भोपाल: फ्री फायर में ‘प्रो’ दिखने का दबाव, नेशनल स्केटर छात्र ने दादा के 28 हजार गंवाने के बाद फांसी लगाई

Bhopal News: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में ऑनलाइन गेमिंग के जानलेवा दबाव ने एक और परिवार की खुशियां छीन लीं। पिपलानी इलाके में रहने वाले 14 साल के अंश साहू ने फांसी लगाकर अपनी जान दे दी।
अंश न सिर्फ पढ़ाई में टॉपर था, बल्कि स्केटिंग में राष्ट्रीय स्तर का गोल्ड मेडलिस्ट भी था। इस दर्दनाक कदम के पीछे की वजह ‘फ्री फायर’ गेम की लत और उसमें ‘प्रो’ दिखने का सामाजिक दबाव बताया जा रहा है।
यह घटना बच्चों पर ऑनलाइन गेमिंग के बढ़ते खतरनाक प्रभाव को एक बार फिर उजागर करती है, जहां वर्चुअल दुनिया का रुतबा असल जिंदगी पर भारी पड़ रहा है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
दादा के खाते से उड़ाए थे 28 हजार
अंश के मामा भोला साहू ने बताया कि कुछ महीने पहले अंश ने अपने दादा के मोबाइल से उनके बैंक खाते से करीब 28 हजार रुपए निकाल लिए थे। जब परिवार को इसका पता चला तो बैंक स्टेटमेंट से खुलासा हुआ कि सारी रकम ‘फ्री फायर’ गेम में वर्चुअल हथियार और स्किन खरीदने पर खर्च हुई थी।
परिवार के अनुसार, उस समय अंश को डांटने-फटकारने के बजाय प्यार से समझाया गया था। इसके बाद उसकी मोबाइल की आदत पर लगाम लगाने के लिए फोन भी ले लिया गया था। परिवार को लगा कि मामला संभल गया है, क्योंकि अंश का व्यवहार बिल्कुल सामान्य था और उसने दोबारा मोबाइल इस्तेमाल नहीं किया।

“यह गेम बच्चों को लगातार यह अहसास देता है कि अगर आप ज्यादा पैसा खर्च करेंगे तो आप ज्यादा ‘प्रो’ दिखेंगे। बेहतर गन, बेहतर स्किन और ज्यादा ताकत, यही इस गेम की दुनिया है।” — भोला साहू, अंश के मामा

‘प्रो’ दिखने की होड़ और जानलेवा दबाव
ऑनलाइन गेमिंग की दुनिया के जानकारों का कहना है कि ‘फ्री फायर’ जैसे गेम्स में जीतने से ज्यादा बेहतर दिखने की होड़ होती है। खिलाड़ी पर हर समय अपने कैरेक्टर को अपग्रेड करने, चमकदार हथियार और महंगी स्किन खरीदने का मानसिक दबाव रहता है। अगर किसी खिलाड़ी के पास पैसे नहीं होते तो उसे बेचैनी होने लगती है, जो धीरे-धीरे नशे का रूप ले लेती है। बच्चे यह नहीं समझ पाते कि वर्चुअल दुनिया का रुतबा असल जिंदगी से बिल्कुल अलग है।
घटना वाले दिन क्या हुआ था?
घटना के दिन अंश का परिवार नाना की तेरहवीं के कार्यक्रम में शामिल होने गया था। अंश भी वहीं मौजूद था, लेकिन कुछ देर बाद वह नहाने और कपड़े बदलने की बात कहकर घर लौट आया। घर पर उसने अपनी मां का मोबाइल लिया और गेम खेलने लगा। जब कुछ देर बाद परिवार के लोग घर वापस लौटे तो अंश का कमरा अंदर से बंद था। दरवाजा तोड़ने पर वह फंदे पर लटका मिला।
होनहार छात्र और गोल्ड मेडलिस्ट था अंश
अंश सिर्फ गेम खेलने वाला बच्चा नहीं था, बल्कि एक बेहद होनहार और अनुशासित छात्र था। वह पढ़ाई में हमेशा अव्वल आता था और स्केटिंग में राष्ट्रीय स्तर पर कई गोल्ड मेडल जीत चुका था। परिवार का कहना है कि वह एक शांत और समझदार बच्चा था और माता-पिता के साथ उसके संबंध भी बहुत अच्छे थे। मोबाइल को लेकर घर में कभी कोई बड़ा विवाद या झगड़ा नहीं हुआ था, इसलिए परिवार को किसी अनहोनी का अंदेशा तक नहीं था।