उमंग सिंघार मानहानि मामला, भोपाल कोर्ट ने कांग्रेस नेता नरेंद्र सलूजा और संगीता शर्मा को भेजा नोटिस

मध्य प्रदेश में कांग्रेस की आंतरिक कलह अब अदालत तक पहुंच गई है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार द्वारा दायर एक आपराधिक मानहानि मामले में भोपाल की सांसद-विधायक (MP-MLA) विशेष अदालत ने कांग्रेस के प्रदेश सचिव व मीडिया अध्यक्ष नरेंद्र सलूजा और प्रदेश प्रवक्ता संगीता शर्मा को नोटिस जारी किया है।

न्यायाधीश विधान माहेश्वरी की अदालत ने दोनों नेताओं को समन जारी करते हुए 26 जुलाई को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है। यह मामला एक प्रेस कॉन्फ्रेंस से जुड़ा है, जिसमें सिंघार पर गंभीर आरोप लगाए गए थे।

क्या है पूरा मामला?

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने अपने वकील एहतेशाम हाशमी के माध्यम से भोपाल की विशेष अदालत में नरेंद्र सलूजा और संगीता शर्मा के खिलाफ आपराधिक मानहानि का परिवाद दायर किया था। याचिका में कहा गया है कि दोनों नेताओं ने 10 मई को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर सिंघार के खिलाफ झूठे, निराधार और अपमानजनक आरोप लगाए थे।

सिंघार का आरोप है कि इस प्रेस कॉन्फ्रेंस का उद्देश्य उनकी राजनीतिक और सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना था। उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष एक संवैधानिक पद है और इस तरह के झूठे आरोप उनकी छवि को धूमिल करते हैं।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगाए थे गंभीर आरोप

याचिका के अनुसार, 10 मई की प्रेस कॉन्फ्रेंस में सलूजा और शर्मा ने उमंग सिंघार को एक महिला की आत्महत्या के पुराने मामले में घसीटने की कोशिश की। उन्होंने कथित तौर पर कहा कि सिंघार के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज है। सिंघार के वकील ने अदालत में तर्क दिया कि ये बयान पूरी तरह से मानहानिकारक थे और जानबूझकर उनकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने के लिए दिए गए थे।

इस मामले में सबूत के तौर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस की वीडियो रिकॉर्डिंग, समाचार पत्रों की कटिंग और अन्य दस्तावेज भी अदालत में पेश किए गए।

पहले भेजा था कानूनी नोटिस

अदालत का दरवाजा खटखटाने से पहले उमंग सिंघार ने दोनों नेताओं को कानूनी नोटिस भेजा था। इस नोटिस में उन्होंने मांग की थी कि सलूजा और शर्मा अपने बयानों के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगें। हालांकि, नोटिस का कोई जवाब नहीं मिलने और माफी नहीं मांगने पर सिंघार ने अदालत में आपराधिक मानहानि का मामला दायर करने का फैसला किया।

अदालत ने प्रथम दृष्टया माना मामला

विशेष न्यायाधीश विधान माहेश्वरी ने मामले की सुनवाई के बाद पाया कि प्रथम दृष्टया मानहानि का मामला बनता है। अदालत ने पेश किए गए सबूतों और दलीलों पर विचार करने के बाद भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 500 के तहत मामला दर्ज किया और दोनों आरोपियों को समन जारी कर तलब किया। अब इस मामले की अगली सुनवाई 26 जुलाई को होगी, जिसमें सलूजा और शर्मा को अदालत के समक्ष उपस्थित होना होगा।

यह मामला कांग्रेस पार्टी के भीतर चल रहे मतभेदों को भी उजागर करता है, जहां नेता प्रतिपक्ष ने अपनी ही पार्टी के पदाधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का रास्ता चुना है।