भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपने संगठनात्मक ढांचे में एक महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए नितिन नबीन को राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष नियुक्त किया है। पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने इस नियुक्ति पर मुहर लगाई है। नितिन नबीन वर्तमान में बिहार सरकार में शहरी विकास और आवास मंत्री हैं और पटना की बांकीपुर सीट से विधायक हैं। इस नई जिम्मेदारी के साथ ही वे अब देश की सबसे अमीर राजनीतिक पार्टी के वित्त प्रबंधन का कार्यभार संभालेंगे।
नितिन नबीन अब राजेश अग्रवाल की जगह लेंगे, जो पिछले कई वर्षों से इस पद पर कार्यरत थे। यह पद भाजपा के संगठन में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि पार्टी का आर्थिक तंत्र विशाल और जटिल है। नबीन इससे पहले छत्तीसगढ़ भाजपा के सह-प्रभारी के रूप में अपनी संगठनात्मक क्षमता साबित कर चुके हैं, जहां पार्टी ने विधानसभा चुनावों में बड़ी जीत हासिल की थी।
10 हजार करोड़ का फंड और विशाल नेटवर्क
भाजपा वर्तमान में देश की सबसे धनवान राजनीतिक पार्टी है। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) और पार्टी द्वारा चुनाव आयोग को दी गई जानकारी के मुताबिक, भाजपा के पास हजारों करोड़ रुपये की घोषित संपत्ति है। रिपोर्ट्स के अनुसार, पार्टी के खातों और विभिन्न संपत्तियों का कुल मूल्य 10 हजार करोड़ रुपये के आसपास आंका जाता है।
नितिन नबीन अब पार्टी के इस विशाल खजाने के कस्टोडियन होंगे। उनके जिम्मे देश के 772 संगठनात्मक जिलों में फैले पार्टी के कार्यालयों और संपत्तियों की देखरेख होगी। भाजपा ने पिछले कुछ वर्षों में लगभग हर जिले में अपना आधुनिक कार्यालय तैयार किया है, जिसका प्रबंधन केंद्रीय स्तर से ही मॉनिटर किया जाता है।
जीरो सैलरी और एफडी सिस्टम
भाजपा में राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष का पद पूरी तरह से मानद (honorary) होता है। इसका अर्थ है कि इतनी बड़ी जिम्मेदारी संभालने के बदले नितिन नबीन को पार्टी से कोई वेतन नहीं मिलेगा। वे ‘जीरो सैलरी’ पर काम करेंगे। पार्टी का पूरा वित्तीय ढांचा एक कॉर्पोरेट सिस्टम की तरह काम करता है, लेकिन इसे चलाने वाले पदाधिकारी सेवा भाव से कार्य करते हैं।
पार्टी के खर्चों को चलाने के लिए एक विशेष ‘एफडी सिस्टम’ (Fixed Deposit System) तैयार किया गया है। भाजपा ने आजीवन सहयोग निधि और अन्य चंदे से प्राप्त राशि का बड़ा हिस्सा फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश किया है। इन एफडी से मिलने वाले ब्याज से ही जिला कार्यालयों और केंद्रीय मुख्यालय के दैनिक खर्च, स्टाफ की सैलरी और रखरखाव का काम होता है। इस सिस्टम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पार्टी का नियमित खर्च चंदे के उतार-चढ़ाव से प्रभावित न हो।
नितिन नबीन का सियासी सफर
नितिन नबीन का राजनीतिक कद पार्टी में लगातार बढ़ा है। वे पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट से लगातार चार बार विधायक चुने गए हैं। उनके पिता, नवीन किशोर सिन्हा भी भाजपा के कद्दावर नेता थे और जनसंघ के समय से पार्टी से जुड़े थे। पिता के निधन के बाद नितिन नबीन ने उनकी विरासत को संभाला।
नबीन ने भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के राष्ट्रीय महासचिव के रूप में भी कार्य किया है। छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान उन्हें प्रदेश का सह-प्रभारी बनाया गया था। वहां पार्टी की रणनीति बनाने और उसे जमीन पर उतारने में उनकी भूमिका की केंद्रीय नेतृत्व ने सराहना की थी। अब राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष जैसा अहम पद मिलना यह दर्शाता है कि पार्टी नेतृत्व उन पर कितना भरोसा करता है।
राजेश अग्रवाल की विदाई
नितिन नबीन से पहले यह जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व वित्त मंत्री राजेश अग्रवाल संभाल रहे थे। अग्रवाल को पीयूष गोयल के बाद यह पद सौंपा गया था। उन्होंने पार्टी के वित्तीय प्रबंधन को डिजिटल और पारदर्शी बनाने में अहम भूमिका निभाई थी। अब उम्र और स्वास्थ्य कारणों से उन्हें इस जिम्मेदारी से मुक्त किया गया है।