राजस्थान विधानसभा में शून्यकाल के दौरान आहोर से बीजेपी विधायक छगन सिंह राजपुरोहित ने युवाओं के घर से भागकर प्रेम विवाह करने और लिव-इन रिलेशनशिप में रहने का मुद्दा उठाया। उन्होंने इसे परिवार और समाज से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए सदन का ध्यान इस दिशा में बढ़ते मामलों की ओर दिलाया।
विधायक ने कहा कि मौजूदा समय में माता-पिता के सामने नई तरह की चुनौती खड़ी हो रही है। उनके मुताबिक युवक-युवतियां परिवार की जानकारी या सहमति के बिना घर छोड़कर शादी कर रहे हैं, या फिर लिव-इन में रहने लगे हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रवृत्ति का असर सीधे पारिवारिक संबंधों और सामाजिक ताने-बाने पर पड़ रहा है।
राजपुरोहित ने सदन में मांग रखी कि एक तय उम्र तक प्रेम विवाह के मामलों में अभिभावकों की सहमति को अनिवार्य किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि ऐसे फैसलों में परिवार की भूमिका पूरी तरह नजरअंदाज नहीं की जानी चाहिए, क्योंकि इसके परिणाम पूरे परिवार को झेलने पड़ते हैं।
पढ़ाई और परिवार पर असर का मुद्दा
बीजेपी विधायक ने कहा कि इस तरह की घटनाओं में वृद्धि के बीच शिक्षा भी प्रभावित हो रही है। उनके अनुसार कई युवा स्कूल और कॉलेज की पढ़ाई बीच में छोड़ रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कई परिवारों में इस आशंका के कारण माता-पिता खुद बच्चों की पढ़ाई रुकवा देते हैं, ताकि बच्चे घर से बाहर कम जाएं।
सदन में रखे गए अपने बयान में उन्होंने इसे केवल व्यक्तिगत निर्णय का मामला न मानते हुए व्यापक सामाजिक प्रभाव वाला विषय बताया। राजपुरोहित के अनुसार इस प्रवृत्ति से पारिवारिक भरोसा कमजोर होता है और माता-पिता तथा बच्चों के बीच दूरी बढ़ती है।
गुमशुदगी की रिपोर्ट और पुलिस थाने का संदर्भ
विधायक ने पिछले कुछ वर्षों के अनुभवों का हवाला देते हुए कहा कि कई मामलों में लड़की के घर से जाने के बाद माता-पिता थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराते हैं। उन्होंने बताया कि पुलिस जब लड़की को ढूंढकर थाने लाती है, तो कई बार वह अपने माता-पिता को पहचानने से इनकार कर देती है। राजपुरोहित ने कहा कि ऐसी स्थिति परिवारों के लिए गहरा आघात बन जाती है।
“युवक-युवतियां घर से भागकर शादी कर रहे हैं या लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे हैं। एक उम्र तक प्रेम विवाह के मामलों में अभिभावकों की सहमति अनिवार्य होनी चाहिए।” — छगन सिंह राजपुरोहित, बीजेपी विधायक