राजधानी भोपाल में हवा बेहद खराब, NGT ने वायु प्रदूषण पर सरकार से जवाब मांगा

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की सेंट्रल जोन बेंच, भोपाल ने मध्यप्रदेश के आठ प्रमुख शहरों में लगातार बढ़ रहे वायु प्रदूषण पर गंभीर चिंता जताई है। भोपाल और इंदौर सहित इन शहरों में खराब होती हवा को लेकर एनजीटी ने राज्य सरकार को आठ सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। ट्रिब्यूनल ने माना कि भोपाल की वायु गुणवत्ता तय मानकों से काफी नीचे चली गई है और AQI बहुत खराब से लेकर गंभीर श्रेणी तक पहुंच चुका है, जो पर्यावरण और जनस्वास्थ्य दोनों के लिए बड़ा खतरा है।

‘नॉन-अटेनमेंट सिटी’ घोषित किए गए शहर

आवेदक राशिद नूर खान की याचिका पर सुनवाई करते हुए एनजीटी ने कहा कि भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन, देवास, सागर और सिंगरौली को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने ‘नॉन-अटेनमेंट सिटी’ की श्रेणी में रखा है। इसका कारण यह है कि इन शहरों में पिछले पांच वर्षों से अधिक समय से PM₁₀ और PM₂.₅ जैसे प्रदूषकों का स्तर राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानकों से लगातार ऊपर बना हुआ है।

भोपाल में प्रदूषण के आंकड़े चिंताजनक

एनजीटी के अनुसार, भोपाल में PM₁₀ का वार्षिक औसत स्तर 130 से 190 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर और PM₂.₅ का स्तर 80 से 100 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक दर्ज किया गया है। ये आंकड़े निर्धारित सीमा से कई गुना अधिक हैं और सीधे तौर पर लोगों के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहे हैं।

झीलों की नगरी में धुंध और खराब दृश्यता

आदेश में यह भी उल्लेख किया गया कि ‘झीलों की नगरी’ कहे जाने वाले भोपाल में सर्दियों के दौरान लगातार धुंध, कम दृश्यता और बेहद खराब से गंभीर श्रेणी का AQI देखने को मिल रहा है। रियल-टाइम डेटा के अनुसार कई रातों में AQI 300 के पार चला गया, जो स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है।

प्रदूषण के पीछे कई कारण जिम्मेदार

एनजीटी ने स्पष्ट किया कि वायु प्रदूषण किसी एक वजह से नहीं, बल्कि कई कारकों के संयुक्त प्रभाव का नतीजा है। इनमें पराली जलाना, निर्माण और विध्वंस कार्यों से उड़ने वाली धूल, वाहनों से निकलने वाला धुआं, खुले में कचरा जलाना, लैंडफिल साइटों में आग, पटाखों का उपयोग और औद्योगिक गतिविधियां प्रमुख हैं।

राज्य में प्रभावी नियंत्रण तंत्र की कमी

ट्रिब्यूनल ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिल्ली-एनसीआर के लिए अपनाए गए ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) और एयर-शेड आधारित नीति के बावजूद मध्यप्रदेश में अब तक ऐसा कोई प्रभावी राज्यस्तरीय तंत्र लागू नहीं किया गया है। इसी वजह से वायु प्रदूषण की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है।

ज्वाइंट कमेटी गठित, 6 सप्ताह में रिपोर्ट देने के निर्देश

मामले की गंभीरता को देखते हुए एनजीटी ने राज्य सरकार और संबंधित विभागों को नोटिस जारी किया है। इसके साथ ही एक संयुक्त समिति का गठन किया गया है, जिसमें पर्यावरण विभाग, नगरीय प्रशासन, परिवहन विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, इप्को के प्रतिनिधि और सीपीसीबी के पूर्व अतिरिक्त निदेशक डॉ. रवि प्रकाश मिश्रा को शामिल किया गया है। समिति को छह सप्ताह के भीतर स्थिति का आकलन कर की गई कार्रवाइयों सहित तथ्यात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोडल एजेंसी बनाया गया है। मामले की अगली सुनवाई 18 मार्च को निर्धारित की गई है।