तेहरान/नई दिल्ली: अमेरिका और इजराइल के साथ भीषण सैन्य संघर्ष का सामना कर रहे ईरान ने एक ऐसा कदम उठाया है, जिससे भारत समेत दुनिया के कई देशों को बड़ी राहत मिली है। ईरान ने गुरुवार को घोषणा की कि उसने सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) के रास्ते को अपने ‘मित्र देशों’ के लिए खोल दिया है। इस सूची में भारत का नाम प्रमुखता से शामिल है।
ट्रंप का प्रस्ताव खारिज, लेकिन ऊर्जा मार्ग पर नरमी
ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भेजे गए 15 सूत्रीय शांति प्रस्ताव को ‘मजाक’ करार देते हुए खारिज कर दिया है। इसके बाद युद्ध और तेज होने की आशंकाओं के बीच ईरान का यह फैसला वैश्विक ऊर्जा संकट को कम करने की दिशा में बड़ा माना जा रहा है। विशेष रूप से भारत के लिए यह खबर इसलिए अहम है क्योंकि रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने 2018 के बाद पहली बार ईरान से एलपीजी (LPG) कार्गो खरीदा है।
इन 5 देशों के लिए खुले ‘हॉर्मुज’ के दरवाजे
मुंबई स्थित ईरानी दूतावास के माध्यम से जारी बयान में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने स्पष्ट किया कि निम्नलिखित देशों के जहाजों को इस मार्ग से सुरक्षित ट्रांजिट की अनुमति दी गई है:
भारत
चीन
रूस
इराक
पाकिस्तान
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी वैश्विक अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए इस समुद्री मार्ग को खुला रखने की अपील की थी। ज्ञात हो कि दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल इसी संकरे मार्ग से होकर गुजरता है।
भारत के लिए क्यों है यह संजीवनी?
ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमलों को लगभग चार हफ्ते बीत चुके हैं, जिससे ऊर्जा आपूर्ति बाधित हो गई थी। भारत में पिछले कुछ दिनों से पेट्रोल-डीजल की कीमतों में उछाल और एलपीजी की किल्लत देखी जा रही है। ऐसे में ईरान से सीधे गैस आयात और हॉर्मुज मार्ग के खुलने से भारतीय बाजारों में आपूर्ति व्यवस्था को आंशिक रूप से स्थिर करने में मदद मिलेगी।
यह कूटनीतिक जीत भारत की उस तटस्थ और संतुलित विदेश नीति का परिणाम मानी जा रही है, जिसके कारण युद्धरत देशों के बीच भी भारत के हितों को सुरक्षित रखा जा सका है।