देशभर में रंगों के उत्सव के बाद अब भाई-बहन के स्नेह का पर्व होली भाईदूज मनाया जाएगा। इस वर्ष 5 मार्च, गुरुवार को द्वितीया तिथि में सूर्योदय होने के कारण इसी दिन भाईदूज का पर्व मान्य रहेगा। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार यह तिथि शुभ मानी जा रही है, इसलिए बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक कर उनकी दीर्घायु और सुख-समृद्धि की कामना करेंगी।
पंचांग के मुताबिक चैत्र कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि 4 मार्च को शाम 4 बजकर 48 मिनट तक रहेगी। इसके पश्चात द्वितीया तिथि का आरंभ होगा, जो 5 मार्च को शाम 5 बजकर 3 मिनट तक प्रभावी रहेगी। चूंकि द्वितीया तिथि में ही सूर्योदय हो रहा है, इसलिए उदया तिथि के आधार पर 5 मार्च को ही भाईदूज मनाई जाएगी। परंपरा के अनुसार यह पूजन दोपहर काल में करना अधिक शुभ माना गया है, इसलिए दोपहर 12 बजे के बाद तिलक और पूजन की प्रक्रिया संपन्न करना श्रेष्ठ रहेगा।
तिलक करते समय दिशा का विशेष महत्व बताया गया है। वास्तु और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार भाई का मुख उत्तर या उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर होना चाहिए, जबकि बहन का मुख उत्तर-पूर्व या पूर्व दिशा की ओर रहे तो इसे अत्यंत शुभ फलदायी माना जाता है। सही दिशा में बैठकर तिलक करने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और भाई-बहन के रिश्ते में सौहार्द बढ़ता है।
विधि-विधान की बात करें तो बहनों को प्रयास करना चाहिए कि भाई को कुर्सी या सोफे पर बैठाने के बजाय जमीन पर चौक बनाकर उस पर आसन दिया जाए। चौक आटे या गोबर से बनाया जा सकता है, जो पवित्रता और शुभता का प्रतीक है। चौक इस प्रकार बनाया जाए कि बैठते समय भाई का चेहरा उत्तर या उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर रहे। चौक पर लकड़ी का पाटा रखकर भाई को बैठाया जाए और बहन स्वयं भी किसी आसन पर बैठकर विधिपूर्वक तिलक करें।
पूजन के दौरान बहनें पहले भाई के माथे पर रोली या चंदन से तिलक लगाएं, फिर उनके हाथ में कलावा बांधें। इसके बाद दीपक जलाकर आरती उतारें और मिठाई खिलाएं। अंत में भाई की लंबी आयु, उत्तम स्वास्थ्य और सफलता की कामना करें। कई स्थानों पर परंपरा है कि बहनें तिलक से पूर्व व्रत रखती हैं और भाई को तिलक करने के बाद ही भोजन ग्रहण करती हैं।
इस दिन कुछ विशेष सावधानियां भी रखनी चाहिए। भाई और बहन दोनों को काले रंग के वस्त्र पहनने से परहेज करना चाहिए, क्योंकि इसे अशुभ माना जाता है। पर्व के दिन आपसी विवाद या कटु वचन से बचें और प्रेम, सम्मान व सद्भाव बनाए रखें। यदि भाई कोई उपहार दे तो उसे आदरपूर्वक स्वीकार करें और आभार व्यक्त करें।
इस प्रकार होली के रंगों के बाद भाईदूज का यह पावन पर्व रिश्तों में मधुरता, विश्वास और स्नेह को और भी प्रगाढ़ करने का अवसर प्रदान करता है।