नई दिल्ली। बिहार विधानसभा चुनाव 2020 की मतगणना के दौरान देर शाम राजनीतिक घमासान तेज हो गया, जब कांग्रेस पार्टी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चुनाव आयोग (EC) पर गंभीर आरोप लगाए। कांग्रेस ने दावा किया कि मतगणना प्रक्रिया को जानबूझकर धीमा किया जा रहा है ताकि महागठबंधन के पक्ष में आए जनादेश को ‘हाईजैक’ किया जा सके।
यह आरोप उस समय लगाए गए जब राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) और महागठबंधन के बीच कांटे की टक्कर चल रही थी और अंतिम नतीजों का बेसब्री से इंतजार किया जा रहा था। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं रणदीप सुरजे और अभिषेक मनु सिंघवी ने मीडिया के सामने आकर अपनी बात रखी।
जीती हुई सीटों पर सर्टिफिकेट नहीं देने का आरोप
कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने दावा किया कि महागठबंधन 119 सीटों पर जीत दर्ज कर चुका, लेकिन कई स्थानों पर रिटर्निंग ऑफिसर विजयी उम्मीदवारों को प्रमाण पत्र जारी नहीं कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यालय के दबाव में हो रहा।
“हमारे उम्मीदवार जीत गए हैं, टीवी चैनल दिखा रहे हैं, लेकिन अधिकारी उन्हें सर्टिफिकेट देने से मना कर रहे हैं। वे कह रहे हैं कि आप हार गए हैं। यह लोकतंत्र के लिए एक काला दिन है।” — रणदीप सुरजेवाला
सुरजेवाला ने आगे कहा कि कुछ सीटों पर जहां महागठबंधन के उम्मीदवार मामूली अंतर से जीते हैं, वहां जानबूझकर नतीजों को रोका जा रहा है।
‘PM मोदी और BJP पर सीधा हमला’
कांग्रेस ने इन आरोपों के लिए सीधे तौर पर प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा को जिम्मेदार ठहराया। पार्टी ने कहा कि बिहार की जनता ने बदलाव के लिए वोट दिया है, लेकिन केंद्र सरकार सत्ता का दुरुपयोग कर जनादेश को पलटने की साजिश कर रही है।
वरिष्ठ वकील और कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, “यह एक अभूतपूर्व स्थिति है। हमने पहले कभी ऐसा नहीं देखा कि जीते हुए उम्मीदवारों को उनके अधिकार से वंचित किया जा रहा हो। यह बिहार के लोगों के साथ धोखा।
चुनाव आयोग की भूमिका पर उठाए सवाल
कांग्रेस नेताओं ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आयोग को स्वतंत्र रूप से काम करना चाहिए, लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि वह सरकारी दबाव में है। पार्टी ने घोषणा की कि उनका एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही चुनाव आयोग से मिलकर इस मामले में औपचारिक शिकायत दर्ज कराएगा।
कांग्रेस ने मांग की कि चुनाव आयोग तुरंत हस्तक्षेप करे और सुनिश्चित करे कि सभी विजयी उम्मीदवारों को बिना किसी देरी के प्रमाण पत्र जारी किए जाएं।
चुनाव आयोग ने दिया था स्पष्टीकरण
हालांकि, कांग्रेस के आरोपों से पहले ही चुनाव आयोग ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मतगणना में हो रही देरी पर स्पष्टीकरण दिया था। आयोग ने बताया था कि कोविड-19 महामारी के कारण इस बार मतदान केंद्रों की संख्या लगभग 63% बढ़ाई गई थी, जिसके चलते ईवीएम की संख्या भी बढ़ी है। इसी वजह से मतगणना प्रक्रिया में सामान्य से अधिक समय लग रहा है। आयोग ने किसी भी तरह के दबाव या गड़बड़ी के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बताया था।