शेयर बाजार में ‘ब्लैक वीक’: मिडिल ईस्ट तनाव से सेंसेक्स-निफ्टी में कोहराम, एक हफ्ते में निवेशकों के ₹19 लाख करोड़ स्वाहा!

Share Market: मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ-साथ भारतीय शेयर बाजार की कमर तोड़ दी है। ईरान और इजरायल के बीच छिड़े संघर्ष ने निवेशकों के मन में ऐसा खौफ पैदा किया कि पिछले एक सप्ताह के भीतर शेयर बाजार ताश के पत्तों की तरह ढह गया। आंकड़ों के मुताबिक, महज पांच दिनों के भीतर निवेशकों की करीब 19.86 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति खाक हो गई है।
बाजार में मची भारी मची भगदड़
सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन बाजार में जो गिरावट देखी गई, उसने निवेशकों को गहरे सदमे में डाल दिया। शुक्रवार को सेंसेक्स 1470.50 अंक की भारी गिरावट के साथ 74,563.92 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी 50 में भी 488.05 अंक की बड़ी सेंध लगी और यह 23,151.10 के लेवल पर आकर थमा। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि सिर्फ शुक्रवार के दिन ही बाजार से 10.24 लाख करोड़ रुपये साफ हो गए।
युद्ध की आग में झुलस रहे निवेशक
ईरान-इजरायल संघर्ष की शुरुआत (28 फरवरी) से लेकर अब तक का हिसाब किताब देखें तो तस्वीर और भी डरावनी नजर आती है। युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक निवेशकों को कुल 33.68 लाख करोड़ रुपये का घाटा हो चुका है। अनिश्चितता के इस माहौल में बड़े से बड़े निवेशक भी अब आगे की रणनीति को लेकर संशय में हैं।
इन सेक्टरों पर गिरी सबसे ज्यादा गाज
बाजार की इस सुनामी में कोई भी सेक्टर अछूता नहीं रहा, लेकिन कुछ सेक्टरों में बिकवाली का दबाव सबसे ज्यादा देखा गया:
  • ऑटो सेक्टर: सबसे अधिक प्रभावित रहा, जिसमें पूरे हफ्ते में 10.64% की गिरावट आई। ऑटो इंडेक्स 26,770 से गिरकर 24,195 के करीब आ गया।
  • PSU बैंक: बैंकिंग सेक्टर, खासकर सरकारी बैंकों में 7.27% की कमजोरी दर्ज की गई।
  • अन्य सेक्टर: मेटल (5.90%), रियल एस्टेट (4.35%), ऑयल एंड गैस (4.25%) और आईटी सेक्टर (3.54%) भी लाल निशान में डूबे रहे।
विदेशी निवेशकों (FPI/FII) का पलायन
बाजार गिरने की एक बड़ी वजह विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों द्वारा की जा रही अंधाधुंध बिकवाली है। शुक्रवार, 13 मार्च को विदेशी निवेशकों ने 10,716.64 करोड़ रुपये के शेयर बेचकर बाजार से अपना हाथ खींच लिया, जो पिछले एक साल में एक दिन की सबसे बड़ी बिकवाली है।
पूरे सप्ताह में FPIs ने लगभग 36,071 करोड़ रुपये की निकासी की। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने 37,740 करोड़ रुपये की खरीदारी कर बाजार को संभालने की कोशिश जरूर की, लेकिन विदेशी बिकवाली के तूफान के आगे यह नाकाफी साबित हुई।
निष्कर्ष
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और युद्ध के लंबे खिंचने की आशंका ने भारतीय बाजार के सेंटिमेंट को बिगाड़ दिया है। आने वाले दिनों में यदि वैश्विक स्तर पर शांति की कोई पहल नहीं होती है, तो बाजार में उतार-चढ़ाव का यह दौर जारी रह सकता है।
डिस्क्लेमर: यहाँ मुहैया जानकारी सिर्फ़ सूचना हेतु दी जा रही है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह लें। किसी भी आर्थिक नुकसान के लिए स्वतंत्र समय पत्रकारिता जिम्मेदार नहीं होंगे।