भोपाल में बिना पर्ची बिक रहीं एंटीबायोटिक, 3 करोड़ का रोजाना कारोबार, जानलेवा एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस का खतरा बढ़ा

भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में जीवन रक्षक मानी जाने वाली एंटीबायोटिक दवाएं बिना किसी डॉक्टरी सलाह या पर्ची के आसानी से उपलब्ध हैं। शहर के लगभग 3500 मेडिकल स्टोर्स पर नियमों की अनदेखी करते हुए रोजाना करीब तीन करोड़ रुपये की एंटीबायोटिक बेची जा रही हैं। इस खुली बिक्री ने एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) के खतरे को बढ़ा दिया है, एक ऐसी स्थिति जहां बैक्टीरिया पर दवाएं बेअसर हो जाती हैं।

एक पड़ताल में यह बात सामने आई कि शहर के कई दवा विक्रेता बिना किसी हिचक के शेड्यूल H और H1 जैसी प्रतिबंधित दवाओं को बेच रहे हैं। टीम ने जब एजिथ्रोमाइसिन 500 जैसी एंटीबायोटिक खरीदने की कोशिश की, तो ज्यादातर दुकानों पर यह बिना पर्ची के आसानी से मिल गई। यह स्थिति दवा बिक्री के लिए बने ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट का सीधा उल्लंघन है।

कागजों में कैद नियम, हकीकत में खुली छूट

नियमों के अनुसार, शेड्यूल H और H1 में शामिल एंटीबायोटिक दवाओं को बेचने के लिए डॉक्टर की पर्ची अनिवार्य है। इसके अलावा, दवा विक्रेता को पर्ची देने वाले डॉक्टर, मरीज का नाम और पते का पूरा रिकॉर्ड रखना होता है, जिसे कम से कम तीन साल तक संभालना जरूरी है। लेकिन भोपाल में यह नियम सिर्फ कागजों तक सीमित नजर आ रहा है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) की जिम्मेदारी इन नियमों का पालन सुनिश्चित कराना है, लेकिन 3500 दुकानों पर नजर रखने के लिए विभाग के पास मात्र सात ड्रग इंस्पेक्टर हैं, जो इस अवैध कारोबार को रोकने में नाकाफी साबित हो रहे हैं।

क्यों खतरनाक है एंटीबायोटिक का गलत इस्तेमाल?

एंटीबायोटिक का अंधाधुंध उपयोग बैक्टीरिया को इन दवाओं के खिलाफ लड़ने की क्षमता प्रदान करता है, जिसे एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) कहते हैं। इसके कारण सामान्य संक्रमण भी जानलेवा हो सकते हैं क्योंकि उन पर दवाएं काम करना बंद कर देती हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, 2050 तक दुनिया भर में AMR के कारण हर साल एक करोड़ लोगों की मौत होने की आशंका है। भारत में पहले से ही ड्रग-रेजिस्टेंट बैक्टीरिया से होने वाले सेप्सिस के कारण सालाना 58,000 नवजात शिशुओं की मौत हो जाती है।

“लोग सर्दी-खांसी जैसे वायरल संक्रमण में भी एंटीबायोटिक ले लेते हैं, जिसकी कोई जरूरत नहीं होती। आसानी से दवा मिलने के कारण इसका दुरुपयोग बढ़ा है, जिससे kháng khuẩn प्रतिरोध की क्षमता विकसित हो रही है। इन दवाओं के लिए पर्ची अनिवार्य है।” — डॉ. पराग शर्मा, शिशु रोग विशेषज्ञ

प्रशासन का दावा और कार्रवाई

इस गंभीर मुद्दे पर खाद्य एवं औषधि प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि वे समय-समय पर निरीक्षण करते हैं और कार्रवाई भी की जाती है। विभाग का दावा है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले कई मेडिकल स्टोर्स के लाइसेंस निलंबित या रद्द किए गए हैं।

“हम लगातार निरीक्षण करते हैं और जहां भी गड़बड़ी मिलती है, कार्रवाई की जाती है। हाल ही में कई लाइसेंस निलंबित और निरस्त किए गए हैं। अगर किसी को बिना पर्ची के दवा दी जाती है, तो वे शिकायत कर सकते हैं। हम सख्त कार्रवाई करेंगे।” — शोभित कोस्टा, संयुक्त संचालक, खाद्य एवं औषधि प्रशासन

हालांकि, प्रशासनिक दावों के बावजूद जमीनी हकीकत चिंताजनक है। बिना पर्ची के दवाओं की बिक्री यह दर्शाती है कि नियमों का पालन करवाने में बड़ी चूक हो रही है, जिसका खामियाजा समाज को एक बड़े स्वास्थ्य संकट के रूप में भुगतना पड़ सकता है।