एमपी में आउटसोर्स कर्मचारियों का बवाल, 30 हजार स्वास्थ्यकर्मी हड़ताल पर, जेपी अस्पताल में प्रदर्शन से स्वास्थ्य सेवाएं हुई प्रभावित

मध्य प्रदेश में आउटसोर्स व्यवस्था के तहत काम कर रहे करीब 30 हजार स्वास्थ्यकर्मी हड़ताल पर चले गए हैं। इसका सबसे ज्यादा असर भोपाल में दिखाई दे रहा है, जहां सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों में कई नियमित काम धीमे पड़ गए हैं। जिन सेवाओं में बड़ी संख्या में आउटसोर्स स्टाफ तैनात रहता है, वहां मरीजों को इंतजार और प्रक्रिया में देरी का सामना करना पड़ रहा है।

राजधानी के साथ अन्य जिलों में भी स्वास्थ्य विभाग की रोजमर्रा की गतिविधियां प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। अस्पताल प्रबंधन स्तर पर ड्यूटी मैनेजमेंट, काउंटर संचालन, रिकॉर्ड अपडेट और मरीजों के सहयोग से जुड़े कामों में दबाव बढ़ गया है। विभागीय अधिकारियों ने जरूरत वाले हिस्सों में तदर्थ व्यवस्था बनाने की कोशिश शुरू की है, ताकि जरूरी सेवाएं पूरी तरह न ठप हों।

हड़ताल के कारण अस्पतालों में कामकाज का भार स्थायी और उपलब्ध नियमित कर्मचारियों पर शिफ्ट हुआ है। इससे कई संस्थानों में कार्य की गति सामान्य दिनों की तुलना में कम हो गई है। स्वास्थ्य सेवाओं के संवेदनशील स्वरूप को देखते हुए जिला और अस्पताल प्रशासन ने प्राथमिक सेवाओं को प्राथमिकता पर बनाए रखने की रणनीति अपनाई है।

आउटसोर्स कर्मियों की अनुपस्थिति से परिचालन पर असर

स्वास्थ्य ढांचे में आउटसोर्स मानवबल का उपयोग पिछले कुछ वर्षों में बढ़ा है। कई संस्थानों में सहायता श्रेणी के काम, मरीज मार्गदर्शन, तकनीकी सहयोग और डेटा से जुड़े कार्य इसी व्यवस्था पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में एक साथ बड़ी संख्या में कर्मियों के काम से हटने का असर सीधे संस्थागत संचालन पर पड़ना स्वाभाविक माना जा रहा है।

भोपाल के अस्पतालों में पंजीयन, दस्तावेजीकरण और अन्य सहयोगी गतिविधियों की गति प्रभावित होने की बात सामने आई है। कई जगह मरीजों की कतारों में बढ़ोतरी दर्ज की गई। स्वास्थ्य विभाग के स्थानीय अधिकारियों ने कहा कि सेवाएं जारी रखने के लिए उपलब्ध स्टाफ की पुनर्संरचना की जा रही है और जरूरी इकाइयों में प्राथमिकता के आधार पर तैनाती की जा रही है।

मांगों पर निर्णय की प्रतीक्षा, प्रशासन ने बनाई वैकल्पिक योजना

हड़ताल कर रहे कर्मचारी अपनी लंबित मांगों पर स्पष्ट निर्णय चाहते हैं। कर्मचारी पक्ष का कहना है कि सेवा शर्तें, भुगतान और कामकाजी सुरक्षा जैसे मुद्दों पर लंबे समय से समाधान लंबित है। दूसरी ओर प्रशासनिक स्तर पर यह संकेत दिए गए हैं कि आवश्यक सेवाएं बाधित न हों, इसके लिए अंतरिम प्रबंध जारी रहेंगे और बातचीत का रास्ता खुला रखा जाएगा।

सरकारी तंत्र के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि स्वास्थ्य सेवाएं एक साथ कई स्तरों पर चलती हैं और इनमें सहायक स्टाफ की भूमिका लगातार बढ़ी है। इसलिए हड़ताल का असर केवल एक विभाग तक सीमित नहीं रहता, बल्कि अस्पतालों की कुल क्षमता और रोजाना मरीज निपटान पर भी पड़ता है।

फिलहाल स्थिति यह है कि मरीजों की संख्या बनी हुई है और मानवबल का संतुलन बिगड़ने से संस्थानों को कार्यप्रवाह दोबारा व्यवस्थित करना पड़ रहा है। आने वाले दिनों में बातचीत की प्रगति और हड़ताल की अवधि यह तय करेगी कि सेवा प्रभावित रहने का दायरा कितना बढ़ता है।

स्वास्थ्य प्रशासन ने आम लोगों से अपील की है कि वे अस्पतालों में आवश्यक दस्तावेज साथ लेकर जाएं और समय का अतिरिक्त अनुमान रखें। वहीं कर्मचारी पक्ष ने संकेत दिए हैं कि मांगों पर ठोस पहल होने तक आंदोलन जारी रखा जाएगा।