Breaking News: इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी की आपूर्ति ने अब एक भयावह रूप ले लिया है। पिछले 24 घंटों के भीतर एक 75 वर्षीय बुजुर्ग और एक दो साल की मासूम बच्ची की मौत के साथ इस त्रासदी में जान गंवाने वालों का कुल आंकड़ा 35 तक पहुंच गया है।
शहर के सबसे स्वच्छ होने के दावों के बीच, इस घटना ने नगर निगम और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पिछले 24 घंटों का घटनाक्रम
ताजा मामलों में 75 वर्षीय शालिग्राम ठाकुर और दो वर्षीय मासूम रिया ने दम तोड़ दिया। सूत्रो के मुताबिक बताया जा रहा है कि शालिग्राम को उल्टी-दस्त की शिकायत के बाद बॉम्बे हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था, जहां वे लंबे समय तक वेंटिलेटर पर रहे।
हालाकि अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि उन्हें हृदय संबंधी समस्याएं भी थीं। वहीं, दो साल की रिया को भी दिसंबर के अंत में संक्रमण के लक्षण दिखे थे, जिसके बाद मंगलवार तड़के उसकी मृत्यु हो गई।
क्या है मौत का कारण? GBS बीमारी का खतरा
चिकित्सकों और विशेषज्ञों के अनुसार, दूषित पानी के कारण मरीज जीबीएस (गुलियन-बैरे सिंड्रोम) नामक दुर्लभ न्यूरोलॉजिकल बीमारी की चपेट में आ रहे हैं।
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क्या है GBS: यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर का इम्यून सिस्टम अपनी ही नसों पर हमला करने लगता है।
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बैक्टीरिया का संबंध: गंदे पानी में पाए जाने वाला ‘कैम्पीलोबैक्टर जेजुनी’ बैक्टीरिया इस बीमारी का मुख्य कारक माना जा रहा है।
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लक्षण: हाथ-पैरों में झुनझुनी, मांसपेशियों में भारी कमजोरी और गंभीर स्थिति में फेफड़ों का काम बंद कर देना। कई मरीजों को सांस लेने के लिए वेंटिलेटर की आवश्यकता पड़ रही है।
हाईकोर्ट सख्त: जांच आयोग का गठन
मामले की गंभीरता को देखते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। पूर्व जस्टिस सुशील कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में एक विशेष जांच आयोग का गठन किया गया है। यह आयोग निम्नलिखित बिंदुओं पर जांच करेगा:
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प्रदूषण का स्रोत: पेयजल पाइपलाइन में सीवरेज का मिश्रण कैसे और कहां हुआ?
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प्रशासनिक चूक: क्या शिकायतों के बावजूद अधिकारियों ने लापरवाही बरती?
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दोषियों पर कार्रवाई: जनहानि के लिए जिम्मेदार ठेकेदारों और अधिकारियों की पहचान।
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भविष्य की योजना: ऐसी घटनाओं को दोबारा रोकने के लिए सुधारात्मक कदम।
जनता से साक्ष्य जुटाने की अपील
आयोग ने प्रभावित क्षेत्र के नागरिकों, डॉक्टरों और सामाजिक संगठनों से अपील की है कि यदि उनके पास पानी के रिसाव, अस्पताल के बिल, डिस्चार्ज समरी या दूषित आपूर्ति के वीडियो/फोटो हैं, तो उन्हें साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत करें। साक्ष्य जमा करने की अंतिम तिथि 28 फरवरी 2026 तय की गई है।
नोट: साक्ष्य इंदौर के स्कीम नंबर 140 स्थित आयोग के कार्यालय में जमा किए जा सकते हैं।