भोपाल में ‘न्याय यात्रा’ को लेकर स्वास्थ्य कर्मियों का प्रदर्शन, सीएम हाउस की ओर बढ़ने की तैयारी, रास्तों पर भारी पुलिस बल तैनात

भोपाल में आउटसोर्स स्वास्थ्यकर्मियों ने 2026 कॉन्ट्रैक्ट से जुड़े मुद्दे पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन की शुरुआत जेपी अस्पताल क्षेत्र से हुई। इसके बाद कर्मचारियों ने सीएम हाउस की ओर कूच की कोशिश की। पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था के तहत उन्हें रास्ते में रोक दिया।

प्रदर्शन में शामिल कर्मचारियों ने कहा कि कॉन्ट्रैक्ट व्यवस्था से जुड़े निर्णयों का सीधा असर उनकी सेवा शर्तों पर पड़ता है। इसी मुद्दे को लेकर बड़ी संख्या में कर्मचारी एकजुट होकर राजधानी में पहुंचे। उन्होंने प्रशासन तक अपनी बात पहुंचाने की मांग की।

मौके पर पुलिस बल तैनात रहा। सीएम हाउस की ओर जाने वाले मार्ग पर बैरिकेडिंग की गई। प्रदर्शनकारियों को निर्धारित दायरे से आगे जाने की अनुमति नहीं दी गई। इसके बाद कुछ समय तक नारेबाजी और विरोध जारी रहा।

जेपी अस्पताल से शुरू हुआ विरोध

आंदोलन का केंद्र जेपी अस्पताल परिसर और उसके आसपास का इलाका रहा। यहां से कर्मचारी समूहों में निकले और रैली के रूप में आगे बढ़े। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि कॉन्ट्रैक्ट से जुड़े फैसलों पर स्पष्टता जरूरी है।

कर्मचारियों ने यह भी कहा कि आउटसोर्स व्यवस्था में कार्यरत स्टाफ स्वास्थ्य सेवाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए नीति संबंधी निर्णय लेते समय जमीनी स्तर पर काम कर रहे कर्मचारियों की स्थिति पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

सीएम हाउस कूच के दौरान पुलिस की रोक

सीएम हाउस की ओर मार्च के दौरान पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से रैली को रोका। इस दौरान कर्मचारी और पुलिस आमने-सामने रहे, लेकिन स्थिति नियंत्रण में रही। पुलिस ने भीड़ को निर्धारित क्षेत्र में रहने के निर्देश दिए।

प्रदर्शन के दौरान 2026 कॉन्ट्रैक्ट मुद्दे को लेकर कर्मचारियों ने अपनी मांगों पर जोर दिया। आंदोलनकारी चाहते हैं कि सेवा शर्तों और कार्य निरंतरता को लेकर स्पष्ट और लिखित व्यवस्था सामने आए।

इस विरोध ने एक बार फिर राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं में आउटसोर्स मॉडल पर बहस को तेज किया है। जिला और शहरी अस्पतालों में बड़ी संख्या में कर्मचारी इसी व्यवस्था के तहत काम करते हैं। ऐसे में किसी भी कॉन्ट्रैक्ट बदलाव का असर व्यापक स्तर पर पड़ता है।

प्रशासनिक प्रतिक्रिया का इंतजार

प्रदर्शन के बाद कर्मचारियों की ओर से प्रशासन तक मांगें पहुंचाने की कोशिश की गई। देर शाम तक औपचारिक समाधान की स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई। कर्मचारियों ने संकेत दिया कि मांगों पर निर्णय नहीं हुआ तो आगे की रणनीति तय की जाएगी।

फिलहाल राजधानी में हुए इस प्रदर्शन ने स्वास्थ्य विभाग, आउटसोर्स एजेंसियों और सरकार के बीच समन्वय की जरूरत को रेखांकित किया है। कर्मचारी पक्ष 2026 कॉन्ट्रैक्ट मुद्दे पर ठोस निर्णय चाहता है, जबकि प्रशासन कानून-व्यवस्था और प्रक्रियात्मक ढांचे के भीतर समाधान पर जोर दे रहा है।

भोपाल की इस घटना के बाद राज्य स्तर पर आउटसोर्स स्वास्थ्यकर्मियों के मुद्दे फिर प्रमुखता से उठे हैं। आने वाले दिनों में सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच संवाद की दिशा इस मामले की आगे की स्थिति तय करेगी।