ब्रेन एन्यूरिज़्म: समय पर सही इलाज से बच सकती है जान, क्या आप तो नहीं है इस बिमारी के शिकार?

दिमाग की नसों में होने वाली एक गंभीर समस्या ब्रेन एन्यूरिज़्म को अक्सर लोग सामान्य सिरदर्द समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। हालाकि यह स्थिति जानलेवा साबित हो सकती है।

केयर सीएचएल अस्पताल के न्यूरोसर्जन डॉ. सिद्धार्थ शर्मा बताते हैं कि जब दिमाग की किसी नस की दीवार कमजोर हो जाती है तो वहां गुब्बारे जैसा उभार बन जाता है। इसे ही ब्रेन एन्यूरिज़्म कहते हैं। समय के साथ यह उभार बढ़ सकता है और अचानक फटने पर ब्रेन हेमरेज की स्थिति बन जाती है।

एन्यूरिज़्म फटने के लक्षण

डॉ. शर्मा के अनुसार एन्यूरिज़्म फटने पर मरीज को अचानक बेहद तेज सिरदर्द होता है। मरीज इसे अपनी जिंदगी का सबसे खराब सिरदर्द बताता है। यह माइग्रेन से बिल्कुल अलग होता है।

माइग्रेन में आधे सिर में दर्द होता है जबकि एन्यूरिज़्म फटने पर पूरे सिर में असहनीय दर्द महसूस होता है। मरीज बेहोश हो सकता है। उसकी समझने और बोलने की क्षमता कम हो जाती है। वह असामान्य रूप से चिड़चिड़ा हो जाता है।

उल्टी, चक्कर आना और गर्दन में अकड़न जैसे लक्षण भी सामने आते हैं।

जांच और निदान

डॉ. शर्मा बताते हैं कि ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत जांच कराना जरूरी है। सबसे पहले सीटी स्कैन किया जाता है। इससे दिमाग में खून जमा होने की जानकारी मिलती है।

ब्रेन हेमरेज की पुष्टि होने पर सीटी एंजियोग्राफी की जाती है। इस जांच से पता चलता है कि दिमाग की कौन सी नस में एन्यूरिज़्म है और वह किस जगह पर फटा है।

दो तरह के इलाज उपलब्ध

ब्रेन एन्यूरिज़्म के दो प्रमुख उपचार विकल्प मौजूद हैं। पहला तरीका सर्जिकल क्लिपिंग है। इसमें ऑपरेशन के जरिए एन्यूरिज़्म पर क्लिप लगाकर खून के बहाव को रोका जाता है।

दूसरा तरीका एंडोवैस्कुलर कॉइलिंग है। इसमें पैर की नस से एक पतली तार के जरिए दिमाग की नस तक पहुंचा जाता है। फिर एन्यूरिज़्म के अंदर कॉइल डालकर उसे बंद कर दिया जाता है।

डॉ. शर्मा के अनुसार किस मरीज में कौन सा इलाज बेहतर रहेगा यह एन्यूरिज़्म की जगह और आकार पर निर्भर करता है।

हाई BP सबसे बड़ा कारण

हाई ब्लड प्रेशर ब्रेन एन्यूरिज़्म का एक बड़ा कारण माना जाता है। कुछ मामलों में यह जेनेटिक भी हो सकता है। यह समस्या आमतौर पर 30 से 60 वर्ष की उम्र के लोगों में ज्यादा देखी जाती है।

ठंड के मौसम में एन्यूरिज़्म फटने का खतरा बढ़ जाता है। समय पर ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखना जरूरी है। धूम्रपान से बचना चाहिए। नियमित स्वास्थ्य जांच कराना इस गंभीर बीमारी से बचाव में मददगार साबित हो सकता है।