मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित भोजशाला को लेकर चल रहे कानूनी विवाद में अगली महत्वपूर्ण सुनवाई 16 फरवरी को हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में होगी। यह मामला लंबे समय से हिंदू और मुस्लिम पक्षों के बीच विवाद का केंद्र बना हुआ है।
क्या है भोजशाला विवाद?
भोजशाला धार जिले में स्थित एक ऐतिहासिक स्मारक है। हिंदू पक्ष इसे सरस्वती मंदिर मानता है। वहीं मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने इसे संरक्षित स्मारक घोषित कर रखा है।
मौजूदा व्यवस्था के तहत मंगलवार को हिंदू पक्ष को पूजा की अनुमति है। शुक्रवार को मुस्लिम पक्ष को नमाज पढ़ने का अधिकार दिया गया है। हालांकि दोनों पक्ष पूर्ण अधिकार की मांग करते रहे हैं।
हाईकोर्ट में क्या है याचिका?
इस मामले में कई याचिकाएं हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में दायर हैं। हिंदू पक्ष की ओर से भोजशाला में नियमित पूजा-अर्चना की अनुमति की मांग की गई है। मुस्लिम पक्ष ने भी अपने अधिकारों को बरकरार रखने की याचिका दाखिल की है।
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अगली तारीख 16 फरवरी तय की है। इस सुनवाई में अहम फैसले आने की संभावना जताई जा रही है।
पृष्ठभूमि
भोजशाला विवाद दशकों पुराना है। राजा भोज ने इस संरचना का निर्माण कराया था। बाद में इसका स्वरूप बदला गया। इतिहासकारों के बीच भी इसके मूल स्वरूप को लेकर मतभेद हैं।
पिछले कुछ वर्षों में यह विवाद तेज हुआ है। विभिन्न हिंदू संगठनों ने भोजशाला पर पूर्ण अधिकार की मांग को लेकर आंदोलन चलाए हैं। वहीं मुस्लिम पक्ष ने भी कानूनी लड़ाई जारी रखी है।
सुनवाई पर सबकी नजर
16 फरवरी की सुनवाई को लेकर दोनों पक्षों में उत्सुकता है। हिंदू संगठनों ने कहा है कि वे अदालत के फैसले का सम्मान करेंगे। मुस्लिम पक्ष ने भी न्यायालय की प्रक्रिया पर भरोसा जताया है।
प्रशासन ने भी सुनवाई के मद्देनजर सतर्कता बरतने के संकेत दिए हैं। धार जिले में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन सक्रिय है।
इस मामले का फैसला न सिर्फ धार बल्कि पूरे मध्य प्रदेश और देशभर में चर्चा का विषय बन सकता है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अदालत का रुख इस विवाद की दिशा तय करेगा।