकों में गंदे पानी की सप्लाई और उससे फैल रही बीमारियों का हवाला दिया गया है। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से मांग की है कि प्रशासन को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए निर्देशित किया जाए।
प्रशासन पर बढ़ा दबाव
स्वच्छता में देशभर में नंबर वन रहने वाले इंदौर शहर में दूषित पानी की समस्या प्रशासन के लिए चुनौती बन गई है। हाईकोर्ट की इस सख्ती के बाद अब जिला प्रशासन और नगर निगम पर जल्द से जल्द व्यवस्था सुधारने का दबाव बढ़ गया है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि वह इस मामले की निगरानी जारी रखेगा।